मॉस्को से इंजीनियरिंग... 6 क्राइम केस, जानिए 'महामंडलेश्वर' बने यति नरसिंहानंद की पूरी कुंडली
विवादों में रहने वाले यति नरसिंहानंद सरस्वती अब हिंदू संतों के सबसे बड़े संप्रदाय 'जूना अखाड़े' के महामंडलेश्वर नियुक्त किए गए हैं।
नई दिल्ली, 23 अक्टूबर: अक्सर अपने बयानों को लेकर विवादों में रहने वाले गाजियाबाद के डासना स्थित देवी मंदिर के महंत यति नरसिंहानंद सरस्वती अब हिंदू संतों के सबसे बड़े संप्रदाय 'जूना अखाड़े' के महामंडलेश्वर बना दिए गए हैं। दरअसल, हाल ही में अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के महासचिव और जूना अखाड़े के अंतरराष्ट्रीय संरक्षक महंत हरि गिरी ने यति नरसिंहानंद सरस्वती को अपना शिष्य स्वीकार किया था, जिसके बाद उन्हें महामंडलेश्वर नियुक्त किया गया। यति नरसिंहानंद पिछले दिनों उस वक्त विवादों में आए थे, जब उन्होंने महिलाओं को लेकर अमर्यादित टिप्पणी की। यति नरसिंहानंद के खिलाफ अलग-अलग मामलों में कई केस भी दर्ज हैं।

कौन हैं यति नरसिंहानंद सरस्वती?
टीओआई की खबर के मुताबिक, यति नरसिंहानंद सरस्वती का असली नाम दीपक त्यागी है और वो यूपी के मेरठ जिले के रहने वाले हैं। हापुड़ के चौधरी ताराचंद इंटर कॉलेज से अपनी पढ़ाई करने वाले नरसिंहानंद दावा करते हैं कि 1989 में केमिकल टेक्नोलॉजी की डिग्री हासिल करने के लिए वो मॉस्को गए थे। नरसिंहानंद बताते हैं कि 1994 में उन्होंने डिग्री हासिल की और 1997 में भारत लौटने से पहले तक वो मॉस्को में ही इंजीनियर के तौर पर नौकरी करते रहे। 1997 में अपनी मां के बीमार पड़ने की वजह से वो भारत लौट आए, लेकिन नरसिंहानंद का कहना है कि उनका छोटा भाई अभी भी मॉस्को में ही है।

'कांग्रेस में रह चुके हैं दादाजी'
यति नरसिंहानंद सरस्वती ने इस बारे में बताया, '1997 में हम दोनों भाई मॉस्को में थे, जब हमें अपनी मां के बीमार होने का पता चला। हम दोनों ही भारत लौटना चाहते थे लेकिन फिर तय हुआ कि मैं वापस आकर माता-पिता का ध्यान रखूंगा और मेरा छोटा भाई फाइनेंशियली परिवार की मदद करेगा। मेरे पिता केंद्रीय कर्मचारी रह चुके हैं, जबकि दादाजी कांग्रेस में सक्रिय रहे।'

क्या समाजवादी पार्टी के भी मेंबर रहे हैं नरसिंहानंद?
वहीं, उनके एक यादव दोस्त ने दावा किया कि भारत लौटने के बाद यति नरसिंहानंद सरस्वती कुछ समय के लिए समाजवादी पार्टी से भी जुड़े। हालांकि समाजवादी पार्टी के स्थानीय नेताओं का कहना है कि उन्हें इस बात की कोई जानकारी नहीं है कि नरसिंहानंद कभी सपा के सदस्य भी रहे हैं। नरसिंहानंद सरस्वती अपने बयानों में ज्यादातर मुस्लिमों को ही निशाना बनाते हैं, लेकिन मॉस्को में उनके साथ हॉस्टल में रहने का दावा करने वाले अरुण त्यागी बताते हैं कि वहां पाकिस्तान और बांग्लादेश सहित कई देशों के अलग-अलग धर्म के छात्र थे और सभी के बीच एक अच्छी दोस्ती थी।

पहले दीपेंद्र नारायण सिंह और अब यति नरसिंहानंद सरस्वती
नरसिंहानंद के दोस्त अनिल यादव ने बताया कि 1998 में यति की मुलाकात भाजपा नेता बीएल शर्मा से हुई और इसके बाद उनका जीवन पूरी तरह बदल गया। संन्यास लेने के बाद उन्होंने अपना नाम पहले दीपक त्यागी से बदलकर दीपेंद्र नारायण सिंह रखा और इसके बाद वो यति नरसिंहानंद सरस्वती हो गए। यति नरसिंहानंद सरस्वती 2007 यानी पिछले करीब 14 सालों से डासना के देवी मंदिर के महंत हैं।

क्या है यति नरसिंहानंद का क्राइम रिकॉर्ड
यति नरसिंहानंद सरस्वती अपने विवादित बयानों के अलावा कुछ आपराधिक मामलों को लेकर भी चर्चाओं में रहे हैं। पिछले दिनों जब बुलंदशहर के स्याना में हुई हिंसा मामले में न्याय की मांग को लेकर नरसिंहानंद अनशन पर बैठे तो उनसे जुड़े आपराधिक मामलों की जानकारी सामने आई। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, यति नरसिंहानंद सरस्वती के खिलाफ गाजियाबाद में तीन मामले दर्ज हैं। इनमें एक मामला हज हाऊस निर्माण के दौरान कोर्ट की कार्यवाही में बाधा डालने, दूसरा मामला सोनू राणा नामक शख्स को आत्महत्या के लिए उकसाने और तीसरा मामला हंगामा करने व जानलेवा हमले से जुड़ा हुआ है।

वीडियो को लेकर दर्ज हुईं तीन FIR
इसके अलावा हाल ही में यूपी पुलिस ने महिलाओं के खिलाफ अभद्र टिप्पणी करने के मामले में यति नरसिंहानंद सरस्वती के ऊपर तीन एफआईआर दर्ज की थी। दरअसल यति नरसिंहानंद सरस्वती का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसमें उन्होंने महिलाओं को लेकर आपत्तिजनक बातें की। इस वीडियो पर संज्ञान लेते हुए राष्ट्रीय महिला आयोग ने यूपी पुलिस से उनके खिलाफ कार्रवाई करने के लिए कहा, जिसपर पुलिस ने यति नरसिंहानंद के ऊपर आईपीसी की धारा 505-1 (सी), धारा 509, धारा 504 और 506 के तहत और आईटी एक्ट की धारा 67 के तहत केस दर्ज किए।
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