दुखद : पिता की जान बचाने के लिए 17 साल के बेटे ने SC से लगाई थी गुहार, फैसला आने से पहले ही हो गई मौत
नई दिल्ली, 15 सितंबर : उत्तर प्रदेश में रहने वाला एक किशोर जटिल न्यायिक प्रकिया के चलते अपने पिता की जान नहीं बचा सका। बेटे को अपने पिता की जान बचाने के लिए अपना लिवर डोनेट करना था, लेकिन इसमें कानूनी अड़चन सामने आ रही थी। इसे देखते हुए उसने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर अविलंब हस्तक्षेप करने की मांग की, लेकिन जब तक कोर्ट अपना फैसला सुनाता, तब तक उसके पिता इस दुनिया को अलविदा कह चुके थे। बेटा अपने पिता को हमेशा के लिए खो चुका था। ये बात जब सुप्रीम कोर्ट में बताई गई तो कोर्ट का माहौल भी गमगीन हो गया।
Recommended Video


नोएडा के एक अस्पताल में आखिरी सांसें गिन रहे थे पिता
दरअसल, 17 वर्षीय किशोर के पिता को लिवर संबंधी गंभीर समस्या थी। वह नोएडा के एक निजी अस्पताल में भर्ती थे। उनका लिवर ट्रांसप्लांट किया जाना था। बेटा अपने पिता को लिवर डोनेट करने के लिए भी तैयार था, लेकिन इसमें कानूनी पेंच सामने आ गए। किशोर ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर बिना किसी देरी के हस्तक्षेप करने की मांग की थी। कोर्ट ने याचिक पर तत्काल संज्ञान भी लिया।

सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सरकार से मांगा था जवाब
याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। शुक्रवार को सीजेआई जस्टिस यूयू ललित ने यूपी के स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार अधिकारी को कोर्ट में मौजूद रहने का निर्देश दिया था। कोर्ट यह जानना चाह रहा था कि क्या ऐसी परिस्थितियों में अंगदान से जुड़े कानून को लचीला बनाया जा सकता है। कानूनन सिर्फ वयस्क ही अंगदान कर सकते हैं।

फैसला आने से पहले ही पिता की मौत
मामले की सुनवाई सोमवार को होनी थी, लेकिन इससे पहले ही यूपी की अतिरिक्त महाधिवक्ता गरिमा प्रसाद ने बुधवार को जस्टिस संजय कौल और जस्टिस एएस ओका की पीठ को बताया कि नाबालिग के पिता की शनिवार को ही मौत हो गई। इसकी सूचना मिलने पर कोर्ट रूम का माहौल गमगीन हो गया।












Click it and Unblock the Notifications