बेगम की याद में 'मिनी ताजमहल' बनवाने वाले शख्स की सड़क हादसे में मौत

बुलंदशहर। उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर के केसर कलां के रहनेवाले 83 वर्षीय रिटायर्ड पोस्टमास्टर फैजुल हसन कादरी की गुरूवार की देर रात सड़क दुर्घटना में मौत हो गई। फैजुल हसन कादरी बुलन्दशहर में मिनी ताजमहल बनवाने के चलते सुर्खियों में आए थे। परिवार के मुताबिक, उन्हें केसर कलां में एक अज्ञात वाहन ने टक्कर मार दी थी जिसमें वह बुरी तरह घायल हो गए थे। परिजन उन्हें अस्पताल ले गए, जहां से गंभीर हालत में डॉक्टरों ने उन्हें अलीगढ़ रेफर कर दिया गया। शुक्रवार को अलीगढ़ मेडिकल कालेज में इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया। उनके निधन से पूरे इलाके में शोक की लहर है।

 शुक्रवार सुबह करीब 11 बजे उन्हें दम तोड़ दिया

शुक्रवार सुबह करीब 11 बजे उन्हें दम तोड़ दिया

वह गुरुवार करीब साढ़े दस बजे घर के बाहर टहलने के लिए निकले थे। कादरी के भतीजे मोहम्मद असलम कादरी ने बताया कि वह चोट से कराहकर जमीन पर पड़े थे। शुक्रवार सुबह करीब 11 बजे उन्हें दम तोड़ दिया। परिजनों के मुताबिक, दो साल पहले भी साइकिल से उनका एक्सीडेंट हुआ था। इसके बाद से वह ज्यादातर पैदल ही चला करते थे। उन्हें निर्माणाधीन मिनी ताजमहल के अंदर उनकी बेगम की कब्र के पास दफनाया गया है। ताजनगरी आगरा से 130 किमी दूर बुलंदशहर के कसेर कलाँ गाँव में 85 बरस के कादरी ने अपनी उस मरहूम बेगम की याद में ताजमहल बनबाया है जिसे वह बेइन्तेहा प्यार करते थे। कादरी ने इस ताजमहल को बनवाने में अपनी जिंदगी की सारी जमापूँजी करीब 23लाख रूपये खर्च कर दिये। लेकिन ताजमहल का ढाँचा संगमरमरी हो पाता उससे पहले ही उनकी रकम खत्म हो गयी।

2012 में की थी शुरूआत

2012 में की थी शुरूआत

2012 से कादरी ने अपने घर के पास बने खेत में ताजमहल बनवाने की शुरूआत की थी। कादरी ने इस इमारत के निर्माण में स्थानीय राजमिस्त्रियों से काम कराया। ताजमहल की तस्वीर से प्रेरणा लेकर कादरी ने अपनी पत्नी तजुम्मली बेगम के मकबरे को शक्ल दी तो लोग इसे ताजमहल कहने लगे। इस ताजमहल की चर्चाऐं देश-प्रदेश से लेकर सात समंदर पार तक पहुँची और इसे चाहने वाले सैलानी और विदेशी पत्रकार यहाँ आने लगे।

संगमरमर के लिए जोडे 74 हजार

संगमरमर के लिए जोडे 74 हजार

2014 में कादरी के पास जब रूपये खत्म हो गये तो उन्होने इस इमारत पर संगमरमर लगवाने के लिए अपनी 10 हजार रूपये की पैंशन में से रकम जुटानी शुरू की। पेट भरने के बाद जो रूपये पैंशन में से बचते है उन्हें जोड़कर कादरी ने अब तक 74 हजार रूपये जमा किये है। लेकिन ताजमहल को संगमरमरी होने में करीब10 लाख रूपये का खर्चा आयेगा।

450 गजलें लिख चुके हैं फैजुल

450 गजलें लिख चुके हैं फैजुल

उर्दू, हिंदी और फारसी के जानकार फैजुल हसन कादरी अपनी बेगम के लिए अब तक 450 से ज्यादा गजलें लिख चुके है। अब वह इन गजलों का प्रकाशन ऊर्दू और फारसी के अलावा हिंदी में भी कराना चाहते है।

"न ये शीशमहल है न कोई ताजमहल

है यादगार-ए-मुहब्बत..ये प्यार का है महल

यहाँ पर चैन से सोया है दिलनशीं मेरा

उड़ाके लायी है गुलशन से मेरा फूल अजर..."

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