ओडिशा वर्चुअल रैली में बोले अमित शाह- दो गज की दूरी बीजेपी को जनता से दूर नहीं रख सकती
नई दिल्ली। केंद्रीय गृह मंत्री और भारतीय जनता पार्टी के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने आज वर्चुअल रैली के माध्यम से ओडिशा के लोगों को संबोधित किया। अमित शाह ने कहा 'मैं ओडिशा की भूमि और भगवान जगन्नाथ को नमन करता हूं। उन्होंने कहा कि आज ये जो वर्चुअल रैली हो रही है वो भाजपा की परंपरा का अभिन्न अंग है। भाजपा जब से राजनीति में आई है, हम तब से जनता से संवाद करते हैं और जनता की बात सरकार तक पहुंचाते हैं। अमित शाह ने कहा 'हम जनता की समस्या को जानने की कोशिश करते हैं और उनके मुद्दों को हल कर उसके नतीजे जनता के सामने पेश करते हैं। गृह मंत्री ने कहा दो गज की दूरी भाजपा कार्यकर्ताओं को को जनता से दूर नहीं रख सकती।'

इसके बाद अमित शाह ने कहा कि कोविड-19 एक वैश्विक महामारी है। पीएम मोदी ने सामाजिक दूरियों के लिए भी सलाह दी है लेकिन यह कभी भी लोगों और भाजपा के बीच नहीं हो सकता है। राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के नेतृत्व में, हम अब आभासी रैलियों के माध्यम से लोगों के साथ संपर्क कर रहे हैं। ये जो संवाद परंपरा भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने चालू रखी है वो दुनिया की राजनीति को रास्ता दिखाने वाली होगी कि ऐसी महामारी के समय भी कोई पार्टी अपने देश में लोकतंत्र की जड़ों को मजबूत करने के लिए किस तरह से जनसंवाद कर सकती है।
भाजपा के कार्यकर्ताओं ने कोरोना संकट के समय 11 करोड़ से ज्यादा लोगों को भोजन कराया है। मैं इस काम के लिए पार्टी अध्यक्ष, उनकी टीम और सभी कार्यकर्ताओं को बधाई देता हूं। गृह मंत्री ने कहा कि पीएम मोदी ने 50 करोड़ गरीब भारतीयों के लिए आयुष्मान भारत की शुरुआत की, उन्हें स्वास्थ्य का अधिकार दिया, 5 लाख रुपये के इलाज का खर्च मोदी सरकार उठा रही है।
10 करोड़ घरों में शौचालय बनाकर माताओं-बहनों को सम्मान से जीने का अधिकार दिया, 2.5 करोड़ लोगों को जिनके पास घर नहीं था उनको मोदी सरकार ने घर देने का काम किया।
इस रैली में अमित शाह ने कांग्रेस पर जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा "विपक्ष के कुछ वक्रदृष्टा आज हम पर सवाल उठाते हैं तो मैं उन्हें पूछता हूं कि उन्होंने क्या किया? कोई स्वीडन में, कोई अमेरिका में लोगों से बात करता है, इसके अलावा और क्या किया आपने? मोदी जी ने कोरोना में त्वरित सहायता के लिए 1.7 लाख करोड़ रुपये जरूरतमंदों के लिए दिए हैं।" कांग्रेस सरकार में जब मनमोहन जी प्रधानमंत्री थे तब उन्होंने RECP के निगोशिएशन की शुरुआत की थी। अगर RECP पर दस्तखत हो जाता तो इस देश का छोटा व्यापारी, उद्यमी, पशुपालक, किसान, मत्सय उद्योग ये सब अपना जीवन दुश्कर तरीके से जी पाते।












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