.. नहीं जानते होंगे आप मोदी की जिन्दगी के ये 7 रंग
नरेंद्र मोदी ने अपने नामांकन पत्र में पत्नी के खाने में जसोदाबेन का नाम लिखा तो हंगामा सा मच गया। इससे पहले उन्होंने चार बार विधानसभा चुनाव लड़ा, लेकिन शादी के खाने को खाली ही रखा। विरोधियों ने शादी की बात कई बार उछाली। मीडिया के भीतर भी सुगबुगाहट हुई। जसोदाबेन को ढूंढ़कर, उनका साक्षात्कार भी कर लिया गया। लेकिन मोदी खामोश ही रहे।
मोदी ने जसोदाबेन को अपनी पत्नी का दर्जा दिया तो उनकी शादी के किस्से फिर से कहे-सुने जाने लगे। एक अंग्रेजी पत्रिका ने ये किस्सा एक चश्मदीद के हवाले से छापा है, आप भी स्लाइडर घुमाइए और जानि मोदी के सतरंगी राज -

बैंड, बाजा और मोदी
1968 का एक दिन, उत्तरी गुजरात का वडनगर कस्बा। दामोदरदास मोदी और हीराबा के घर में चहलपहल थी। दामोदर और हीरा की 6 संतानें में से एक नरेंद्र मोदी (18 वर्ष) की शादी हो रही थी।

जश्न कुछ यूं था
शादी की रस्में कई दिनों से निभाई जा रही थीं, हालांकि पैसों की तंगी के कारण सभी आयोजन सादगी से हो रहे थे। कुर्ता, पायजामा और साफा पहने नरेंद्र मोदी अपने दोस्तों और परिजनों के साथ घर से निकले। वे एक जीप में बैठे, जिसे दूल्हे के लिए तय किया गया था। बारात ब्राह्मणवाड़ा जा रही थी, वाणनगर से 50 किमी दूर, जसोदाबेन के घर।

जसोदा से शादी के लिए तैयार ना थे
नरेंद्र मोदी की शादी 1968 में ब्राह्मणवाड़ा में चिमनलाल मोदी की बेटी जसोदाबेन से हुई। चिमनलाल मोदी एक स्कूल में अध्यापक थे। मोदी की शादी में शामिल 75 साल के पुंजा पटेल ने बताया, 'जब मोदी की बारात ब्राह्मणवाड़ा पहुंची, उन्हें घोड़े पर बैठाया गया। घोड़े पर बैठकर मोदी जंच रहे थे।'

एक साल पहले ही हो गई थी सगाई
पुंजा समेत मोदी की कई पुराने दोस्त हैं, जिनके जहन में मोदी की शादी आज भी ताजा है। पुंजा उस शादी को एक और कारण से याद करते हैं। पुंजा ने बताया कि उन्होंने शादी में मोदी को रखने के लिए एक सूती चादर दी थी, लेकिन वे चादर उन्होंने खो दी। मोदी शादी के लिए तैयार भी नहीं थे। जसोदा के साथ उनकी सगाई लगभग एक साल पहले हो गई थी, लेकिन दोस्तों से वे उनके बारे में कम ही बात करते।

ससुराल में मिला जलेबी का नाश्ता
मोदी की शादी बड़े ही साधारण ढंग से हुई। बाराती जब जसोदाबेन के घर पहुंचे उन्हें जलपान में चाय, गठिया और जलेबी परोसी गई।
मोदी के दोस्त नागजी देसाई ने बताया, 'मोदी की जसोदा से एक साल पहले सगाई हो चुकी थी, लेकिन वे दूसरे युवकों की तरह अपनी होने वाली पत्नी के बारे में कभी भी बात नहीं करते।'

एक बार हुई जसोदाबेन की विदाई, फिर कभी न लौटीं
नागजी ने बताया कि पूरे कार्यक्रम में मोदी गंभीर बने रहे। लेकिन उनसे डेढ़ साल छोटी जसोदा खुश थीं। उन्होंने लाल रंग की गुजराती साड़ी पहन रखी थी और गुजराती परंपरा के ही गहने पहन रखे थे। शादी के बाद दोपहर का खाना परोसा गया। देसाई को अब भी याद है कि खाने में क्या परोसा गया था। उन्होंने बताया कि खाने में मोहनथाल (मिठाई), पूड़ी, दाल, चावल और सब्जी परोसी गई थी। शादी के बाद ही जसोदा की मोदी के साथ विदाई हो गई। वड़नगर में मोदी की मां ने जसोदा का स्वागत उनके माथे पर कुमकुम लगाके किया।

अंगूठी रसम में मोदी रहे थे अव्वल
देसाई के मुताबिक, विदा होकर ससुराल आई जसोदा खुश दिख रही थीं। एक रिश्तेदार ने उनकी गांठ खोली। एक बर्तन में दूध और फूलों की पंखुड़ियों से भरकर उसमें एक अंगूठी डाल दी गई।उन्हें अंगूठी ढूंढ़ने को कहा गया। कहा गया जो अंगूठी ढूंढ़ लेगा, घर में उसीकी चलेगी। मोदी ने कामयाब रहे, लेकिन खेल में जसोदाबेन को बहुत मजा आया।हालांकि अगली ही सुबह घर में कोहराम मच गया, जब ये खबर फैली की नरेंद्र मोदी ने घर छोड़ दिया है। मोदी ट्रेन से अहमदाबाद रवाना हो गए थे। अहमदाबाद से वे 30 दिन बाद लौटे। ये खबर सुनकर नरेंद्र मोदी के दोस्त भी चौंक पड़े थे।












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