आपातकाल के काले अध्यायों को स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल किया जाएगा : प्रकाश जावड़ेकर

नई दिल्ली। आपातकाल को 'काला अध्याय' और देश में लोकतंत्र पर हमला बताते हुए केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने सोमवार को कहा कि उनका मंत्रालय इसपर कुछ सामग्री पाठ्य पुस्तकों में शामिल कराने पर काम करेगा। उन्होंने कहा कि, हमारी पाठ्यपुस्तकों में इमरजेंसी के काले अध्याय का जिक्र जरूर है लेकिन लोकतंत्र पर आपातकाल के असर को ध्यान में रखते हुए इसे पाठ्यक्रम में शामिल किया जाएगा ताकि आने वाली पीढ़ी इसे जान सके।

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जावड़ेकर ने कहा, 'हमारी पढ़ाई की किताबों में आपातकाल से जुड़े अध्याय और संदर्भ हैं लेकिन हम अपने पाठ्यक्रम में इस बात को भी शामिल करेंगे कि किस तरह आपातकाल के काले युग ने लोकतंत्र को प्रभावित किया। इससे आने वाली पीढ़ियां इसके बारे में जान सकेंगी।' जावड़ेकर ने कहा कि आपातकाल अब महज शब्द लगता है, लेकिन यह वास्तव में 'बहादुरी की कहानी' और 'संघर्ष का उत्सव' है, जो पाबंदियों और अधिकारों में कटौती के दौर को खत्म करने के लिए लड़ा गया था।

वहीं केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली ने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की मानव इतिहास के क्रूरतम तानाशाहों में से एक हिटलर से तुलना की है। जेटली ने एक फेसबुक पोस्ट में इंदिरा की तुलना हिटलर से करते हुए लिखा है कि दोनों ने ही संविधान की धज्जियां उड़ाईं। उन्होंने आम लोगों के लिए बने संविधान को तानाशाही के संविधान में बदल दिया। उन्होंने आगे लिखा है कि हिटलर ने ज्यादातर विपक्षी नेताओं को गिरफ्तार करवा लिया था और अपनी अल्पमत की सरकार को उसने संसद में दो तिहाई बहुमत के रूप में साबित कर दिया।

बता दें कि इंदिरा गांधी ने 25 जून 1975 की आधी रात को देश में आपातकाल लागू कर दिया था। यह 21 मार्च 1977 तक जारी रहा। उस दौरान तमाम विपक्षी नेताओं को जेलों में डाल दिया गया। प्रेस की आजादी छीन ली गई और नागरिक अधिकारों का खुलकर दमन हुआ।

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