'तुम जैसी लड़कियां शर्म छोड़कर ऐसे कपड़े पहनती हैं'
मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में नेशनल लॉ इंस्टीट्यूट यूनिवर्सिटी (एनएलआईयू) के छात्र पिछले सात दिनों से डायरेक्टर को हटाने की मांग को लेकर धरने पर बैठे हैं.
छात्रों ने डायरेक्टर के ख़िलाफ कई तरह के आरोप लगाए हैं. वहीं डायरेक्टर का कहना है कि सभी आरोप झूठे हैं और पद छोड़ने की उनकी कोई मंशा नहीं है.
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'डायरेक्टर करते हैं अभद्र टिप्पणी'
छात्रों ने आरोप लगाया कि संस्थान में भारी अनियमिततायें है, परीक्षा और वित्तीय मामलों में पारदर्शिता की कमी है, अवकाश नहीं दिया जाता और छात्रों को कमेटी बनाकर उनके ख़िलाफ़ अनुशासनात्मक कारवाई की जाती है.
वहीं आरोप ये भी है कि संस्थान के डायरेक्टर जातिवाद और छात्राओं के खिलाफ अभद्र टिप्पणी भी करते हैं.
छात्रों का धरना ख़त्म कराने के लिए ज़िला प्रशासन के अधिकारी भी कई प्रयास कर चुके हैं, लेकिन छात्र तब तक अपना धरना ख़त्म नहीं करने की बात कर रहे हैं जब तक डायरेक्टर इस्तीफा न दे दें.
नाम न छापने की शर्त पर धरने पर बैठे एक छात्र ने बताया, "मामला एक नहीं है बल्कि कई हैं जिनकी वजह से हमने यह कदम उठाया गया है. छात्रों को डायरेक्टर तरह-तरह से परेशान करते हैं. छात्रों के लिए मौजूद लाइब्रेरी को जल्दी बंद करा दिया जाता है. डायरेक्टर लड़कियों को बुला कर अभद्र टिप्पणी करते हैं, वहीं उन्होंने एक छात्र की जाति को लेकर भी टिप्पणी की. इससे पता चलता है कि किस तरह का मामला राष्ट्रीय स्तर की एक संस्थान में चल रहा है."
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"डायरेक्टर ने मेरे कपड़े देखे..."
एक छात्रा ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि वो डायरेक्टर के दुर्व्यवहार का शिकार हुई.
उन्होंने आरोप लगाया, "जब मैं डायरेक्टर के कमरे में गई तो उन्होंने मेरे कपड़े देखे और कहा कि तुम जैसी लड़कियां अपनी शर्म-इज्जत बेचकर ऐसे कपड़े पहनकर आती हैं. तुम चली जाओ यहां से."
यहां पर मौजूद छात्र अब आरपार की लड़ाई के मूड में हैं.
छात्रों ने कैंपस के अंदर 'डायरेक्टर मिसिंग' के पोस्टर लगा दिए हैं.
वहीं छात्रों ने डायरेक्टर के बंगले के बाहर फूलों से लिख दिया है 'गेट वेल सून मामू'.
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डायरेक्टर ने ख़ारिज किए आरोप
छात्रों का एक प्रतिनिधिमंडल जबलपुर भी गया जहां उन्होंने अपनी बात मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के सामने रखी.
डायरेक्टर एस.एस. सिंह ने इस मामले में बीबीसी से कहा, "सारे आरोप बेबुनियाद हैं. इसमें किसी भी तरह से कोई सच्चाई नहीं है. जो बात बताई जा रही है वो सब झूठी है. मैं पिछले 9 साल से डायरेक्टर हूं आपको लगता है कि अपने कार्यकाल की समाप्ति के वक़्त मैं इस तरह की हरक़त करूंगा."
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