J&K:उपराज्यपाल के चुनाव वाले बयान पर EC को सख्त आपत्ति, दी ये हिदायत
नई दिल्ली- चुनाव आयोग ने जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल की ओर से प्रदेश में चुनाव करवाने को लेकर दिए गए बयान पर सख्त आपत्ति जताई है और उसे एक तरह से उसके संवैधानिक अधिकारों में दखलंदाजी की तरह माना है। चुनाव आयोग ने कहा है कि चुनाव से संबंधित मामले में दूसरे अधिकारियों को बयानबाजी से बचना चाहिए। बता दें कि जम्मू-कश्मीर अब केंद्र शासित प्रदेश चुका है, लेकिन यहां भी दिल्ली और पुदुचेरी की तरह विधानसभा का प्रावधान रखा गया है। लेकिन, पुराने जम्मू-कश्मीर राज्य के दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजन के लगभग एक साल बात भी वहां चुनाव नहीं करवाया जा सका है।
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चुनाव आयोग ने जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल से कहा है कि चुनाव के समय को लेकर कोई भी फैसले की घोषणा आयोग ही कर सकता है और इस मामले में किसी की बयानबाजी उसके अधिकार क्षेत्र में दखलंदाजी मानी जाएगी। चुनाव आयोग ने कुछ मीडिया रिपोर्ट के आधार पर लेफ्टिनेंट गवर्नर जीसी मुर्मू के खिलाफ इतनी सख्त टिप्पणी की है, जिसमें उनके हवाले से कहा गया था कि संघ शासित प्रदेश में जारी परिसीमन प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही चुनाव करवाया जा सकता है। इसी बयान पर आपत्ति जताते हुए चुनाव आयोग ने कहा है, 'चुनाव आयोग के अलावा बाकी अधिकारियों के लिए यही उचित होगा कि वो इस तरह के बयान देने से बचें, जो कि एक तरह से चुनाव आयोग के संवैधानिक प्राधिकार में दखलंदाजी की तरह है।'
बता दें कि जम्मू-कश्मीर में जून, 2018 से कोई चुनी हुई सरकार नहीं है। तब भाजपा ने सत्ताधारी पीडीपी की महबूबा मुफ्ती सरकार से समर्थन वापस ले लिया था। बाद में चर्चा थी कि पिछले साल लोकसभा चुनाव के साथ ही यहां चुनाव करवाए जा सकते हैं, लेकिन तब चुनाव आयोग ने इसे सुरक्षा कारणों से खारिज कर दिया था। बाद में पिछले साल ही 5 अगस्त को जम्मू-कश्मीर को आर्टिकल-370 के तहत मिले विशेषाधिकार को खत्म कर दिया गया था और राज्य को जम्मू-कश्मीर और लद्दाख दो केंद्र शासित प्रदेश में विभाजित कर दिया था।












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