फेक न्यूज से देश-विरोधी रवैए तक, संसद में पेश होने वाली सिफारिशों से संबंधित रिपोर्ट क्या है ? जानिए
नई दिल्ली, 21 नवंबर: सूचना और प्रॉद्योगिकी पर संसदीय समिति (आईटी पैनल) ने सूचना और प्रसारण मंत्रालय (आई एंड बी) को कई तरह की सिफारिशें की हैं और एक रिपोर्ट के मुताबिक संसद के आने वाले शीतकालीन सत्र में इसे सदन के पटल पर रखा जा सकता है। आईटी पैनल ने जिन विषयों में सुधार की सिफारिशें की हैं, उनमें परंपरागत और डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के अलावा 'राष्ट्र-विरोधी' रवैए तक की विस्तार से व्याख्या से लेकर, फेक न्यूज पर लगाम लगने और टीआरपी के आकलन में चलने वाले कथित खेल को लेकर बेहतर सिस्टम तैयार करने तक के सुझाव शामिल हैं।

संसद के शीतकालीन सत्र में सिफारिशें पेश होंगी-रिपोर्ट
हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक यह सिफारिशें आने वाले सत्र में ही संसद में रखे जाने की संभावना है, जिसमें मीडिया में फेक न्यूज, टीआरपी में गड़बड़ी, मीडिया ट्रायल, खबरों को सनसनीखेज बनाने और एकतरफा रिपोर्टिंग को लेकर आचार संहिता के उल्लंघनों के मामले शामिल किए गए हैं। इस विषय की जानकारी रखने वाले एक व्यक्ति ने एचटी से कहा है कि, 'इन वजहों से लोगों के दिमाग में मीडिया की विश्वसनीयता को लेकर बहुत बड़ा सवालिया निशान पैदा हुआ है, जो कि स्वस्थ लोकतंत्र के लिए अच्छा संकेत नहीं है। स्वस्थ लोकतंत्र जनता की सहभागिता से ही संभव है, जो कि जिम्मेदार मीडिया के जरिए मिलने वाली सटीक सूचना से ही संभव है।'
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सोशल मीडिया में भी लागू होगी आचार संहिता ?
जानकारी के मुताबिक इसमें नई सोशल मीडिया और इंटरमीडियरी गाइडलाइंस को लेकर सरकार की तारीफ भी गई है, साथ ही सूचना और प्रसारण मंत्रालय से यह फीडबैक देने की गुजरारिश की गई है कि यह धरातल पर कैसे काम कर रहा है। उस व्यक्ति ने कहा है, 'समिति को उम्मीद है कि ये दिशानिर्देश डिजिटल मीडिया कंटेंट को रेगुलेट करने में भी काम आएंगे और दोनों मंत्रालय इस तरह से मिलकर काम करेंगे, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि डिजिटल मीडिया भी आचार संहिता का पालन करें।' समिति को यह भी बताया गया है कि एक ऐसी व्यवस्था को लेकर चर्चा चल रही है, जिसमें प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म सभी एक ही तरह के नियमों के अधीन आ जाएं। रिपोर्ट के अनुसार प्रस्तावित कानून के अंदर प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के अलावा, डिजिटल मीडिया, सिनेमा और कथित तौर पर नेटफ्लिक्स और हॉटस्टार जैसे ओवर द टॉप (ओटीटी) प्लेटफॉर्म भी काम करेंगे।

पीसीआई को सशक्त करने की उम्मीद-रिपोर्ट
रिपोर्ट के मुताबिक संसदीय समिति ने कुछ अखबारों में कथित फेक न्यूज को लेकर फिर से अपनी चिंता जाहिर की है। जानकारी के मुताबिक ऐसा पाया गया है कि प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया (पीसीआई) से सेंसर होने के बावजूद कुछ 'गलती करने वाले अखबार वही गलतियां दोहराते रहे हैं', जबतक कि भारत सरकार की नीति के तहत ब्यूरो ऑफ आउटरीच एंड कम्युनिकेशन (बीओसी) ने उसका सरकारी विज्ञापन कुछ समय के लिए रोका नहीं है। 2016 से 2020 के बीच पीसीआई ने 105 मामलों की निंदा की, जिनमें से 70 को बीओसी ने निलंबित किया। समिति ने उम्मीद जताई है कि मंत्रालय/पीसीआई को और सशक्त किया जाएगा, जिससे कि उसके आदेश (पीसीआई के) पूरी तरह से तामील किए जा सकें। इसमें पीसीआई की सदस्यता को विस्तार देते हुए इसमें विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधियों को शामिल करने का भी सुझाव दिया गया है।

'राष्ट्र-विरोधी रवैए' की स्पष्ट व्याख्या का सुझाव
रिपोर्ट में बताया गया है कि पीसीआई ने समिति को सूचित किया है कि उसके पास इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के खिलाफ कई शिकायतें (टीआरपी को लेकर) मिली हैं, लेकिन उसके हाथ बंधे हुए हैं, क्योंकि वह उसके दायरे में नहीं आता। इसलिए पीसीआई ने सरकार को प्रेस काउंसिल ऐक्ट, 1978 के तहत एक ऐसा कानून बनाने को कहा है, जिसके दायरे में सभी तरह के मीडिया प्लेटफॉर्म- प्रिंट, ई-पेपर, न्यूज पोर्टल, सोशल मीडिया के अलावा इलेक्ट्रॉनिक मीडिया जैसे क्षेत्र भी आ जाएं। इसके अलावा संसदीय समिति ने केवल नेटवर्क रूल, 2014 के तहत कोई भी 'राष्ट्र-विरोधी रवैए' पर पाबंदी की परिभाषा को और स्पष्ट तरीके से व्याख्या करने का भी सुझाव दिया है।
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