मोदी की हुंकार रैली में भी ट्रंप की रैली की तरह हुआ था अचानक हमला! पटना को आज भी याद है 2013 का वो बम धमाका
Donald Trump Shoot Update News: अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर शनिवार (13 जुलाई) को पेंसिल्वेनिया के बटलर में चुनावी रैली के दौरान गोली से उनपर हमला किया गया। गोली उनके कान को छूकर निकली है।
अमेरिकी राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार डोनाल्ड ट्रंप पर हत्या का प्रयास 2013 की भयावह यादें ताजा कर देता है, जब 2014 के चुनाव में प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी की हुंकार रैली में बम धमाका हुआ था। 27 अक्टूबर 2013 को पटना के प्रसिद्ध गांधी मैदान में हुंकार रैली में स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया (सिमी) के आतंकवादियों ने बम धमाके किए थे, जिसमें 6 लोगों की मौत हो गई थी। आइए जानें क्या थी वो घटना।

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जब 2013 में मोदी की हुंकार रैली में हुआ था बम धमाका
27 अक्तूबर 2013 को रविवार का दिन था, जब पटना के गांधी मैदान में 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा की ओर से प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार और गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी 'हुंकार रैली' करने आने वाले थे। गांधी मैदान में हजारों लोगों की भीड़ इकट्ठा थी।
पीएम मोदी की हुंकार रैली में 27 अक्तूबर 2013 को 11.40 बजे से 12.45 बजे के बीच रैली में छह धमाके हुए थे। कुछ रिपोर्ट में कहा जाता है कि बम धमाकों के बीच पीएम मोदी मंच पर थे। कुछ रिपोर्ट में दावा किया जाता है कि मोदी के गांधी मैदान पहुंचने से पहले ही वहां कई बम धमाके हुए थे। इस घटना में छह लोगों की मौत हो गई थी। इन धमाकों में करीब 50 लोग घायल भी हुए थे। इनमें बीजेपी कार्यकर्ता और पार्टी समर्थक भी शामिल थे।
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मोदी की हत्या की रची गई थी साजिश!
हुंकार रैली बम धमाका चार्जशीट और मुकदमे में जो विवरण सामने आए थे, वे चौंकाने वाले थे। आतंकवादियों ने मूल रूप से एक आत्मघाती हमलावर का उपयोग करके मोदी की हत्या करने की योजना बनाई थी, लेकिन बाद में मोदी के करीब पहुंचने और उन्हें निशाना बनाने की कोशिश करने के लिए कार्यक्रम स्थल पर बम विस्फोट करने का फैसला किया था। इस घटना के बाद 2021 में नौ आतंकवादियों को दोषी ठहराया गया था, जिनमें से चार को मौत की सजा सुनाई गई थी।
एनआईए (NIA) की जांच से पता चला है कि आरोपियों ने मोदी की चुनावी रैलियों को निशाना बनाने की साजिश रची थी। उसके लिए उन्होंने देश में उन जगहों की रैकी की थी, जहां मोदी की रैलियां हुई थीं। एनआईए ने अपने आरोपपत्र में कहा कि सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए आरोपियों ने निष्कर्ष निकाला कि मोदी पर हथियारों से हमला करना लगभग असंभव था। इसलिए उन्होंने मोदी की चुनावी रैली (पटना में) में आईईडी विस्फोट करने का फैसला किया, जिसका उद्देश्य बड़ी संख्या में आम लोगों को मारना था, जिससे भगदड़ मच जाए और इसके बाद होने वाली भगदड़ में मोदी को आसानी से नजदीक से निशाना बनाया जा सके।"

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सुसाइड बमर (आत्मघाती हमलावर) की थी प्लानिंग
NIA ने कहा था कि शुरू में एक व्यक्ति को आत्मघाती हमलावर ( सुसाइड बमर) बनने के लिए प्रेरित किया गया था और विस्फोटकों से भरा एक आत्मघाती जैकेट भी तैयार किया गया था जिसका इस्तेमाल मोदी पर हमला करने के लिए किया जाना था। आरोपी द्वारा उक्त जैकेट को एक पेड़ पर बांधकर रिमोट कंट्रोल स्विच से विस्फोट करके एक परीक्षण विस्फोट भी किया गया था।
लेकिन 7 सितंबर 2013 को छत्तीसगढ़ में मोदी की एक रैली में आरोपियों द्वारा देखे गए मोदी को प्रदान किए गए सुरक्षा कवर को देखते हुए, आरोपियों ने सोचा कि उन्हें योजना के अनुसार निशाना बनाना संभव नहीं होगा। इस उद्देश्य के लिए प्रेरित व्यक्ति ने भी सुसाइड बमर बनने से इनकार कर दिया था।
इसके बाद आरोपियों ने 2 अक्टूबर, 2013 और 19 अक्टूबर, 2013 को दिल्ली और कानपुर में मोदी की चुनावी रैलियों में भाग लिया और उनकी टोह ली और बाद में बम तैयार करने के लिए बारूद, पाइप, जिलेटिन की छड़ें और डेटोनेटर जैसी सामग्री एकत्र की। इसके बाद आरोपियों ने मोदी की रैली से पहले पटना के गांधी मैदान के उत्तरी और दक्षिणी दोनों तरफ बम रखे गए थे। NIA ने अपनी चार्जशीट में लिखा है कि मोदी उस बम धमाके में सौभाग्य से बचे थे।












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