J&K:चीन की चालबाजियों में फंसकर UNSC बंद कमरे में कर सकता है कश्मीर पर चर्चा
नई दिल्ली- चीन के दबाव में झुककर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में शुक्रवार को जम्मू-कश्मीर के मुद्दे पर चर्चा हो सकती है। संयुक्त राष्ट्र के एक राजनियक के मुताबिक चीन की मांग पर ये चर्चा सुरक्षा परिषद बंद कमरे के अंदर कर सकता है। गौरतलब है कि पाकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर के विशेषाधिकार खत्म करने को लेकर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को एक खत लिखा है। अब उसी खत के बहाने चीन भारत के खिलाफ प्रोपेगेंडा में जुट गया है।
Recommended Video

चीन की चालबाजियों के दबाव में सुरक्षा परिषद
संयुक्त राष्ट्र के एक राजनयिक ने नाम नहीं बताने की शर्त पर कहा है कि इस तरह का एक निवेदन कुछ ही समय पहले प्राप्त हुआ है और हो सकता है कि शुक्रवार को ही यह मुद्दा उठ जाय। उसने बताया कि, "चीन ने सुरक्षा परिषद के एजेंडा 'भारत पाकिस्तान सवाल' पर बंद कमरे में विचार-विमर्श के लिए कहा है। यह आवेदन पाकिस्तान की ओर से सुरक्षा परिषद के अध्यक्ष को लिखी गई चिट्ठी के आधार पर किया गया है।" जानकारी के मुताबिक अगस्त महीने के लिए परिषद का अध्यक्ष पोलैंड सभी बातों पर गौर करते हुए सुरक्षा परिषद के बाकी सदस्यों से चर्चा करने के बाद बैठक के लिए तारीख और समय निश्चित कर सकता है। राजयनयिक ने कहा कि बैठक के लिए अभी तक समय तय नहीं हुआ है और सबसे जल्दी करें तो यह शुक्रवार सुबह में यह हो सकता है।

यूएनएससी महासचिव से अलग लाइन ले रहे हैं प्रेसिडेंट
उधर जियो न्यूज ने सुरक्षा परिषद के अध्यक्ष जोन्ना व्रोनेक्का के हवाले से दावा किया है कि "बहुत संभावना है कि यूएनएससी जम्मू और कश्मीर की हालात पर 16 अगस्त को बंद कंरे में बातचीत करेगा।" जब उनसे सीधा समय बताने के लिए कहा गया तो उन्होंने कहा कि "शुक्रवार को ही ज्यादा संभावना है, क्योंकि सुरक्षा परिषद गुरुवार को काम नहीं करता।" गौरतलब है कि इससे पहले संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) के महासचिव एंटोनियो गुटेर्रेस भारत और पाकिस्तान दोनों से इस मामले में अधिकतम संयम बरतने की सलाह दे चुके हैं और कोई भी ऐसा कदम नहीं उठाने की गुजारिश कर चुके हैं, जिससे तनाव में इजाफा हो। खास बात ये है कि उन्होंने इसके लिए शिमला समझौते का जिक्र किया था, जो इस मामले में किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता को खारिज करता है।

पाकिस्तान लगातार प्रोपेगेंडा में जुटा है
बता दें कि भारत की ओर से अंतरराष्ट्रीय समुदाय को पूरी तरह से बता दिया गया है कि जम्मू-कश्मीर के विशेषाधिकार से संबंधित संविधान के आर्टिकल 370 के कुछ प्रावधानों को हटाना पूरी तरह से भारत का आंतरिक मामला है। भारत पाकिस्तान से भी कह चुका है कि वह 'सच्चाई को स्वीकार' कर ले। लेकिन, पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने गुरुवार को कहा कि उसने यूएनएससी की आपात बैठक बुलाने की मांग की है। पाकिस्तानी मीडिया ने कुरैशी को कोट करते हुए बताया है कि,"दुनिया को समझने की जरूरत है कि यह मानवता का मामला है, दो देशों के बीच जमीन के एक टुकड़े का नहीं।" कुरैशी ने ये भी दावा किया कि चार दशक बाद यूएनएससी में कश्मीर मामले पर चर्चा होना, ऐतिहासिक राजनयिक सफलता है। पिछले हफ्ते ही कुरैशी ने बीजिंग जाकर चीनी नेताओं से बात की थी और इस मसले को सुरक्षा परिषद में उठाने की गुजारिश की थी। लेकिन, सबसे बड़ा सवाल है कि जब चीन की अड़ंगेबाजियों के चलते सुरक्षा परिषद को मौलाना मसूद अजहर जैसे एक आतंकी को ग्लोबल टेररिस्ट घोषित करने में पसीने छूट जाते हैं, तो उसी चीन के दबाव में वह पाकिस्तान जैसे टेररिस्ट स्टेट के दबाव में कैसे झुक सकता है?












Click it and Unblock the Notifications