एल्गार परिषद केस: आनंद तेलतुम्बडे ने सरेंडर किया, NIA की रिमांड पर भेजे गए

नई दिल्ली- भीमा-कोरेगांव हिंसा के आरोपी ऐक्टिविस्ट और स्कॉलर आनंद तेलतुम्बडे को मंगलवार को एनआईए ने सरेंडर करने के बाद गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद अदालत ने उन्हें 18 अप्रैल तक एनआईए की रिमांड पर भेज दिया है। सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिलने के बाद उन्होंने मंगलवार को दक्षिण मुंबई के कंबाला हिल इलाके में स्थित एनआईए के दफ्तर में सरेंडर किया था, जिसके बाद एजेंसी ने उन्हें अपनी गिरफ्त में ले लिया था।

Elgar Parishad case: Anand Teltumbde surrendered, sent on NIA remand

तेलतुम्बडे पर माओवादियों से जुड़े होने और सरकार के खिलाफ साजिश रचने के आरोप हैं। उनके खिलाफ महाराष्ट्र के भीमा-कोरेगांव में भड़की हिंसा के बाद अनलॉफुल एक्टिविटीज (प्रिवेंशन) ऐक्ट या यूएपीए के तहत मुकदमा दर्ज किया था। ये हिंसा पुणे में 31 दिसंबर, 2017 को हुई एल्गार परिषद की बैठक के अगले दिन भड़की थी। इस केस में एक और सह-आरोपी और चर्चित ऐक्टिविस्ट गौतम नवलखा ने भी दिल्ली में एनआईए के सामने सरेंडर कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने इन दोनो की अग्रिम जमानत की याचिकाएं खारिज कर दी थीं।

Elgar Parishad case: Anand Teltumbde surrendered, sent on NIA remand

बता दें कि एल्गार परिषद से जुड़े कई ऐक्टिविस्ट के घरों में हुई छापेमारी की कार्रवाई के बाद तेलतुम्बडे के खिलाफ प्रधानमंत्री की हत्या की साजिश रचने में शामिल होने का आरोप लगाया गया था। सरेंडर करने से पहले उन्होंने एक खुली चिट्ठी में दावा किया है कि, '2018 के अगस्त में जब से पुलिस ने गोवा इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट के हाउसिंग कॉम्पलेक्स स्थित मेरे घर में रेड डाला है, मेरी दुनिया पूरी तरह से इधर से उधर हो गई है। मेरे साथ जो कुछ हो रहा है वैसा मैंने कभी खराब से खराब सपने में भी कल्पना नहीं किया था।'

इस केस में 9 और ऐक्टिविस्ट और वकील दो साल से ज्यादा वक्त से जेल में हैं। पुलिस का आरोप है कि एल्गार परिषद में इन लोगों ने भड़काऊ भाषण दिए थे, जिसकी वजह से अगले दिन भीमा कोरेगांव में हिंसा भड़की थी। पुलिस का ये भी दावा है कि ये लोग प्रतिबंधित माओवादी संगठनों के सक्रिय सदस्य थे।

बता दें कि आनंद तेलतुम्बडे और उनके सह आरोपी गौतम नवलखा को बॉम्बे हाई कोर्ट से उनकी अग्रिम जमानत याचिकाओं पर सुनवाई होने तक गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक लगाई गई थी। लेकिन, जब हाई कोर्ट ने अग्रिम जमानत याचिका को ठुकरा दिया तो ये दोनों फौरन सुप्रीम कोर्ट पहुंच गए। लेकिन, पिछले 17 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने भी इनकी दलीलों को ठुकरा दिया और इन्हें तीन हफ्तों के भीतर सरेंडर करने का निर्देश दिया था।

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