केजरीवाल की सरकार पर करुणानिधि बोले जस्ट वेट एंड वॉच

वनइंडिया के चीफ एडिटर एके खान से एक विशेष साक्षात्कार में करुणानिधि ने अटल बिहारी वाजपेयी से लेकर नरेंद्र मोदी तक के शासन पर चर्चा की। लोकसभा चुनाव 2014 पर भविष्यवाणी के साथ-साथ उन्होंने वो रहस्य भी खोले, जो उनके और कांग्रेस के रिश्ते के टूटने के कारण थे। प्रस्तुत है बातचीत के मुख्य अंश-
प्र- कहा जाता है कि आप कोई भी निर्णय लेने में हिचकते नहीं हैं। कौन सा ऐसा निर्णय है, जिसे लेने में आपको बहुत सोचना पड़ा हो?
उ- ऐसा कोई निर्णय नहीं है, जिसमें मुझे कोई झिझक हुई हो।
प्र- डीएमके में अन्ना के बाद आप थे, अब पार्टी में आपके बाद कौन है?
उ- डीएमके सबसे बड़ा लोकतांत्रिक संगठन है। यह पार्टी की कार्य समिति निर्णय लेगी कि मेरे बाद कमान कौन संभालेगा।
प्र- ऐसा कोई क्षेत्र नहीं है, जिसे आपने छुआ नहीं हो। आपके हिसाब से ऐसा कौन सा काम है, जो आप अच्छे से नहीं कर पाये?
उ- हर प्रकार की परिस्थितियों में मेहनत से काम करना ही मैंने सीखा है और यही मैं सोचता हूं।
प्र- अगर आपके जीवन पर कोई फिल्म बनायी जाये, तो आपको क्या लगता है कौन आपका रोल अच्छे से निभा पायेगा?
उ- आप मुझे चांस क्यों नहीं देते अपना खुद का रोल करने का।
प्र- जनता के साथ बहुत बड़ा समय बिताया आपने, तमिलनाडु और तमिल लोगों के लिये किये गये अपने योगदान से क्या आप संतुष्ट हैं?
उ- मेरी संतुष्टि छोड़ दीजिये, क्या आप मेरे काम से संतुष्ट हैं। मैं अभी भी काम कर रहा हूं, क्योंकि अब तक मैंने जो भी किया उससे मैं संतुष्ट हूं। और तमिलनाडु और तमिल लोगों के लिये मेरा काम मेरे जीवन के अंतिम दिन तक जारी रहेगा।
प्र- एक नेता के रूप में बहुत सारे लोग आपको चाहते हैं। कौन से ऐसे नेता हैं, जिन्हें आप सबसे ज्यादा मानते हैं पेरियार या अन्ना?
उ- सभी नेता मुझे पसंद हैं। ऐसा कोई नहीं, जो मुझे पसंद नहीं। मैं ऐसा व्यवहार करता हूं, कि जो लोग मुझे पसंद नहीं भी करते हैं, पसंद करने लगें। अगर नेताओं की बात करें तो कमाराजार, राजाजी, क्वैद ए मिलात, इंदिरा गांधी, एमजीआर, पोसम्पन मुतुरामालिंगा थेवर, ज्योति बसु, वीपी सिंह, अटल बिहारी वाजपेयी, जीवा, मापोसी और कई हैं।
प्र- क्या ईलम मुद्दे पर डीएमके कांग्रेस से अलग हुई?
उ- सिर्फ वही नहीं, कांग्रेस के केंद्रीय नेता आज भी मुझे चाहते हैं और मेरे साथ भावनात्मक रूप से जुड़े हुए हैं, लेकिन राज्य स्तर के नेता बिलकुल अलग विचारधारा वाले हैं। यह एक बड़ा कारण था, उनसे अलग होने का।
प्र- द्रविड़ आंदोलन का आधार सांप्रदायिक-विरोधी होना था। इसके बावजूद डीएमके भाजपा के साथ गठबंधन क्यों नहीं करती है।
उ- डीएमके की कार्य परिष्द की बैठक में मैंने कहा था कि भाजपा के साथ रिश्ता तभी समाप्त हो गया, जब वाजपेयी रिटायर हुए। जब पत्रकार यह पूछते हैं कि क्या डीएमके भाजपा और कांग्रेस के बिना चुनाव लड़ेगी, तो मेरा जवाब हां में होता है।
प्र- गुजरात दंगे तब हुए थे, जब वाजपेयी प्रधानमंत्री थे। वाजपेयी काल की भाजपा और वर्तमान भाजपा में आपको क्या अंतर दिखाई पड़ता है?
