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च्यवनप्राश खाइए, कोरोना को दूर भगाइए- शोध में दावा

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नई दिल्ली: भारत में च्यवनप्राश हमेशा से इम्यूनिटी बूस्टर के तौर पर इस्तेमाल होता आया है। अब दिल्ली सरकार के एक आयुर्वेदिक अस्पताल ने अपनी रिसर्च के आधार पर दावा किया है कि इसने कोविड-19 के खिलाफ च्यवनप्राश का इस्तेमाल कर बहुत ही अच्छे नतीजे हासिल किए हैं। यह परिणाम दिल्ली के चौधरी ब्रह्म प्रकाश आयुर्वेद चरक संस्थान में हेल्थ केयर वर्करों पर चार महीने तक की गई स्टडी के बाद सामने आए हैं। इसके मुताबिक च्यवनप्राश के लगातार सेवन से कोविड-19 के गंभीर संक्रमण के खतरे से काफी हद तक सुरक्षा मिल सकती है। गौरतलब है कि देश में खासकर बुजुर्गों को ठंड के दिनों में च्यवनप्राश खिलाने की परंपरा रही है, जिससे उनको कई तरह के रोगों से सुरक्षा मिलती है। लेकिन, अगर यह कोविड-19 से थोड़ा भी सुरक्षा देने में सक्षम है तो यह बहुत ही अच्छी खबर साबित हो सकती है।

200 हेल्थकेयर वर्करों पर की गई स्टडी

200 हेल्थकेयर वर्करों पर की गई स्टडी

न्यूज पोर्टल आउटलुक इंडिया की एक खबर के मुताबिक भारतीय पद्धति के देश के सबसे बड़े अस्पताल चौधरी ब्रह्म प्रकाश आयुर्वेद चरक संस्थान की कोविड-19 संक्रमण को लेकर की गई रिसर्च के चौंकाने वाले नतीजे सामने आए हैं। ये स्टडी पिछले साल मई में 200 कोविड निगेटिव हेल्थकेयर प्रोफेशनलों पर शुरू की गई थी। इस रिसर्च ग्रुप को स्टडी और कंट्रोल के दो समूहों में बांटा गया था। इन समूहों को रोजाना 12-12 ग्राम च्यवनप्राश दो बार गुनगुने पानी के साथ दिया गया। पहली डोज सुबह खाली पेट नाश्ते से कम से कम एक घंटे पहले और दूसरा रात में डिनर के दो घंटे बाद दिया गया। कंट्रोल ग्रुप के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक हेल्थकेयर वर्करों के लिए परंपरागत गाइडलाइंस का भी पालन किया गया।

शोध के परिणाम बहुत ही सफल रहे

शोध के परिणाम बहुत ही सफल रहे

शोध की अवधि खत्म होने के बाद यानी 30वें दिन किसी भी ग्रुप में कोविड-19 का कोई भी मामला सामने नहीं आया। अस्पताल की डायरेक्टर प्रिंसिपल प्रोफेसर (डॉक्टर) विदुला गुज्जरवार के मुताबिक, 'हालांकि, बीच का अंतराल पूरा होने के बाद लंबे समय बाद के फॉलोअप में स्टडी ग्रुप में शामिल लोगों को कोविड-19 के गंभीर संक्रमण से ज्यादा सुरक्षित पाया गया, क्योंकि सिर्फ दो भागीदारों का ही आरटी-पीसीआर टेस्ट दो महीने की स्टडी पीरियड खत्म होने के बाद पॉजिटिव आया और वो दोनों भी एसिम्पटोमेटिक थे।' जबकि, 'दूसरी तरफ कंट्रोल ग्रुप में इसी अवधि के दौरान 4 भागीदारों का आरटी-पीसीआर टेस्ट पॉजिटिव आया और उनमें से एक को अस्पताल में दाखिल करवाना पड़ा।'

कई च्यवनप्राश कंपनिया भी क्लीनिकल स्टडी करवा रही हैं

कई च्यवनप्राश कंपनिया भी क्लीनिकल स्टडी करवा रही हैं

इस रिसर्च की शुरुआत इस अनुमान के साथ शुरू की गई थी कि च्यवनप्राश को हाई रिस्क वाले लोगों में सिंप्टोमेटिक इंफेक्शन को रोकने के लिए बचाव के सुरक्षित उपाय के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है। उन्होंने बतया कि 'इसकी मैनुस्क्रिप्ट को मेडआरक्सिव प्लेटफॉर्म पर अपलोड किया गया है।' किसी प्रतिष्ठित सरकारी संस्थान की ओर से कोविड-19 से बचाव के लिए च्यवनप्राश पर शायद इस तरह का यह अपनी तरह का पहला शोध है। बता दें कि देश में च्यवनप्राश बनाने वाली कई कंपनियां जैसे की डाबर, बैद्यनाथ और झंडू आदि ने भी कई अस्पतालों के साथ क्लीनिकल स्टडी के लिए करार किए हैं कि उनके प्रोडक्ट कोविड के खिलाफ कारगर इम्युनिटी बूस्टर साबित हो सकते हैं।

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English summary
Chyawanprash found effective in prevention of coronavirus, claims based on research at Ayurvedic Hospital in Delhi
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