Made in China का क्या होगा ? अब भारत में बने खिलौनों की बहार, निर्यात में 6 गुना से ज्यादा उछाल
भारतीय खिलौना उद्योग को वैश्विक स्तर पर बड़ी कामयाबी मिल रही है। खिलौनें का निर्यात लगातार कई गुना बढ़ चुका है, जबकि आयात में भारी गिरावट दर्ज की जा रही है।

भारत में ही नहीं दुनिया भर के बाजारों में एक वक्त मेड इन चाइना खिलौने का भरमार होता था। लेकिन, बीते कुछ समय में खिलौना निर्यात में भारत ने क्रांति ला दी है। इसके ठीक विपरीत खिलौना आयात में रिकॉर्ड कमी दर्ज की जा रही है। जबकि, भारत में बने खिलौनों के निर्यात में कुछ ही वर्षों में 6 गुना से ज्यादा बढ़ोतरी दर्ज की गई है। यानि भारत में बने खिलौनों की वैश्विक मांग बढ़ रही है। सकारात्मक बात यह है कि 'वोकल फॉर लोकल' की नीति ने पूरे खिलौने बाजार का परिदृश्य ही बदलना शुरू कर दिया है। भारतीय संस्कृति और इतिहास पर आधारित डिजाइन वाले खिलौनों की वैश्विक मांग बढ़ना, देश की अर्थव्यवस्था के लिए ही नहीं, पर्यावरण के लिए भी बेहतर है। क्योंकि, स्वदेशी तकनीक में इसपर भी खास ध्यान दिया जा रहा है।

चालू वित्त वर्ष में दिसंबर तक 1,017 करोड़ रुपए का खिलौना निर्यात
भारत से खिलौने के निर्यात का आंकड़ा चालू वित्त वर्ष के दौरान सिर्फ अप्रैल से दिसंबर तक में 1,017 करोड़ रुपए को छू चुका है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक साल 2021-22 में खिलौने का कुल निर्यात महज 2,601 करोड़ रुपए था। खिलौने के निर्यात में यह बदलाव इस वजह से दिखाई पड़ रहा है, क्योंकि सरकार इसके घरेलू निर्माण को बढ़ावा देने के लिए सारे जतन कर रही है। सरकार की कोशिश है कि खिलौने का आयात पूरी तरह से कम कर दिया जाए, खासकर चीन जैसे देशों से मंगवाए जाने वाले खिलौने, जिनकी क्वालिटी बहुत ही घटिया मानी जाती है और एक समय लगभग पूरे बाजार पर उनका कब्जा नजर आता था। इसकी मुख्य वजह इसका सस्ता होना माना जा सकता है।

तीन साल में खिलौने के आयात में 70% की गिरावट
वित्त वर्ष 2018-19 में देश में कुल 2,960 करोड़ रुपए के खिलौने का आयात किया गया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने 'वोकल फॉर लोकल' के दर्शन पर खूब फोकस कर रखा है। इसके तहत भारतीय संस्कृति और इतिहास पर आधारित स्वदेशी डिजाइन पर आधारित खिलौने को प्रमोट किया जा रहा है और ताजा सरकारी आंकड़ों को देखने से लगता है कि यह आइडिया काम कर रहा है। साल 2021-22 में भारत का कुल खिलौना आयात 70 फीसदी घटकर 870 करोड़ रुपए रह गया है।

खिलौने का आयात शुल्क 20% से बढ़ाकर 70% किया गया है
विदेशी खिलौनों पर निर्भरता घटाने और स्वदेशी खिलौनों का बाजार बढ़ाने के इरादे से सरकार ने 2020 के फरवरी में खिलौने पर आयात शुल्क 20 फीसदी से बढ़ाकर 60 फीसदी कर दिया था। लेकिन, अब इसमें और भी बढ़ोतरी करके 70 फीसदी कर दिया गया है। सरकार खिलौनों के लिए एक नई वित्तीय योजना प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव स्कीम (PLI) शुरू करने पर भी विचार कर रही है। 2020 में केंद्र सरकार ने एक टॉयज (क्वालिटी कंट्रोल) ऑर्डर भी जारी किया था।
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9 वर्षों में 6 गुना से ज्यादा बढ़ा खिलौना निर्यात
आदेश के मुताबिक खिलौने बनाने में उचित भारतीय मानकों का इस्तेमाल होगा और इसके लाइसेंस के तहत मानक चिन्ह लगाने होंगे। यह मानक सभी तरह के खिलाना उत्पादकों पर लागू होगा, चाहे घरेलू निर्माता हों या फिर विदेशों से आयात होने वाले खिलौने। केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने 2013 से लेकर बीते साल दिसंबर तक के जो आंकड़े बताए हैं, उसके मुताबिक भारत का खिलौना निर्यात इस अवधि में 6 गुना से भी ज्यादा बढ़ा है। (कुछ तस्वीरें सांकेतिक, इनपुट-पीटीआई)
मेड इन इंडिया खिलौनों की बढ़ी डिमांड
केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने भारत के खिलौना निर्यात का आंकड़ा बताने के लिए एक ट्वीट किया है। उन्होंने लिखा है, 'मेड इन इंडिया खिलौनों का वैश्विक बाजार में बढ़त जारी! भारतीय खिलौनों का निर्यात अप्रैल-दिसंबर 2022 में 2013 की इसी अवधि की तुलना में 6 गुना से ज्यादा बढ़ा है।' साल 2013-14 के अप्रैल से दिसंबर के बीच सिर्फ 167 करोड़ रुपए का निर्यात हुआ था।
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