डॉक्टर को 1000 करोड़ देने के आरोपों को Dolo मेकर ने किया खारिज, बोले- मार्केटिंग पर सालाना सिर्फ 6 करोड़ खर्च
कोरोना महामारी के दौरान बुखार के लिए डोलो-650 लिखने के लिए दवा निर्माता कंपनी ने डॉक्टर को एक हजार करोड़ के उपहार बांटने का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। वहीं, कंपनी के सीनियर एग्जीक्यूटिव ने इसको लेकर बयान दिया है।
नई दिल्ली, 22 अगस्त : कोरोना महामारी के दौरान बुखार के लिए डोलो-650 लिखने के लिए दवा निर्माता कंपनी ने डॉक्टर को एक हजार करोड़ के उपहार बांटने का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। वहीं, कंपनी के सीनियर एग्जीक्यूटिव ने इसको लेकर बयान दिया है। साथ ही माइक्रो लैब्स के कार्यकारी वीपी जयराज गोविंदराजू ने ट्रेड यूनियन के आरोपों को खारिज कर दिया है।

प्रचारक उपहार दिए गए
उन्होंने कि डॉक्टरों को जो प्रचारक उपहार दिए गए हैं, वे बुखार-रोधी दवा, पेन, राइटिंग पैड, किताबें, मास्क और हैंड सैनिटाइज़र के नमूने हैं। साथ ही उन्होंने पिछले दो वर्षों में मेडिकल प्रोफेशनल्स पर एक हजार करोड़ रुपये खर्च किए जाने के आरोपों का खारिज कर दिया।

मार्केटिंग पर हर साल इतने करोड़ खर्च
कहा कि यह वार्षिक राजस्व का 2 या 3 प्रतिशत खर्च किया जाता है। मार्केटिंग पर हर साल 5-6 करोड़ रुपये खर्च किए जाते हैं। उन्होंने कहा कि महामारी के दौरान दवा से 350 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ, तो एक हजार करोड़ का उपहार कैसे बांट सकते हैं।

कोरोना महामारी के दौरान की कड़ी मेहनत
कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी ने दुखी स्वर में कहा कि यह अनावश्यक बातें हो रही हैं। हमने कोरोना महामारी के दौरान कड़ी मेहनत की, सिर्फ यह सुनिश्चित करने के लिए कि डोलो 650 हर जगह उपलब्ध हो। अब जब इस तरह की बातें होने लगी हैं तो हमें दुख हो रहा है।

डोलो के निर्माण पर किया फोकस
साथ ही उन्होंने कहा कि हमने अधिक लाभ होने वाले दवाई का निर्माण बंद कर दिया, क्योंकि महामारी के समय हमने सिर्फ डोलो पर ज्यादा फोकस किया। ताकि यह दवाई हर मेडिकल स्टोर में उपलब्ध हो।

जानें पूरा मामला
बता दें कि कोरोना महामारी के दौरान बुखार के लिए डॉक्टरों ने पैरासिटामोल दवा डोलो-650 को खूब मरीजों के लिए लिखा था। अब इस दवा को लेकर एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। डोलो-650 के निर्माताओं ने ब्रिकी बढ़ाने के लिए देशभर में डॉक्टरों को 1000 करोड़ के उपहार बांटे थे। इस बात की जानकारी मेडिकल बॉडी ने सुप्रीम कोर्ट की दी है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से दवा कंपनियों से जुड़ी एक जनहित याचिका पर जवाब मांगा है।
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