पूर्व PM मनमोहन सिंह ने बीच में छोड़ दी थी प्री-मेडिकल पढ़ाई, बेटी दमन का खुलासा
नई दिल्ली। एक ओर जहां पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को लेकर विपक्ष ने 'मौन' नेता की छवि पेश की वहीं उनकी बेटी ने एक किताब लिखकर कई अनसुलझे-अनकहे-अनसुने-अनदेखे राज खोल दिए हैं। डॉ. सिंह की पुत्री दमन सिंह ने अपनी पुस्तक ‘स्ट्रिक्टली पर्सनल: मनमोहन एंड गुरशरण' में वो खुलासे जो हैं थोड़े खेट्टे, थोड़े मीठ-

- अपने पिता की हार्दिक इच्छा पर मनमोहन सिंह ने प्री-मेडिकल पाठ्यक्रम में प्रवेश लिया था, लेकिन उन्होंने कुछ महीने बाद इंट्रेस्ट ना आने पर वह पढ़ाई छोड़ दी।
- दमन अपने पिता को विनोदी व जिंदादिल व्यक्ति मानती हैं और कहती हैं कि उनका हास्यबोध बेहद अच्छा है।
- अप्रैल 1948 में सिंह ने अमृतसर के खालसा कालेज में दो वर्ष के एफएससी पाठ्यक्रम में प्रवेश लिया।
- सिंह याद करते हुए कहते हैं, "मैं अपने पिता की दुकान पर बैठने लगा। मुझे वह भी अच्छा नहीं लगा, क्योंकि मुझसे सम्मानजनक व्यवहार नहीं होता था।
- कहा गया है कि पिता ने सोचा कि उन्हें दोबारा कालेज जाना चाहिए। वे कहते हैं ''मैंने सितंबर 1948 में हिंदू कालेज में प्रवेश ले लिया।"
- अर्थशास्त्र ऐसा विषय था जिसने उन्हें तत्काल आकर्षित किया।
- मनमोहन अपनी पुत्री से कहते हैं, "मुझे हमेशा से ही गरीबी, कुछ देश गरीब क्यों हैं, अन्य अमीर क्यों हैं, जैसे मुद्दों में रुचि थी। मुझे बताया गया कि अर्थशास्त्र ऐसा विषय है जिसमें इस तरह के संवादों पर सवाल-जवाब संभव है।
- हार्परकॉलिन्स इंडिया द्वारा प्रकाशित पुस्तक में लिखा है कि कैंब्रिज विश्वविद्यालय में पढ़ाई के दौरान धन ही ऐसा मुद्दा था जो मनमोहन को परेशान करता था।
- दमन लिखती हैं, "उनके शिक्षण और रहने का खर्च वर्ष में करीब 600 पाउंड आता था। पंजाब विश्वविद्यालय की छात्रवृत्ति से उन्हें 160 पाउंड मिलते थे।
- मनमोहन को बहुत कम खर्चे में गुजारा करना पड़ता था व भोजन कक्ष में उन्हें दो शिलिंग छह पेंस में भोजन मिलता था जो अपेक्षाकृत बहुत सस्ता था।
- दमन फिर लिखती हैं कि उनके पिता कभी भी बाहर खाना नहीं खाते थे। और शायद ही कभी बियर या शराब पीते थे, क्योंकि घर से धनराशि समय से न पहुंचने पर संकट में पड़ सकते थे।
- मनमोहन ने अपने एक मित्र से भी कहा कि वह उन्हें दो वर्षों के लिए 25 पाउंड भेज दें, लेकिन मित्र मात्र तीन पाउंड ही भेज पाए।
- दमन अपने पिता को काफी मजेदार व्यक्ति मानती थीं। दमन लिखती हैं, "चिंतनशील मुद्रा में वह अपनी तर्जनी उंगली अपने नाक की ओर रखकर बैठ जाते थे।
- वह लिखती हैं, "उनका एक पक्ष यह भी था कि वह दूसरों को उपनाम देना पसंद करते थे। हमारे एक चाचा का नाम ‘जॉन बाबू', अन्य का नाम ‘जेवेल बाबू' और तीसरे ‘चुंज वाले' थे।
- मेरी मां ‘गुरुदेव' थीं और हम तीनों के नाम क्रमश: ‘किक', ‘लिटिल नोआन' और ‘लिटिल राम' थे।"
More From
-
क्या कंगना रनौत ने चुपचाप कर ली सगाई? कौन है BJP सांसद का मंगेतर? इंटरनेट पर क्यों मचा हंगामा? जानें सच -
तो इसलिए बदले जा रहे CM, गवर्नर–सीमांचल से नया केंद्रशासित प्रदेश? नया राज्य या UT बनाने के लिए क्या है नियम? -
PM Kisan Yojana: मार्च की इस तारीख को आएगी पीएम किसान की 22वीं किस्त! क्या है लेटेस्ट अपडेट? -
Balen Shah Rap Song: वो गाना जिसने बालेन शाह को पहुंचा दिया PM की कुर्सी तक! आखिर क्या था उस संगीत में? -
UPSC में 301 रैंक पर 2 आकांक्षा सिंह! ब्रह्मेश्वर मुखिया की पोती या वाराणसी की डॉक्टर-कौन हुआ पास, क्या है सच? -
पिता की चिता को मुखाग्नि देने के बाद दिया इंटरव्यू, रूला देगी UPSC क्रैक करने वाली जूही दास की कहानी -
UPSC पास करने वालों में 24 बिहार से, टॉप-20 में जगह बनाने वाले 5 छात्र कौन हैं? Success Story करेगी प्रेरित -
Iran Vs USA: ईरान के पलटवार से तबाह हुआ अमेरिका! खाली हुए मिसाइल गोदाम, रातों-रात 4 गुना हथियार बनाने का आदेश -
IND vs NZ: 'झूठ बोल रहा है!' सेंटनर के बयान पर सूर्यकुमार यादव का पलटवार, फाइनल से पहले गरम हुआ माहौल -
UPSC इंटरव्यू में पूछा गया विराट कोहली से जुड़ा यह सवाल, आकांक्षा सिंह के जवाब ने पक्की कर दी 301वीं रैंक -
Israel Iran War के बीच आखिर भारत कैसे पहुंचा ईरान का युद्धपोत? तेहरान के ‘इमरजेंसी कॉल’ पर भारत ने दी मदद -
US Iran war Update: ईरान की सैन्य ताकत पर ट्रंप का बड़ा दावा, बोले- ‘सब खत्म, जहाज भी डूबे’












Click it and Unblock the Notifications