दिल्ली हिंसा: परिवार ने किया हिरासत में मारपीट के बाद मौत का दावा, कोर्ट ने कहा- पोस्टमार्टम का वीडियो और तस्वीरें लें

नई दिल्ली। दिल्ली के उत्तर-पूर्वी इलाकों में हिंसा के दौरान मारे गए लोगों के पोस्टमार्टम में देरी को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। इस बीच दिल्ली की स्थानीय अदालत ने एक मामले में पुलिस और अस्पताल को मृतक व्यक्ति के पोस्टमार्टम के दौरान वीडियो और तस्वीरें लेने का आदेश दिया है। जिस मामले में कोर्ट ने ये फैसला सुनाया है, वह 23 साल के एक मृत शख्स की मौत का मामला है। जिसकी मौत पुलिस हिरासत से छूटने के एक दिन बाद 26 फरवरी को हुई है।

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इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, ये याचिका मृतक युवक के भाई ने दायर की थी। जिसकी पहचान परिवार के वकील के अनुरोध पर सार्वजनिक नहीं की गई है। कोर्ट ने शनिवार को मामले में फैसला सुनाया है। पीड़ित के परिवार का आरोप है कि उसे पुलिस ने हिरासत के दौरान काफी मारा पीटा था और इसी वजह से उसकी मौत हुई है। दावा करते हुए परिवार ने कहा कि कई बार पुलिस स्टेशन जाने के बाद भी उन्हें पीड़ित से नहीं मिलने दिया गया था। परिवार ने इस दलील के साथ कोर्ट का रुख किया है कि दिल्ली पुलिस को सीआरपीसी की धारा 177 के तहत पूछताछ की कार्यवाही करने का निर्देश दें।

कोर्ट ने याचिका स्वीकार करते हुए पुलिस को आदेश दिया है कि वह राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) के दिशा-निर्देषों का पालन करें। जिसके तहत उन्हें पोस्टमार्टम के दौरान तस्वीरें और वीडियो लेनी होंगी। कोर्ट ने ये आदेश तब दिया है, जब पुलिस ने ये जानकारी दी कि पीड़ित युवक का शव अब भी शवगृह में है और उसका पोस्टमार्टम होना बाकी है।

बता दें दिल्ली में हुई हिंसा में 46 लोगों की मौत हो गई है, जबकि सैकड़ों लोग घायल हैं। कई परिवार पुलिस और प्रशासन पर पोस्टमार्टम और शवों को सौंपने में देरी का आरोप लगा रहे हैं। 23 साल के पीड़ित युवक के परिवार की ओर से याचिका वकील मेनका खन्ना ने दायर की थी। आदेश में जज ने कहा, 'IO (जांच अधिकारी) ने एक जवाब दाखिल किया है, जो एलएनजेपी अस्पताल द्वारा मृतक के बारे में दी गई जानकारी पर आधारित है। शव को एलएनजेपी अस्पताल के शवगृह में रखा गया है और आज या कल पोस्टमार्टम किया जाएगा।'

पीड़ित के भाई ने याचिका में कहा है, '24 फरवरी को पीड़ित शख्स शाम करीब 4 बजे अपने घर से निकला था। रात को 8 बजे परिवार को किसी रिश्तेदार ने फोन करके बताया कि वह जीटीबी अस्पताल में है। फिर 24 फरवरी को रात 9 बजे परिवार के सदस्य जीटीबी अस्पताल पहुंचे लेकिन उन्हें पीड़ित नहीं मिला और ना ही अस्पताल ने उसके बारे में कोई जानकारी दी।' याचिका के अनुसार, रात 11 बजे परिवार ज्योति नगर पुलिस स्टेशन गया जब उन्हें पता चला कि पीड़ित को गिरफ्तार कर लिया गया है।

याचिका में आगे लिखा है, 'पुलिस ने जानाकारी दी कि मृतक (पीड़ित युवक) पुलिस स्टेशन में है और उसे अगले दिन रिहा किया जाएगा। हालांकि परिवार को उससे मुलाकात करने नहीं दी गई। फिर 25 फरवरी को परिवार सुबह 8 और 11 बजे पुलिस स्टेशन गया तो उन्हें वापस घर भेज दिया गया। परिवार एक बार फिर रात को 10 से 11 बजे के बीच पुलिस स्टेशन गया, तब पीड़ित को रात के 1 से 2 बजे के बीच छोड़ा गया।' परिवार ने दावा किया है कि पीड़ित को पुलिस ने 'बुरी तरह मारा पीटा था।' उसे 26 फरवरी को दोपहर 2 से 2.30 बजे के करीब एलएनजेपी अस्पताल लाया गया, जहां तुरंत उसका इलाज नहीं किया गया। फिर रात के 11 बजे उसे मृत घोषित कर दिया गया।

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