... ये चार बातें ना होतीं तो अपना गढ़ जीत लेते मुलायम !

इटावा। जिस मैनपुरी से समाजवादी पार्टी के प्रमुख मुलायम सिंह यादव सात बार संसद तक पहुंच चुके हैं वहां के युवाओं के लिए अब वह नायक नहीं रह गए हैं। मुलायम के गढ़ में 'मोदी लहर' भले ही ना चल रही हो, पर एक तबका अब सपा शासन से तंग आ चुका है।

शायद आप बेखबर हों, पर 1999 में राज्य की बीजेपी सरकार को अपने उस कानून की वजह से सत्ता से हाथ धोना पड़ा था, जिसने परीक्षा में नकल करने को एक गैर-जमानती अपराध बनाया था. साल 1993 में सत्ता में लौटे यादव ने उस कानून को हटा दिया था, जो 15 और 16 साल के विद्यार्थियों को जेल भजने का सबब बन गया था। अगले साल राज्य की बोर्ड परीक्षा में 10वीं पास प्रतिशत पिछले साल के 25.34 प्रतिशत से बढ़कर 38.12 प्रतिशत पहुंच गया।

परीक्षा में वृहद स्तर पर होने वाली नकल ने जहां इस संख्या में वृद्धि सुनिश्चित की, वहीं पैसों के लिए अंक दिलाने वाले 'नकल माफिया' ने राज्य में अपनी जड़ें मजबूत कर लीं। आइए जानें राजनीत‍ि के ऐसे ही अनसुने पहलू। तो घुमाइए स्लाइडर का पह‍िया और जान‍िए ये तीन हकीकतें ज‍िनसे मुलायम को है अपने ही गढ़ में हारने का खतरा -

नकल था बड़ा मुद्दा

नकल था बड़ा मुद्दा

नकल प्रथा ने युवाओं को 'बर्बाद' कर दिया था। नकल इतनी बड़ी सामाजिक बुराई बन गई कि मैनुपरी के विद्यार्थियों का अन्य जिलों में मजाक उड़ाया जाने लगा। कहा जाने लगा कि मैनपुरी सिर्फ नकलचियों और अपराधियों के लिए जाना जाता है।

सही फैंसले गलत वक्त पर

सही फैंसले गलत वक्त पर

एक सरकारी कॉलेज में रसायनशास्त्र पढ़ाने वाले सौरभ ने कहते हैं, "अगर पार्टी सच में युवाओं के कल्याण में दिलचस्पी लेती तो किसी उद्योग की स्थापना करती या जिले में कोई निवेश कराती तो इस बार उसे जीत मिल सकती थी। राज्य में 2012 विधानसभा चुनावों के लिए प्रचार करने के दौरान मुलायम ने राज्य में प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्कूलों में भर्ती के लिए मेधा-आधारित शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) को खत्म करने का वादा किया था। इसके बाद फैंसले का पेंच फंसता चला गया।

श‍िक्षकों पर खेला दांव

श‍िक्षकों पर खेला दांव

तत्कालीन मायावती सरकार के तहत आयोजित वर्ष 2011 की परीक्षा की पहली किस्त में 72,825 सफल उम्मीदवारों की सूची बनाई गई थी। इन्हें अभी भी नियुक्त किया जाना बाकी है क्योंकि राज्य सरकार 10वीं, 12वीं, स्नातक स्तर की परीक्षा और टीईटी आधारित चयन प्रणाली के लिए लड़ाई लड़ रही है।

रेप पर भी 'मुलायम' हैं नेता जी

रेप पर भी 'मुलायम' हैं नेता जी

अपने हाल‍िया बयान में नेता जी रेप पर भी 'मुलायम' नजर आए। उनकी पार्टी ने भी बयान से किनारा किया, पर मुलायम ने गलती नहीं स्वीकारी व रेप को गलती से होने वाला अपराध बताते हुए फांसी की ख‍िलाफत की।

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