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देहरादून में ‘दून पुस्तक महोत्सव’ का भव्य आगाज, 26 गढ़वाली-कुमाउनी पुस्तकों का लोकार्पण

नौ दिवसीय दून बुक फेस्टिवल देहरादून के ऐतिहासिक परेड ग्राउंड में शुरू हुआ, जिसका उद्घाटन मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने किया। कार्यक्रम में गरवाली और कुमाऊनी में पुस्तक विमोचन, लेखक चर्चा, इंटरैक्टिव बच्चों के कोने और नेशनल डिजिटल लाइब्रेरी के माध्यम से डिजिटल रीडिंग पर ध्यान केंद्रित किया गया।

राजधानी देहरादून के ऐतिहासिक परेड ग्राउंड में शनिवार से नौ दिवसीय ‘दून पुस्तक महोत्सव’ का भव्य शुभारंभ हो गया। इस महोत्सव का उद्घाटन मुख्यमंत्री Pushkar Singh Dhami ने किया। इस अवसर पर आचार्य बालकृष्ण, राष्ट्रीय पुस्तक न्यास के अध्यक्ष प्रो. मिलिंद सुधाकर मराठे, कैबिनेट मंत्री खजान दास, मेयर सौरभ थपलियाल, निदेशक युवराज मलिक और देवभूमि विश्वविद्यालय के उपाध्यक्ष अमन बंसल सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे।

Doon Book Festival Opens in Dehradun

कार्यक्रम की शुरुआत में प्रो. मिलिंद सुधाकर मराठे ने उत्तराखंड को भारतीय संस्कृति और वीरता का संगम बताते हुए कहा कि जैसे शरीर के लिए व्यायाम जरूरी है, वैसे ही मन के लिए पुस्तकों का अध्ययन आवश्यक है। उन्होंने वेदव्यास, महर्षि कण्व, सुंदरलाल बहुगुणा और बछेंद्री पाल जैसी विभूतियों का उल्लेख करते हुए राज्य की समृद्ध बौद्धिक परंपरा पर प्रकाश डाला।

मुख्यमंत्री Pushkar Singh Dhami ने अपने संबोधन में कहा कि यह महोत्सव साहित्य, संस्कृति और कला का अद्भुत संगम है। उन्होंने उत्तराखंड को ‘देवभूमि’ बताते हुए महाकवि कालिदास और अन्य साहित्यकारों के योगदान को याद किया। उन्होंने कहा कि पुस्तकें केवल शब्दों का संग्रह नहीं, बल्कि पीढ़ियों तक ज्ञान को संरक्षित रखने का माध्यम हैं। साथ ही उन्होंने लोगों से पढ़ने की आदत विकसित करने का आह्वान किया।

इस अवसर पर राष्ट्रीय पुस्तक न्यास द्वारा प्रकाशित 26 गढ़वाली और कुमाउनी भाषा की पुस्तकों का लोकार्पण किया गया। इनमें ‘चौरी-चौरा जनक्रांति को नयो सबेरो’, ‘उम्मीदै किरण’ और ‘माटि म्यर देशे कि’ जैसी पुस्तकें शामिल हैं।

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री और अन्य अतिथियों ने बाल मंडप का भी निरीक्षण किया। यहां बच्चों के लिए बनाए गए इंटरैक्टिव लर्निंग कॉर्नर और पेंटिंग गतिविधियों का अवलोकन किया गया। उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले बच्चों को ‘एग्जाम वॉरियर्स’ और ‘चंद्रयान’ जैसी पुस्तकें भेंट की गईं।

आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि यह महोत्सव केवल एक मेला नहीं, बल्कि ज्ञान और संस्कृति के आदान-प्रदान का मंच है। उन्होंने आधुनिक तकनीक और एआई के संदर्भ में कहा कि वास्तविक ज्ञान के लिए मूल लेखकों को पढ़ना आवश्यक है।

समारोह के अंत में राष्ट्रीय पुस्तक न्यास के निदेशक युवराज मलिक ने धन्यवाद ज्ञापन देते हुए कहा कि राज्य गठन के 26 वर्षों बाद पहली बार इस तरह का बड़ा साहित्यिक आयोजन हो रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि यह महोत्सव भविष्य में देश के प्रमुख पुस्तक मेलों में शामिल होगा।

महोत्सव का एक प्रमुख आकर्षण ‘दून लिट फेस्ट’ है, जिसमें नितिन सेठ, कुलप्रीत यादव, अखिलेंद्र मिश्रा, आचार्य प्रशांत, शुभांशु शुक्ला और लेफ्टिनेंट जनरल सतीश दुआ जैसे प्रतिष्ठित व्यक्तित्व विभिन्न विषयों पर चर्चा करेंगे। इसके अलावा, रोजाना कहानी सत्र, कार्यशालाएं, क्विज और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिनमें पांडवाज, नरेंद्र सिंह नेगी और वंशिका जोशी जैसे कलाकार प्रस्तुति देंगे।

यह महोत्सव ‘राष्ट्रीय ई-पुस्तकालय’ के माध्यम से डिजिटल पढ़ाई को भी बढ़ावा देगा, जहां 22 से अधिक भारतीय भाषाओं और अंग्रेजी में हजारों पुस्तकें निःशुल्क उपलब्ध हैं। दून पुस्तक महोत्सव 4 से 12 अप्रैल 2026 तक परेड ग्राउंड में आयोजित किया जा रहा है, जिसमें आम लोगों के लिए प्रवेश निःशुल्क रखा गया है।

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