किसान आंदोलन: 9 दिसंबर को राष्ट्रपति से मिलेंगे शरद पवार, किसानों की समस्याओं से कराएंगे अवगत
नई दिल्ली। केंद्र सरकार के नए कृषि कानूनों के खिलाफ उत्तर भरत के किसानों का विरोध प्रदर्शन 11वें दिन भी जारी है। दिल्ली की बॉर्डर पर धरना प्रदर्शन कर रहे हजारों किसानों की मांग है कि केंद्र सरकार नए कानूनों को रद्द करे। किसानों को राजनीति और मनोरंजन जगहत के जुड़े कई हस्तियों का भी समर्थन प्राप्त हुआ है। रविवार को राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) चीफ शरद पवार ने भी आंदोलन कर रहे किसानों के समर्थन में एक बयान दिया है। शरद पवार ने कहा कि इससे पहले आंदोलनकारी किसानों को पूरे देश के किसानों का साथ मिले, सरकार को जल्द स्थिति का समाधान करना चाहिए। किसानों के विरोध में शरद पवार 9 दिसंबर को राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद से मिलने वाले हैं। इस दौरान वह राष्ट्रपति के समक्ष किसानों की समस्याओं को उठा सकते हैं।
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शरद पवार ने किसान आंदोलन पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा, 'संसद के मानसून सत्र में जब बिल पास हो रहा था तो हमने सरकार से आग्रह किया था कि जल्दबाजी ना करें। इस बिल पर चर्चा की जरूरत है इसलिए इसे पहले सिलेक्ट कमिटी को भेजा जाना चाहिए। हालांकि ऐसा नहीं हुआ और बिल पास हो गया। अब इसी जल्दबाजी की वजह से सरकार को दिक्कत हो रही है।' एनसीपी चीफ शरद पवार आगे कहा, 'पंजाब और हरियाणा के किसान मुख्य रूप से धान और गंहू के उत्पादक हैं और वे प्रदर्शन कर रहे हैं। अगर स्थिति का समाधान जल्दी नहीं होता है तो हम देशभर के किसानों को जल्द ही उनके साथ शामिल होता हुआ देखेंगे।'
When Bill was being passed, wed requested govt that they shouldnt be in a hurry, it should be sent to Select Committee & a discussion is needed, but that didnt happen and the Bill was passed in haste. Now govt is facing problems because of that haste: Sharad Pawar, NCP Chief https://t.co/fZg7LaXSrU
— ANI (@ANI) December 6, 2020
बता दें कि केंद्र सरकार के तीन कृषि कानूनों के खिलाफ पिछले कई दिनों से हरियाणा और पंजाब के किसान दिल्ली बॉर्डर पर डटे हुए हैं। किसानों की मांग है कि सरकार इन कृषि कानूनों को वापस ले। किसानों की मांग को लेकर सरकार और फार्मर लीडर्स के बीच 5 बार बैठक हो चुकी है लेकिन अभी तक कोई नतीजा नहीं निकल सका है। अब अगले दौर की बैठक 9 दिसंबर, 2020 को होगी। किसानों की मांग को कांग्रेस सांसद राहुल गांधी, दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल सहित विपक्ष के कई नेताओं का भी समर्थन मिला है। वहीं, सरकार का कहना है कि ये तीनों कानून किसानों की आय बढ़ाने और उन्हें सुरक्षा प्रदान करने के मकसद से बनाए गए हैं।
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