सच में 'हर-हर मोदी, घर-घर मोदी' हो गये मोदी भाई

हमें लगता है कि अब देश बदलेगा। आंध्रप्रदेश निवासी रविकृष्णन ने कहा कि वो पढ़ने का शौक रखता था लेकिन घर की गरीबी ने उससे पढ़ाई-लिखवाई छुड़वा दी और ऑटो की सीट दिलवा दी। वो मात्र कक्षा पांच तक पढ़ा हुआ है। लेकिन वो चाहता है कि उसकी बच्ची जरूर पढ़ाई करे लेकिन बढ़ती महंगाई ने उसके हाथ सिकोड़ कर रख दिये हैं। उसके जैसे लोगों की कांग्रेस ने कभी नहीं सुनी।
लेकिन पिछले दिनों मोदी की रैली को सुनने के बाद उसे लगा कि उसे भी जिंदगी जीने का हक है इसलिए उसने मोदी को वोट किया है। उसे पूरा भरोसा है कि मोदी जरूर कुछ ऐसा करेंगे जिसकी वजह उसके और उसके परिवार के सपने सच होंगे। उसने कहा कि मोदी की जीत बताती है कि वो सच में 'हर-हर मोदी, घर-घर मोदी' हैं।
खैर देखते हैं कि ऑटोचालक रविकृष्णन के सपने और भरोसे को शक्ल मिलती है कि नहीं और मोदी उसकी उम्मीदों पर खरे उतरते हैं कि नहीं? लेकिन इसमें कोई शक नहीं आज की जीत और जश्न का चेहरा केवल नरेन्द्र दामोदर मोदी के ही सिर पर बंधेगा।












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