वाराणसी के नेताओं की दबंगई चुनाव आयोग पर पड़ी भारी

9वें चरण के दौरान वाराणसी का नजारा:
लोक सभा चुनाव 2014 के आखिरी दिन कांग्रेस के अजय रॉय अपने लाव-जश्कर के साथ वोट डालने आते हैं तो पता चलता है कि उनके कुर्ते की बीच के बटन पर पंजे का निशान लगा हुआ था। वाराणसी के जिला प्रशासन प्रांजल यादव ने कसमें तो बड़ी-बड़ी खाई थीं लेकिन उनकी निगाह में यह पंजा नहीं आ सका। जैसे-तैसे लोग वोट डाल रहे थे तो मतदान केंद्र में अंदर जाने पर पता चला कि अंदर एक लैपटाप रखा हुआ है। चौंकिए मत, ये कोई ऐसा-वैसा लैपटाप नहीं बल्कि समाजवादी पार्टी का लैपटाप था इसलिए कोई छूने की हिम्मत भी नहीं कर पाया। लैपटाप के ऊपर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश सिंह यादव और सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव के साथ उनका चुनाव चिह्न साइकिल भी छपा हुआ था।
चुनाव आयोग ने चुनाव से पहले जो वायदे किए थे उसमें सबसे प्रमुख था वाराणसी का चुनाव। चुनाव आया भी तो कई सारी बेबाकी लेकर। वाराणसी का आम आदमी भी यह जान गया कि मतदान किए जाने के दौरान खूब-सारी घपलेबाजी की जा रही है। सूत्रों की मानें तो वीडियोग्राफी भी कई मतदानों पर सही तरीके से नहीं हो रही है। ऐसे में सवाल उठता है कि कौन है जो चुनाव आयोग की इस विफलता को सुधारने की कोशिश करेगा?












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