कोरोना के फ्री टेस्ट के आदेश में बदलाव की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट के सभी निजी लैब में कोरोना के मुफ्त टेस्ट कराए जान को लेकर दिए आदेश में बदलाव के लिए अर्जी दी गई है। सुप्रीम कोर्ट में ये याचिका डॉ. कौशल कांत मिश्रा की दायर की गई है। एम्स रेजिडेंट डॉक्टर एसोसिएशन के पूर्व सदस्य डॉ मिश्रा ने अपनी याचिका में सुप्रीम कोर्ट से अपने आदेश को संशोधित करने की मांग की है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने पिछले आदेश में सभी निजी लैब को कोरोना वायरस टेस्ट फ्री करने का आदेश दिया है। डॉ. कौशल कांत मिश्रा इसमें बदलाव चाहते हैं।

जानकारी के मुताबिक, डॉ. कौशल मिश्रा ने अपनी याचिका में कहा है कि देश में जांच की सुविधाएं काफी कम हैं। निजी लैब पर अगर फ्री टेस्ट करने का दबाव होगा तो इससे उनके काम पर गलत असर हो सकता है। जिसका असर कोरोना के खिलाफ लड़ाई पर पड़ सकता है।
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को ही कोरोना के टेस्ट फ्री करने को लेकर बड़ा फैसला दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया कि मान्यताप्राप्त सरकारी या प्राइवेट लैब में कोरोना वायरस की जांच मुफ्त में होगी। इसके लिए अदालत ने केंद्र सरकार से कहा कि वह मान्यताप्राप्त सभी लैबों को मुफ्त में कोरोना जांच करने का निर्देश दे। सुप्रीम कोर्ट ने साथ में यह भी कहा कि कोरोना वायरस की जांच सिर्फ एनएबीएल से मान्यता प्राप्त लैबों या विश्व स्वास्थ्य संगठन या इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च से मंजूरी प्राप्त किसी एजेंसी के जरिए होनी चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में कोरोना परीक्षण के लिए निजी लैब की फीस अधिकतम 4,500 रुपए तय करने के लिए इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) की सलाह को चुनौती दी गई थी। याचिका में मुफ्त में टेस्ट का सुझाव देते हुए, याचिकाकर्ता ने यह भी दावा किया कि प्राइवेट लैबों के टेस्टिंग फीस पर पर्दा डालना संविधान के आदर्शों और मूल्यों का उल्लंघन करता है। साथ ही सुप्रीम कोर्ट से यह निर्देश देने की मांग की गई कि ऐसे सभी परीक्षण मान्यता प्राप्त पैथोलॉजिकल लैबों किए जाएं। जिस पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने फ्री टेस्ट किए जाने का आदेश दिया।












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