Electoral Bonds: 26वीं किस्त की बिक्री आज से, SBI की ब्रांच से जारी होंगे
आज से चुनावी बॉन्ड की 26वीं किस्त की बिक्री शुरू हो रही है। अगले 10 दिनों तक यह बॉन्ड खरीदे जा सकेंगे। कर्नाटक चुनाव से ठीक पहले शुरू हो रही है यह प्रक्रिया। 25वीं किस्त जनवरी में जारी हुई थी।

आज से चुनावी बॉन्ड की 26वीं किस्त की बिक्री शुरू हो रही है। इसके लिए स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) को जिम्मेदारी दी गई है। एसबीआई की 26 ब्रांचों से सोमवार से चुनावी बॉन्ड जारी होने की शुरुआत के साथ यह प्रक्रिया 12 अप्रैल तक जारी रहेगी। भारत में चुनावी बॉन्ड प्रणाली 'राजनीतिक फंडिंग में स्वच्छता लाने के लिए' शुरू की गई थी। चुनावी बॉन्ड की 26वीं किस्त की बिक्री कर्नाटक विधानसभा चुनावों से ठीक पहले शुरू की जा रही है। राज्य में 10 मई को एक ही फेज में वोटिंग होनी है। यह चुनावी बॉन्ड सिर्फ 15 दिनों के लिए मान्य रहेंगे।

चुनावी बॉन्ड क्या हैं?
चुनावी बॉन्ड राजनीतिक दलों को कैश में दान प्राप्त करने का विकल्प है। यह व्यवस्था राजनीतिक व्यवस्था में स्वच्छता और पारदर्शिता लाने के लिए शुरू की गई है। प्रावधानों के तहत चुनावी बॉन्ड वह व्यक्ति खरीद सकता है, जो भारत का नागरिक हो या भारत में निगमित या स्थापित हो चुका हो। एक व्यक्ति अकेले निजी तौर पर चुनावी बॉन्ड खरीद सकता है या कई लोगों के साथ संयुक्त रूप से भी खरीद सकता है। लेकिन, पंजीकृत राजनीतिक दलों को चुनावी बॉन्ड प्राप्त करने के लिए यह शर्त है कि पिछले लोकसभा या विधानसभा आम चुनावों में उसने कम से कम 1 फीसदी वोट प्राप्त किए हों। सिर्फ ऐसी ही पार्टियां चुनावी बॉन्ड प्राप्त करने के योग्य मानी जाएंगी।

चुनावी बॉन्ड की वैद्यता सिर्फ 15 दिन होती है
चुनावी बॉन्ड की वैद्यता उसके जारी होने के सिर्फ 15 दिनों तक के लिए ही रहती है। वैद्यता की तारीख खत्म होने के बाद राजनीतिक दलों को उसके बदले में कोई भुगतान नहीं किया जाता है। योग्य राजनीतिक दल जिस दिन चुनावी बॉन्ड बैंकों में जमा करते हैं, उसके बदले वह रकम उसी दिन उनके आधिकारिक खाते में क्रेडिट हो जाती है। सरकार ने चुनावी बॉन्ड योजना की अधिसूचना 2 जनवरी, 2018 को जारी की थी। चुनावी बॉन्ड पहली बार 2018 में 1 से 10 मार्च के बीच बेची गई थी।

जनवरी में जारी हुई थी 25वीं किस्त
पिछले साल चुनावी बॉन्ड की 24वीं किस्त 5 दिसंबर से जारी हुई थी। संयोग से उसी दिन गुजरात विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण का मतदान होना था। चुनावी बॉन्ड की 25वीं किस्त इस साल 19 से 28 जनवरी के बीच बेची गई थी। इसके कुछ ही समय बाद उत्तरपूर्व के तीन राज्यों में विधानसभा चुनाव करवाए गए थे। चुनावी बॉन्ड आमतौर पर बिक्री के लिए साल में अप्रैल, जुलाई, अक्टूबर और जनवरी में 10 दिनों के लिए उपलब्ध होते हैं या फिर जो केंद्र सरकार की ओर से तय किया जाता है।
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11 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट में होनी है सुनवाई
इस बीच चुनावी बॉन्ड का मामला भी सुप्रीम कोर्ट के पास है। सर्वोच्च अदालत को यह तय करना है कि इसकी वैद्यता को चुनौती देने वाली याचिका को संवैधानिक पीठ के हवाले किया जाए या नहीं। इसपर 11 अप्रैल को सुनवाई होनी है। याचिकाकर्ता एक एनजीओ है, जिसे इस बात पर आपत्ति है कि अभी तक चुनावी बॉन्ड से राजनीतिक दलों को जो दावे के अनुसार 12,000 करोड़ रुपए मिले हैं, उसका दो-तिहाई हिस्सा सिर्फ एक बड़ी राजनीतिक दल को ही प्राप्त हुआ है।

आंकड़े क्या कहते हैं?
वित्त वर्ष 2021-22 में 7 राष्ट्रीय दलों की करीब 66% आमदनी चुनावी बॉन्ड और अज्ञात स्रोतों से हुई थी। राजनीतिक दलों ने कुल 2,172.231 करोड़ रुपए अज्ञात स्रोतों से मिलने की घोषणा की थी। इसमें अकेले बीजेपी ने 53.45% या 1161.0484 करोड़ रुपया अज्ञात स्रोतों प्राप्त होने की जानकारी दी थी। (इनपुट-एएनआई और अन्य एजेंसियां)












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