505 करोड़ के 'फर्जी' लेनदेन का पर्दाफाश: BC जिंदल ग्रुप पर ED का शिकंजा! विदेशी साजिश उजागर
ED Raid BC Jindal Group: प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने दिल्ली के मशहूर बी सी जिंदल समूह पर विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA) के उल्लंघन के गंभीर आरोपों के तहत बड़ी कार्रवाई की है। 18-19 सितंबर 2025 को दिल्ली-एनसीआर और हैदराबाद में समूह के 13 ठिकानों पर छापेमारी के बाद ईडी ने खुलासा किया कि जिंदल समूह और इसके प्रवर्तकों ने 505.14 करोड़ रुपये के 'फर्जी लेनदेन' के जरिए भारत से धन को विदेशी कंपनियों में स्थानांतरित किया।
यह काला खेल बिजली क्षेत्र की इस दिग्गज कंपनी के प्रवर्तक श्याम सुंदर जिंदल, उनकी पत्नी शुभद्रा जिंदल और बेटे भावेश जिंदल के इर्द-गिर्द घूमता है। श्याम सुंदर जिंदल के हांगकांग भागने की खबर ने इस मामले को और सनसनीखेज बना दिया है। आइए, इस डिजिटल क्राइम स्टोरी में गहराई से उतरते हैं और जिंदल समूह की इस कथित साजिश की परतें खोलते हैं।

505 करोड़ की फर्जी साजिश: विदेशी निवेश या धन की हेराफेरी?
ईडी की जांच में सामने आया कि बी सी जिंदल समूह की कंपनियां-जिंदल इंडिया थर्मल पावर लिमिटेड (JITPL), जिंदल इंडिया पावरटेक लिमिटेड (JIPL) और जिंदल पॉली फिल्म्स लिमिटेड-विदेशी निवेश (ODI) की आड़ में 505.14 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि को दुबई की एक कंपनी, टोपाज़ एंटरप्राइज DMCC, के जरिए गार्नेट एंटरप्राइज DMCC में स्थानांतरित करने में शामिल थीं। ईडी का दावा है कि यह लेनदेन पूरी तरह 'फर्जी' था और इसका आधार विदेशी कंपनी के शेयरों का फर्जी मूल्यांकन था।
छापेमारी के दौरान बरामद दस्तावेजों ने इस साजिश को और पुख्ता किया। ईडी ने पाया कि श्याम सुंदर जिंदल टोपाज़ एंटरप्राइज DMCC के 100% शेयरधारक हैं और इस कंपनी सहित अन्य विदेशी संस्थाओं के वित्तीय नियंत्रण में उनकी अहम भूमिका थी। जांच में यह भी खुलासा हुआ कि दो मूल्यांकनकर्ताओं, जो आपस में संबंधित थे, ने शेयरों का मूल्यांकन बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया ताकि ज्यादा धन भारत से बाहर भेजा जा सके। यह राउंड-ट्रिपिंग का एक सुनियोजित खेल था, जिसके जरिए धन को विदेशी खातों में जमा किया गया और फिर उसे वापस लाने की कोशिश की गई।
छापेमारी का दायरा: 13 ठिकानों पर ईडी की नजर
18-19 सितंबर को ईडी ने दिल्ली-एनसीआर और हैदराबाद में बी सी जिंदल समूह के 13 ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया। इनमें समूह के निदेशकों, अधिकारियों और प्रवर्तक श्याम सुंदर जिंदल से जुड़े परिसर शामिल थे। हैदराबाद में जिंदल इंडिया पावर लिमिटेड के पूर्णकालिक निदेशक और सीईओ विजय भास्कर रेड्डी दुग्गेमपुडी के मियापुर स्थित आवास पर भी छापा मारा गया। छापेमारी में विदेशी निवेश, धन के प्रवाह और जटिल लेनदेन से जुड़े कई दस्तावेज और डिजिटल रिकॉर्ड जब्त किए गए। ईडी का अनुमान है कि इन लेनदेन की कुल राशि करीब 1,000 करोड़ रुपये तक हो सकती है।[
श्याम सुंदर जिंदल की फरारी: हांगकांग में छिपा मास्टरमाइंड?
