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Ethiopia volcanic Eruption: भारत में कब तक रहेगा हेली गुब्बी ज्वालामुखी का असर? कितना खतरा? पढ़ें IMD अपडेट

Ethiopia volcanic eruption: इथियोपिया में 12 हजार साल बाद जागे हेली गुब्बी ज्वालामुखी (Hayli Gubbi volcano) ने दुनिया भर में हड़कंप मचा दिया है। इस ज्वालामुखी के फटने से आसमान में उठी राख और सल्फर डाइऑक्साइड की मोटी परत ने हजारों किलोमीटर दूर तक असर दिखाया है। इसका सबसे बड़ा नतीजा भारत में देखने को मिला, जहां दिल्ली सहित उत्तर भारत के कई इलाकों के आसमान में सोमवार (24 नवंबर) रात राख के गुबार ने दस्तक दे दी थी।

हालांकि IMD ने साफ कर दिया है कि यह राख मंगलवार शाम 7.30 बजे तक भारत से पूरी तरह हट जाएगी और चीन की ओर बढ़ जाएगी। लेकिन सवाल यह है कि यह घटना कितनी बड़ी थी, भारत पर कितना असर पड़ा और आगे क्या खतरा बचा हुआ है।

Ethiopia volcanic eruption

12 हजार साल बाद जागा ज्वालामुखी, राख पहुंची 14-15 किमी ऊंचाई तक

हेली गुब्बी ज्वालामुखी इथियोपिया के अफार क्षेत्र में स्थित है और इतना शांत था कि वैज्ञानिकों के पास इसके फटने का कोई आधुनिक रिकॉर्ड ही नहीं था। रविवार (23 नवंबर) सुबह अचानक हुए धमाके ने 14 से 15 किमी ऊंचाई तक राख का बादल खड़ा कर दिया। इतना ऊंचा कि यह बादल तेज हवाओं के साथ लाल सागर पार करता हुआ यमन, ओमान और फिर भारत तक पहुँच गया।

इंडिया मेट स्काई वेदर अलर्ट ने पुष्टि की कि सोमवार (24 नवंबर) रात करीब 11 बजे यह राख दिल्ली के आसमान तक पहुंच चुकी थी। यह दूरी लगभग 4300 किमी है, जो इस विस्फोट की तीव्रता बताती है।

भारत में उड़ानों पर बड़ा असर, कई फ्लाइट्स रद्द

सबसे ज्यादा असर एयर ट्रैफिक पर देखने को मिला। एयर इंडिया ने 11 उड़ानें रद्द कीं। इंडिगो की कन्नूर-अबू धाबी फ्लाइट को अहमदाबाद डायवर्ट करना पड़ा।

अकासा एयर और KLM ने भी कई रूट बदले या उड़ानें रद्द कीं। DGCA ने तुरंत ICAO के मुताबिक SIGMET चेतावनी जारी की और एयरलाइंस को राख वाले इलाकों से दूर रहने के निर्देश दिए। राख के सूक्ष्म कण इंजन के अंदर जाकर कांच जैसे ग्लास पार्टिकल्स बना देते हैं, जिससे इंजन फेल होने का खतरा होता है।

DGCA ने चेतावनी जारी की- अगर इंजन में जरा भी दिक्कत हो तो तुरंत रिपोर्ट करें

DGCA ने एयरलाइंस के लिए स्पेशल एडवाइजरी जारी की जिसमें कहा गया कि राख वाले एरिया के ऊपर उड़ान न भरें। रूट और फ्लाइट लेवल तुरंत बदलें। इंजन में धुआं, बदबू या परफॉर्मेंस में गड़बड़ी महसूस हो तो फौरन रिपोर्ट करें। एयरपोर्ट रनवे और टैक्सीवे की जांच लगातार की जाए। हालांकि राहत की बात यह है कि राख बहुत ऊपर थी, इसलिए एयरपोर्ट ऑपरेशंस पर बड़ा असर नहीं पड़ा।

क्या दिल्ली की हवा और खराब होगी? IMD का जवाब आया

दिल्ली की हवा पहले ही कई हफ्तों से खराब है, ऐसे में राख के बादल की खबर से लोग घबरा गए। लेकिन IMD और पर्यावरण विशेषज्ञों ने कहा है कि यह राख 25,000 से 45,000 फीट की ऊंचाई पर है। इसलिए जमीन पर प्रदूषण नहीं बढ़ेगा। बस सूर्योदय और सूर्यास्त थोड़ा अलग दिख सकते हैं, क्योंकि ऊपरी परत में प्रकाश विकरित होता है। हालांकि यह भी सच है कि ज्वालामुखी की राख में ग्लास जैसी महीन कण, सिलिका और सल्फर डाइऑक्साइड होते हैं, जो सेंसिटिव इलाकों विशेषकर हिमालय पर कुछ असर डाल सकते हैं।

अब राख चीन जाएगी, भारत को राहत

IMD के मुताबिक राख की परत तेज हवाओं के साथ उत्तर-पूर्व दिशा में 120-130 किमी/घंटा की रफ्तार से बढ़ रही है। यह आज शाम 7.30 बजे तक पूरी तरह भारत से निकल जाएगी। इसके बाद राख सीधे चीन की ओर बढ़ेगी।

हजारों साल शांत रहने वाला ज्वालामुखी अब क्यों फटा? वैज्ञानिकों के पास नया सुराग

हेली गुब्बी अफार रिफ्ट का हिस्सा है, जहां धरती की टेक्टॉनिक प्लेटें धीरे-धीरे अलग होती जा रही हैं। इस वजह से यहां भीतर मैग्मा लगातार मूव करता है। अफार क्षेत्र में एर्टा एले जैसे ज्वालामुखियों पर पहले से निगरानी रखी जाती है, लेकिन हेली गुब्बी के अचानक जागने ने वैज्ञानिकों को चौंका दिया है।

गल्फ न्यूज के मुताबिक ज्वालामुखी से बड़ी मात्रा में SO₂ गैस निकल रही है, जिससे यह आशंका जताई जा रही है कि अंदर दबाव बढ़ रहा है। मैग्मा ऊपर की ओर धकेला जा रहा है। आगे और धमाके हो सकते हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह घटना टेक्टॉनिक रिफ्ट ज्वालामुखियों के व्यवहार को समझने में नया अध्याय जोड़ देगी।

विस्फोट के बाद आसपास के गांवों पर राख की मोटी परत जम गई, लेकिन किसी की मौत नहीं हुई। यमन और ओमान ने अपने नागरिकों को एहतियात बरतने की सलाह दी है, खासकर जिन लोगों को सांस की समस्या है।

भारत को फिलहाल राहत, लेकिन घटना ने कई गंभीर सवाल खड़े किए

इथियोपिया के इस अचानक विस्फोट ने दुनिया को याद दिलाया है कि प्रकृति का संतुलन कितना संवेदनशील है। भारत को सीधे तौर पर बड़ा नुकसान नहीं हुआ, लेकिन एयर ट्रैफिक बुरी तरह प्रभावित हुआ। वैज्ञानिकों के लिए यह एक बड़ी चेतावनी है। भविष्य में ऐसे विस्फोटों की मॉनिटरिंग और जरूरी हो जाएगी। IMD की राहत भरी घोषणा के बाद भारत के लिए खतरा फिलहाल खत्म हो रहा है, लेकिन इस राख का सफर अभी जारी है।

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