रामलीला पर चुनाव आयोग ने खींची लक्ष्मण रेखा, शामिल हुए नेता तो चलेगा 'रामबाण'

ramlila
नयी दिल्ली। इसबार दिल्ली समेत पांच राज्यों में दशहरे पर आयोजित होने वाली रामलीला की चमक फीकी हो गई है। दिल्ली की रामलीलाओं के मंच पर कोई नेता या सांसद दिखाई नहीं पड़ रहा है। चुनाव की तारिखों के ऐलान के बाद चुनाव आयोग ने आदर्श आचार संहिता की लक्ष्मण रेखा खींच दी है।

जिसे पार करने से नेता और सांसद घबरा रहे है। चुनाव आयोग ने रामलीला, विवाह समारोह और त्यौहारों के मौसम को देखते निर्देश जारी करते हुए कहा है कि अगर कोई भी विधायक या नेता इन धार्मिक जगहों पर जाकर अपना चुनाव प्रचार करता है तो उनपर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। जुर्माने के साथ- साथ 5 साल की जेल हो सकती है।ऐसे में टिकट पाने से पहले ही खोने के डर के कारण नेता और विधायक इन पंडालों से दूरी बनाए हुए है। नेता गुपचुप तौर पर मुखौटे लगाकर रावण सेना या वानर सेना में भी शामिल नहीं हो सकते, क्योंकि चुनाव आयोग कैमरे लगातार लीला मंचों पर पैनी निगाह रखे हुए है।

पहले हर साल नेताओं में होड़ मची रहती थी कि कौन नेता कितनी रामलीलाओं के मंच पर पहुंचता है। अपने कार्यकर्ताओं के साथ लीला स्थल पर पहुंचकर अपनी लोकप्रियता का ग्राफ ऊंचा दिखाने का भी मौका होता था, लेकिन इस बार नेता रामलीला के निमंत्रण पत्र तक से डर रहे हैं।चुनाव आयोग की निगरानी टीम के अधिकारी मोहनलाल का कहना है कि वे रोजाना रामलीलाओं के मंच की वीडियो रिकॉर्डिंग के साथ अपनी रिपोर्ट आयोग को भेजते हैं।

जिसके बाद आयोग तय करता है कि आचार संहित का उल्लंघन कहां और किस तरह हुआ है। इसी के आधार पर कार्रवाई की जाएगी। रामलीला के पंडालों से नेताओं की दूरी से आम जनता खुश है। क्योंकि वो बेरोकटोक आसानी से इसका आनंद उठा रहे है। जबकि रामलीला के आयोजक और कमेटियां इससे थोड़ा हताश है।

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