जांच का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि श्याम सुंदर जिंदल छापेमारी के दौरान भारत में मौजूद नहीं थे। ईडी के अनुसार, उन्होंने 'आधिकारिक काम' का हवाला देकर हांगकांग की उड़ान भरी थी और अभी तक भारत नहीं लौटे हैं। एजेंसी ने कहा, 'वे अभी तक जांच में शामिल नहीं हुए हैं।' यह संदेह पैदा करता है कि क्या जिंदल इस कार्रवाई से बचने की कोशिश कर रहे हैं।
बी सी जिंदल समूह: 18,000 करोड़ का कारोबारी साम्राज्य
बी सी जिंदल समूह बिजली क्षेत्र का एक बड़ा खिलाड़ी है, जिसका वार्षिक टर्नओवर 18,000 करोड़ रुपये से अधिक है। यह समूह बिजली उत्पादन, पॉली फिल्म्स और अन्य क्षेत्रों में सक्रिय है। समूह की प्रमुख कंपनियों में जिंदल इंडिया थर्मल पावर लिमिटेड, जिंदल इंडिया पावरटेक लिमिटेड और जिंदल पॉली फिल्म्स लिमिटेड शामिल हैं। लेकिन इस भारी-भरकम टर्नओवर के पीछे छिपा फर्जी लेनदेन का खेल अब ईडी की रडार पर है।
क्या है राउंड-ट्रिपिंग और FEMA उल्लंघन?
राउंड-ट्रिपिंग एक ऐसी अवैध प्रक्रिया है, जिसमें धन को विदेशी खातों में भेजा जाता है और फिर उसे जटिल लेनदेन के जरिए वापस भारत लाया जाता है, ताकि काले धन को वैध दिखाया जा सके। ईडी का आरोप है कि जिंदल समूह ने विदेशी निवेश (ODI) की आड़ में इस तरह की गतिविधियां कीं। FEMA के तहत, भारत से बाहर धन भेजने और विदेशी निवेश के लिए सख्त नियम हैं, जिनका उल्लंघन करने पर भारी जुर्माना और कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
पिछले विवाद: जिंदल पॉली फिल्म्स का संकट
बी सी जिंदल समूह पहले भी विवादों में रहा है। मई 2025 में जिंदल पॉली फिल्म्स लिमिटेड के नासिक प्लांट में भीषण आग लगने के बाद औद्योगिक सुरक्षा विभाग ने इसे बंद करने का नोटिस जारी किया था। नोटिस में अपर्याप्त अग्निशमन व्यवस्था और रासायनिक रिसाव के जोखिम का हवाला दिया गया था। इस घटना ने समूह की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए थे।
ईडी की कार्रवाई का असर: शेयर बाजार में हलचल
छापेमारी की खबर के बाद जिंदल पॉली फिल्म्स के शेयरों में भारी उतार-चढ़ाव देखा गया। निवेशक और बाजार विश्लेषक इस मामले पर नजर रखे हुए हैं, क्योंकि ऐसी नियामक कार्रवाइयां कंपनी की साख और बाजार स्थिति पर गहरा असर डाल सकती हैं।
क्या कहता है समूह?
ईडी ने बी सी जिंदल समूह और इसके प्रवर्तकों से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। समूह की चुप्पी और श्याम सुंदर जिंदल की फरारी ने इस मामले को और रहस्यमय बना दिया है।
ईडी की नजर में जिंदल का काला कारनामा
बी सी जिंदल समूह पर ईडी की यह कार्रवाई एक बार फिर बड़े कॉरपोरेट घरानों के विदेशी लेनदेन पर सवाल उठाती है। 505 करोड़ रुपये के फर्जी लेनदेन, राउंड-ट्रिपिंग और श्याम सुंदर जिंदल की हांगकांग फरारी ने इस मामले को हाई-प्रोफाइल बना दिया है। क्या यह जिंदल समूह के साम्राज्य पर सबसे बड़ा खतरा साबित होगा? या यह सिर्फ एक और कॉरपोरेट घोटाले की शुरुआत है? ईडी की जांच के अगले कदम इस सवाल का जवाब देंगे।
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