उ- जैसे ही वाजपेयी ने अपनी दिशा बदली थी, वैसे ही हमने भाजपा का साथ छोड़ दिया था।
प्र- तमिलनाडु में डीएमके वामपंथी दलों की मित्र पार्टी रही है। लेकिन पिछले कुछ सालों से यह दोस्ती कहां चली गई?
उ- हाल ही में मैंने कार्य परिष्द की बैठक में कहा था, "हमें पार्टी के नाम से कोई लेना देना नहीं, हमें बस यही देखना होगा कि कौन पार्टी का नेता है, वो कैसे काम कर रही है, वो कितना हमें पसंद करते हैं, वो हमारा कितना सम्मान करते हैं। यही बातें डीएमके-वाम दलों की मित्रता पर भी लागू होती हैं।" रही बात मेरी अपनी सोच की तो डीएमके का झुकाव हमेशा से वाम दलों की तरफ रहा है।
प्र- कांची शंकररमन हत्याकांड के मामले में डीएमके की मातृ पार्टी डीके ने शकंकराचारियारों के खिलाफ प्रदर्शन किया और राज्य से मांग की कि वह कोर्ट के फैसले के खिलाफ अपील करे। लेकिन डीएमके मौन है, क्यों?
उ- मैं कोर्ट के निर्णय पर कोई कमेंट नहीं कर सकता। और यह आप जानते हैं।
प्र- 1996 से आपने यूनाइटेड फ्रंट, एनडीएफ और यूपीए सरकारों में भाग लिया। राजनीति के पंडित जानते हैं कि कौन जीतेगा, कौन हारेगा इसकी भविष्यवाणी करने में आप माहिर हैं। हो सकता है आपको अभी से आईडिया लग गया हो कि 2014 में कौन जीतेगा। तो जरा बताइये 2014 में कौन जीतेगा, कौन हारेगा? यदि केंद्र में गैर-कांग्रेसी सरकार केंद्र में आयी, तो डीएमके की क्या भूमिका होगी?
उ- लोकसभा चुनाव में कुछ ही महीने रह गये हैं। वर्तमान परिस्थितियों में इस प्रश्न का उत्तर देना ठीक नहीं होगा। वैसे 2014 में उसी पार्टी की सरकार बनेगी, जो पूर्ण बहुमत से आयेगी। यह मैं अभी नहीं कह सकता कि केंद्र में नरेंद्र मोदी सरकार बनायेंगे या नहीं।
प्र- मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी और नवीन पटनायक अपने राज्यों में बहुत अच्छा साशन चला रहे हैं और लगातार चुनाव जीतते जा रहे हैं। लेकिन तमिलनाडु उत्तर प्रदेश, केरल लोग लगातार सरकारें बदल रहे हैं। इस पर आपका क्या कहना है?
उ- मैं इस बात को नहीं मानता कि सिर्फ अच्छा शासन देकर आप फिर से चुनाव जीत सकते हैं। और उसी जगह पर मैं यह भी नहीं मानता कि तमिलनाडु, केरल और यूपी में पार्टियां अच्छा शासन नहीं कर पा रही हैं। वास्तव में देखा जाये तो लोग हर बार परिवर्तन चाहते हैं, इसलिये रूलिंग पार्टी के खिलाफ जाकर वोट करते हैं।
प्र- दिल्ली की राजनीति में आम आदमी पार्टी ने सब कुछ पलट कर रख दिया। राजनीति के पंडित कहते हैं कि भारतीय राजनीति में यह बहुत बड़ा परिवर्तन है। क्या शहरी भारत इस नई पार्टी को ऊंचाईयों तक ले जायेगा?
उ- जस्ट वेट एंड वॉच यानी इंतजार करिये और देखिये आगे-आगे क्या होता है।












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