‘EC का सबसे बड़ा दुश्मन खुद आयोग का मुखिया’, INDIA Bloc ने मुख्य चुनाव आयुक्त पर लगाए गंभीर आरोप

INDIA bloc slams EC Update: चुनाव आयोग (Election Commission of India) और मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्षी गठबंधन INDIA ब्लॉक ने मोर्चा खोल दिया है। वोट चोरी और बिहार में चल रही स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया को लेकर विपक्षी दलों ने संसद से लेकर सड़क तक चुनाव आयोग पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

सोमवार, 18 अगस्त को दिल्ली के संविधान क्लब में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, डीएमके, तृणमूल कांग्रेस (TMC) और वामदलों के नेताओं ने मिलकर चुनाव आयोग पर "पक्षपात और लापरवाही" के आरोप लगाए।

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INDIA bloc protest: विपक्ष का आरोप, EC सरकार की 'बी-टीम'

प्रेस कॉन्फ्रेंस में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव, टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी, कल्याण बनर्जी, डीएमके के तिरुचि शिवा और वाम दलों के सांसदों ने एक स्वर में कहा कि चुनाव आयोग निष्पक्ष संस्था नहीं रह गया है।

विपक्ष का दावा है कि आयोग ने विपक्ष की शिकायतों पर ध्यान देने के बजाय भाजपा को फायदा पहुंचाने वाली नीतियां अपनाई हैं।सीपीएम सांसद जॉन ब्रिटास ने आरोप लगाया, "लगता है कि सीईसी ने विपक्षी दलों के खिलाफ युद्ध छेड़ दिया है। चुनाव आयोग अब सरकार की बी-टीम बन चुका है।"

ज्ञानेश कुमार का पलटवार

इससे पहले 17 अगस्त को मुख्य चुनाव आयुक्त ग्यानेश कुमार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर विपक्ष के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया था। उन्होंने कहा था कि विपक्ष गलत सूचना और झूठ फैला रहा है। ज्ञानेश कुमार ने कहा, "जब राजनीति मतदाताओं को निशाना बनाकर चुनाव आयोग के कंधे पर बंदूक रखकर की जा रही है, तो आज आयोग साफ कर देना चाहता है कि वह निडर होकर हर वर्ग और हर धर्म के मतदाताओं के साथ खड़ा है।"

राहुल गांधी और तेजस्वी यादव का हमला

इस मामले पर राहुल गांधी और तेजस्वी यादव लगातार सरकार और आयोग पर हमलावर हैं। विपक्ष का कहना है कि इस प्रक्रिया के जरिए लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन हो रहा है।

राहुल गांधी ने 'वोटर अधिकार यात्रा' शुरू की है, जिसमें वे लोगों से अपील कर रहे हैं कि वोट चोरी के खिलाफ खड़े हों। वहीं तेजस्वी यादव ने भी कहा कि बिहार में यह केवल चुनावी जालसाजी नहीं बल्कि लोकतंत्र पर हमला है।

महुआ मोइत्रा का सीधा वार

टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने कहा कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पहले ही डुप्लीकेट EPIC कार्ड और फर्जी वोटर लिस्ट का मुद्दा उठा चुकी हैं, लेकिन आयोग ने कोई कार्रवाई नहीं की। मोइत्रा ने यहां तक कहा कि "भ्रष्ट पूर्व चुनाव आयुक्तों पर कार्रवाई हो और लोकसभा को तत्काल भंग किया जाए।"

वहीं डीएमके सांसद तिरुचि शिवा ने आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ दल संसद में SIR विवाद पर चर्चा नहीं होने दे रहा है। विपक्ष का कहना है कि बिहार में जल्दबाजी में मतदाता सूची संशोधन कराया जा रहा है और लाखों मतदाता अधिकारों से वंचित हो रहे हैं।

विपक्ष महाभियोग के मूड में

संसद और प्रेस दोनों जगह विपक्षी दलों ने साफ संकेत दिया है कि वे मुख्य चुनाव आयुक्त ग्यानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं। विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया कि ग्यानेश कुमार अब भाजपा के प्रवक्ता की तरह बयान दे रहे हैं और उन्होंने निष्पक्षता का अधिकार खो दिया है।

क्या है बिहार का SIR विवाद?

चुनाव आयोग ने बिहार में मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) की प्रक्रिया शुरू की है। इस दौरान अब तक करीब 65 लाख नाम वोटर लिस्ट से हटाए जा चुके हैं। विपक्ष का आरोप है कि यह कार्रवाई योजनाबद्ध तरीके से की गई है, ताकि विपक्षी समर्थकों को मतदान से वंचित किया जा सके।

समाजवादी पार्टी के नेता रामगोपाल यादव ने आरोप लगाया कि यूपी चुनाव 2022 के दौरान भी उनके समर्थकों के नाम हटाए गए थे और उन्होंने सबूत के तौर पर शपथ पत्र जमा किए थे, लेकिन चुनाव आयोग ने कोई कार्रवाई नहीं की।

बिहार चुनाव से पहले शुरू हुआ यह विवाद अब राष्ट्रीय राजनीति का बड़ा मुद्दा बन गया है। एक ओर चुनाव आयोग अपनी निष्पक्षता पर जोर दे रहा है, वहीं दूसरी ओर विपक्ष इसे लोकतंत्र पर सीधा हमला बता रहा है। आने वाले दिनों में CEC ग्यानेश कुमार पर महाभियोग की औपचारिक पहल की जाएगी या नहीं, इस पर सबकी निगाहें टिकी हैं।

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