Uttarakhand News: दून पुस्तक महोत्सव में गढ़वाली-कुमाऊँनी साहित्य की धूम, 26 नई पुस्तकों का विमोचन
देहरादून में आयोजित डून बुक फेस्टिवल 2026 में, नेशनल बुक ट्रस्ट के सहयोग से गढ़वाली और कुमाऊँनी भाषाओं में 13-13, कुल 26 नई किताबें लॉन्च की गईं। यह आयोजन बहुभाषी शिक्षा, सांस्कृतिक संरक्षण और क्षेत्रीय साहित्य को बढ़ावा देता है। साथ ही, इसके साथ डून लिटरेचर फेस्टिवल साहित्य, सिनेमा और नेतृत्व पर संवाद को प्रोत्साहित करता है।
राजधानी देहरादून में आयोजित ‘दून पुस्तक महोत्सव 2026’ में क्षेत्रीय भाषाओं की समृद्ध विरासत को नया मंच मिला है। महोत्सव के दौरान गढ़वाली और कुमाऊँनी भाषाओं की 26 नई पुस्तकों का विमोचन किया गया, जिसने दून घाटी की सांस्कृतिक पहचान को नई आवाज दी है।

राष्ट्रीय पुस्तक न्यास, भारत (एनबीटी) की पहल के तहत गढ़वाली और कुमाऊँनी भाषा में 13-13 पुस्तकों का लोकार्पण किया गया। यह पहल उत्तराखंड की भाषाई विरासत के संरक्षण और संवर्धन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। ऐतिहासिक परेड ग्राउंड में आयोजित यह महोत्सव धीरे-धीरे देहरादून को एक जीवंत साहित्यिक केंद्र के रूप में स्थापित कर रहा है, जहां देशभर से आए प्रकाशकों के 300 से अधिक स्टॉल और विविध साहित्यिक गतिविधियां आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं।
महोत्सव के उद्घाटन अवसर पर जारी की गई इन 26 पुस्तकों में बाल साहित्य सहित कई महत्वपूर्ण कृतियों का गढ़वाली और कुमाऊँनी में अनुवाद किया गया है। यह परियोजना लेखकों, अनुवादकों और भाषा विशेषज्ञों के सहयोग से तैयार की गई है, जिसका उद्देश्य स्थानीय भाषाओं में गुणवत्तापूर्ण पठन सामग्री उपलब्ध कराना और नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ना है।
गढ़वाली भाषा में जारी पुस्तकों में ‘चौरी-चौरा जन क्रांति को नायो सबेरो’, ‘नन्ना हैरा चखुला’, ‘उम्मीदाई किरण’, ‘गैरा सगरा अजूबा’ और ‘आदमी अर छैल अर हौरी कहानी’ शामिल हैं। वहीं कुमाऊँनी भाषा में ‘माटी म्यार देशे की’, ‘अभिमानै हार’, ‘बधानै जानी कान’, ‘खाटू श्यामक अनसुनी कहानी’ और ‘गुलाब का दगड़ू’ जैसी कृतियां प्रमुख हैं।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप पहल
यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप बहुभाषी शिक्षा और मातृभाषा में सीखने को बढ़ावा देती है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी पुस्तकें घर और स्कूल की भाषाओं के बीच की दूरी को कम करती हैं और बच्चों में प्रारंभिक साक्षरता को मजबूत करती हैं। साथ ही, यह प्रयास भारत की बहुभाषी सांस्कृतिक विरासत के प्रति सम्मान को भी बढ़ावा देता है।
‘दून लिट फेस्ट’ बना विचारों का मंच
पुस्तकों के विमोचन के साथ ‘दून लिट फेस्ट’ भी आयोजित किया जा रहा है, जो 5 अप्रैल से शुरू होकर साहित्य, सिनेमा, नेतृत्व और समकालीन मुद्दों पर संवाद का मंच बना हुआ है। इस मंच पर नितिन सेठ, कुलप्रीत यादव, अखिलेंद्र मिश्र, आचार्य प्रशांत, शुभांशु शुक्ला और सतीश दुआ जैसे प्रतिष्ठित वक्ता अपने विचार साझा कर रहे हैं।
महोत्सव में रोजाना कहानी सत्र, कार्यशालाएं और बच्चों के लिए विभिन्न गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं, जिससे यह आयोजन हर आयु वर्ग के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। दून पुस्तक महोत्सव न केवल साहित्य प्रेमियों को जोड़ रहा है, बल्कि क्षेत्रीय भाषाओं और संस्कृति को नई पहचान भी दे रहा है।












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