Electoral Bond: सुप्रीम कोर्ट ने कहा- चुनावी बॉण्ड स्कीम पारदर्शी नहीं, चयनात्मक गोपनीयता को देती है बढ़ावा

चुनावी बॉण्ड स्कीम को लेकर एक याचिका पर बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई की। प्रधान न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पांच-सदस्यीय संविधान पीठ ने कहा कि योजना को लेकर समस्या है। यह सभी राजनीतिक दलों को समान अवसर नहीं प्रदान करती और अस्पष्टता को बढ़ावा देती है। शीर्ष अदालत ने राजनीतिक दलों के वित्तपोषण की योजना की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर कहा कि इस योजना के पीछे का उद्देश्य पूरी तरह से प्रशंसनीय हो सकता है, लेकिन चुनावी प्रक्रिया में सफेद धन लाने के प्रयास में ये पारदर्शित को पूरी तरह नजरअंदाज करता है।

SC Over Electoral Bond

सर्वोच्च अदालत की पीठ ने केंद्र की ओर से बहस कर रहे सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से कहा स्कीम में पारदर्शिता की कमी है। कोर्ट ने अपनी टिप्पणी में कहा, "योजना के साथ समस्या यह है कि यह चयनात्मक गुमनामी का प्रावधान करती है। यह पूरी तरह से गुमनाम नहीं है, यह चयनात्मक गुमनामी है, यह चयनात्मक गोपनीयता प्रदान करती है... यह भारतीय स्टेट बैंक के लिए गोपनीय नहीं है। यह कानून प्रवर्तन एजेंसियों के लिए गोपनीय नहीं है।"

याचिका पर सुनवाई करने वाली पीठ में 4 न्यायमूर्ति शामिल हैं, जिसमें न्यायमूर्ति संजीव खन्ना, न्यायमूर्ति बी आर गवई, न्यायमूर्ति जे बी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा का नाम शामिल है।

क्या है चुनावी बॉन्ड स्कीम

चुनावी बॉण्ड एसबीआई की कुछ अधिकृत शाखाओं से जारी या खरीदे जा सकते हैं। इस योजना को सरकार ने 2 जनवरी, 2018 को अधिसूचित किया गया था। योजना के प्रावधानों के अनुसार, चुनावी बॉण्ड भारत के किसी भी नागरिक या देश में स्थापित इकाई द्वारा खरीदा जा सकता है।

केंद्र सरकार की तरफ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि इलेक्टोरल बॉन्ड से राजनीतिक चंदे में पारदर्शिता आई है। पहले नकद में चंदा दिया जाता था, लेकिन अब चंदे की गोपनीयता दानदाताओं के हित में रखी गई है। सॉलिसिटर जनरल ने आगे कहा कि चंदा देने वाले नहीं चाहते कि उनके दान देने के बारे में दूसरी पार्टी को पता चले। इससे उनके प्रति दूसरी पार्टी की नाराजगी नहीं बढ़ेगी।

मामले में चार याचिकाएं दायर की गई हैं। इनमें कांग्रेस नेता जया ठाकुर और सीपीएम की याचिकाएं भी शामिल हैं। जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर ऐसी बात है तो फिर सत्ताधारी दल विपक्षियों के चंदे की जानकारी क्यों लेता है? विपक्ष क्यों नहीं ले सकता चंदे की जानकारी? अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी केंद्र सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में पेश हुए, जबकि सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल, प्रशांत भूषण और विजय हंसारिया ने याचिकाकर्ताओं की तरफ से पैरवी की। मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस संजीव खन्ना, जस्टिस बीआर गवई, जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की बेंच कर रही है।

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