थर्र-थर्र कांपते हैं कोयला माफिया इस पर्यावरण मित्र से ...

इसे ग्रीन नोबेल के नाम से भी जाना जाता है। उनके अलावा अमेरिका, रूस, दक्षिण अफ्रीका, पेरू और इंडोनेशिया के पांच पर्यावरणविद् भी इस पुरस्कार से सम्मानित किए जाएंगे। अमेरिका के सेन फ्रांसिस्को में एक भव्य समारोह में प्रत्येक विजेता को पौने दो लाख डॉलर की राशि दी जाएगी।
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गोल्डमैन एनवायरनमेंट फाउंडेशन की तरफ से सोमवार को जारी एक विज्ञप्ति में बताया गया कि रमेश अग्रवाल का दफ्तर मात्र एक छोटा साथ इंटरनेट कैफे था। इसकी मदद से उन्होंने गांव वालों को जागरूक किया और विकास परियोजनाओं के बारे में जानकारी हासिल की।
वे छत्तीसगढ़ में कोयला खनन की बड़ी परियोजना को बंद कराने में कामयाब रहे। उनके काम की वजह से कई लोग उनके दुश्मन भी बने। कोयला खनन परियोजना रद होने के बाद कुछ लोगों ने हमला कर उनकी हड्डियां तोड़ डाली। गोलियां भी चलाई लेकिन वे बच गए। बावजूद इसके अग्रवाल अपने मिशन पर लगे रहे। आज उन्हें अपने प्रयासों के दम पर ऐसा सम्मान मिला जिस पर पीढ़ियां गर्व करेंगी।












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