स्वेज नहर में फंसे कार्गो जहाज के सभी क्रू भारतीय, कंपनी ने बताया, कैसी है हालत ?
काहिरा। दुनिया के सबसे व्यस्त जलमार्गों में से एक स्वेज नहर में एक कार्गो जहाज एवर गिवेन के फंस जाने के कारण इस मार्ग पर जहाजों की आवाजाही पूरी तरह रुक गई है। स्वेज नहर अथॉरिटी के अधिकारी इस मार्ग को खोलने में लगे हुए हैं लेकिन 400 मीटर लंबे और 59 मीटर चौड़े इस जहाज को निकालने में कई दिन लग सकते हैं। लेकिन इस जहाज का भारत से खास कनेक्शन है और वह इसके क्रू को लेकर है। इस जहाज पर काम करने वाला सारा क्रू भारतीय है। लंबे समय तक जहाज के फंसने की आशंका के साथ ही क्रू को लेकर चिंता बढ़ गई है।

जहाज पर तैनात सभी भारतीय क्रू सुरक्षित
फिलहाल मिल रही जानकारी के मुताबिक इस जहाज पर तैनात सभी क्रू सुरक्षित हैं। जहाज का संचालन करने वाली कंपनी ने बताया है कि जहाज पर काम करने वाला 25 सदस्यीय क्रू पूरी तरह सुरक्षित है।
मंगलवार सुबह जब जहाज स्वेज नहर में फंसा था उस समय भारतीय क्रू के साथ स्वेज नहर अथॉरिटी के 2 पायलट भी मौजूद थे जो कार्गो को निर्देशित कर रहे थे।
जहाज के जापानी मालिक शोई काइसेन काइशा ने कहा कि क्रू के सभी सदस्य भारत से आए थे और सभी सुरक्षित हैं। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि वह स्थिति को जल्द से जल्द ठीक करने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन यह बहुत ही मुश्किल काम होता जा रहा है।

जहाज के मालिक ने मांगी माफी
इसके साथ ही उन्होंने दुनिया के सबसे व्यस्त जलमार्ग को बाधित होने के लिए माफी भी मांगी है। एवर गिवेन के स्वेज नहर में फंसने की वजह से करीब 150 जहाज उसके पीछे फंसे हुए हैं। हालांकि स्वेज नहर प्राधिकरण ने नहर के दूसरे चैनल को फिर से खोला है। बावजूद इसके मार्ग अभी भी छोटे जहाजों के सिवा बड़े जहाज फंसे ही हुए हैं।
मंगलवार को 400 मीटर लंबा एवर गिवेन कंटेनर जहाज स्वेज नहर को पार करते इसमें फंस गया था जिसके चलते इसमें आवाजाही ठप हो गई है। अधिकारियों ने बताया कि तेज हवाओं के चलते यह जहाज नहर में तिरछा हो गया और किनारे पर होकर फंस गया।

सबसे व्यस्त जलमार्ग में फंसा एवर गिवेन
भूमध्य सागर और लाल सागर को जोड़ने वाली स्वेज नहर दुनिया के सबसे व्यस्त मानव निर्मित व्यापारिक जलमार्गों में से एक है। इसका अंदाजा इस बात से लगा सकते हैं कि दुनिया में होने व्यापार का 12 प्रतिशत हिस्सा इस नहर से होकर गुजरता है। इस नहर के चलते जहाजों के लिए एशिया और यूरोप के बीच की दूरी बहुत कम हो जाती है। इसके बदले में अफ्रीका के दक्षिणी तट से होकर गुजरने में जहाजों को दो सप्ताह का अधिक समय लगता है।
इस जहाज का संचालन ताइवानी ट्रांसपोर्ट कंपनी एवरग्रीन मरीन करती है लेकिन इसे एवर गिवेन कहा जाता है।
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