NEET बिल विवाद: राज्यसभा से विपक्षी सांसदों ने किया वाकआउट
नई दिल्ली, 04 फरवरी: तमिलनाडु के राज्यपाल ने गुरुवार को तमिलनाडु विधानसभा के नीट छूट विधेयक लौटा दिया था। जिसके बाद शुक्रवार को कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस और द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) सहित विपक्षी दलों के सांसदों ने राज्यसभा में विरोध किया है। विपक्षी दलों ने तमिलनाडु के राज्यपाल आर एन रवि के राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) छूट विधेयक को वापस करने के कदम के विरोध में शुक्रवार को राज्यसभा से वाकआउट किया। उन्होंने फैसले को वापस लेने की मांग की है। तमिलनाडु विधानसभा ने सितंबर में नीट को रद्द करने के लिए विधेयक पारित किया था।

एन रवि ने गुरुवार को बिल लौटाते हुए कहा कि यह बिल गरीब और ग्रामीण पृष्ठभूमि के छात्रों के हितों के खिलाफ है। राज्यसभा में इस मुद्दे को उठाते हुए तमिलनाडु के डीएमके सांसद तिरुचि शिवा और उनकी पार्टी के सदस्य सदन के वेल घुस गए। द्रमुक सांसद त्रिची शिवा ने कहा कि तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम के स्टालिन ने रवि से दो बार मुलाकात की और उनसे केंद्र सरकार को विधेयक भेजने का आग्रह किया। लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। उन्होंने संघीय भावना के खिलाफ काम किया।
द्रमुक नेताओं ने इस मुद्दे पर चर्चा करने पर जोर दिया लेकिन राज्यसभा के सभापति एम वेंकैया नायडू ने इस मामले पर चर्चा करने से इनकार कर दिया। डीएमके के सांसदों ने कहा कि तमिलनाडु विधानसभा ने नीट छूट विधेयक को सर्वसम्मति से पारित किया और राज्यपाल की कार्रवाई राज्य के लोगों की इच्छा के खिलाफ है। यह मामला सदन के शून्यकाल के दौरान उठाया गया था। लोकसभा में भी सदस्यों ने तमिलनाडु के राज्यपाल के खिलाफ वॉकआउट किया था।
अंडरग्रेजुएट मेडिकल डिग्री कोर्स बिल सितंबर 2021 में द्रमुक के नेतृत्व वाली राज्य सरकार ने विधानसभा में पारित किया था, ताकि सुप्रीम कोर्ट द्वारा 2017 में नीट को अनिवार्य करने से पहले केवल कक्षा 12 के अंकों पर विचार कर तमिलनाडु की मेडिकल प्रवेश की प्रक्रिया को बहाल किया जा सके। जब संगठन विधेयक की स्थिति पर एक आरटीआई आवेदन दायर किया, तो राज्यपाल के कार्यालय ने पिछले दिसंबर में जवाब दिया कि "फाइल विचाराधीन है"।












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