त्रिपुरा में आया इतिहास का सबसे तेज भूकंप, असम और बांग्लादेश भी दहले
त्रिपुरा की राजधानी अगरतला से 59 किमी दूर अंबासा और कुमारघाट के बीच लोंगतोराई पहाड़ी भूकंप का केंद्र रहा। रिएक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता 5.7 मापी गई।
अगरतला। पूर्वोत्तर में आज दोपहर भूकंप के तेज झटकों ने दहशत का माहौल बना दिया। असम, त्रिपुरा और आसपास के इलाकों में मंगलवार दोपहर को भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए। रिएक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता 5.7 मापी गई। त्रिपुरा की राजधानी अगरतला से 59 किमी दूर अंबासा और कुमारघाट के बीच लोंगतोराई पहाड़ी भूकंप का केंद्र रहा। हालांकि भूकंप के झटके तेज होने के बावजूद ये बात राहत देने वाली रही कि इसमें जान-माल के किसी नुकसान की खबर नहीं है।

त्रिपुरा सरकार ने प्रतिनिधियों ने भूकंप से किसी तरह के जानमाल का नुकसान ना होने की बात कही है। भूकंप के झटके भारत के असम, त्रिपुरा के अलावा पड़ोसी देश बांग्लादेश, भूटान और उत्तरी म्यांमार में भी महसूस किए गए। सूत्रों के अनुसार, त्रिपुरा राज्य में ये इतिहास का सबसे तेज भूकंप आया है। ऐसा पहले कभी नहीं हुआ कि त्रिपुरा में 5.0 की तीव्रता से ज्यादा का भूकंप आया हो। ये पहली बार है जब त्रिपुरा में भूकंप की तीव्रता रिएक्टर स्केल पर 5.7 मापी गई है।
कोलंबिया विश्वविद्यालय ने पिछले साल एक शोध के बाद बांग्लादेश और उसके पास के इलाकों में बड़े भूकंप की आशंका जताई थी। जिस इलाके में भूकंप के झटके महसूस किए गए, इसी इलाके को भी शोध में संवेदनशील बताया गया है। वैज्ञानिकों का कहना है कि हिंद महासागर में आने वाले वक्त में कुछ बदलाव देखने को मिलेंगे, जिससे एक बड़ा इलाका भूकंप की दृष्टि से खतरनाक जॉन में पहुंच गया है। 2004 में सुनामी से आई तबाही के पीछे भी हिंद महासागर में आए बदलावों को ही एक वजह माना जाता है। गुजरा साल 2016 दुनिया में भूकंप के लिहाज से अच्छा नहीं रहा। हाल ही में आई एक रिपोर्ट के मुताबिक जापान में वर्ष 2016 के दौरान करीब 6500 भूकंप आए और यह संख्या वर्ष 2015 की तुलना में तीन गुना ज्यादा है। जापान के मेटियोरॉजिकल एजेंसी की ओर से यह जानकारी दी गई है।












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