TN Chunav: 'सोनिया-मनमोहन संग गहरी दोस्ती निभाई, राहुल भाई जैसे, अब पीठ में छुरा घोंपा', DMK का 20 साल का दर्द

DMK Congress Alliance Breaks: तमिलनाडु की राजनीति में 2026 के विधानसभा चुनाव ने न सिर्फ सत्ता का समीकरण बदला, बल्कि 20 साल पुराने DMK-कांग्रेस गठबंधन को हमेशा के लिए तोड़ दिया। टीवीके के 108 सीटों के साथ कांग्रेस के 5 विधायकों ने विजय को समर्थन दे दिया। इस फैसले पर DMK का दर्द अब खुलकर सामने आ गया है।

DMK कोषाध्यक्ष टीआर बालू ने कहा, 'जब कांग्रेस मुश्किल में थी, तब DMK ने हमेशा उसका साथ दिया। हमने सोनिया गांधी और दिवंगत मनमोहन सिंह के साथ गहरी दोस्ती निभाई। राहुल गांधी स्टालिन को 'भाई' कहकर बुलाते थे। लेकिन अब उन्होंने पांच विधायकों को टीवीके के खेमे में भेजकर पीठ में छुरा घोंप दिया।' यह बयान सिर्फ गुस्सा नहीं, बल्कि 20 साल की भावनात्मक और वैचारिक साझेदारी का दर्द है।

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20 साल का गठबंधन: विश्वास, कीमत और अंत

DMK और कांग्रेस का रिश्ता 2004 से चला आ रहा था। जब कांग्रेस केंद्र में सत्ता में थी तब DMK ने उसे बिना शर्त समर्थन दिया। 2019 के लोकसभा चुनाव में DMK ने राहुल गांधी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाने का प्रस्ताव रखा। स्टालिन ने चेन्नई में खुद यह ऐलान किया। DMK गठबंधन ने राहुल को आगे बढ़ाया, देश में सबसे ज्यादा सांसद भेजे और संसद के अंदर-बाहर कंधे से कंधा मिलाकर BJP का विरोध किया।

बालू ने याद दिलाया, 'हमने भारी कीमत चुकाई, लेकिन खुले दिल से किया।' DMK ने कांग्रेस के संकट के हर मौके पर साथ दिया, चाहे 2014 की हार हो या 2019 का लोकसभा प्रदर्शन।

2026 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने सत्ता में हिस्सेदारी की मांग की। DMK ने मना कर दिया। सीट बंटवारे और शेयरिंग पर टकराव हुआ। नतीजा ये हुआ कि कांग्रेस ने टीवीके का हाथ थाम लिया। बालू का कहना है, 'सेकुलर प्रोग्रेसिव अलायंस की मेहनत से सीटें जीतीं, लेकिन कांग्रेस ने अपने पांच विधायकों को दांव पर लगा दिया। यह अवसरवाद है, जिसे सिद्धांत का जामा पहनाने की कोशिश की जा रही है।'

DMK प्रवक्ता का बयान: 'विजय को शुभकामनाएं, कांग्रेस ने पीठ में छुरा घोंपा'

DMK प्रवक्ता सरवनन अन्नादुरई ने कहा, 'हम थलापति विजय को 7 मई को शपथ ग्रहण के लिए शुभकामनाएं देते हैं। लेकिन कांग्रेस ने पाला बदलकर टीवीके का समर्थन किया। उनके दिए गए कारण विश्वसनीय नहीं हैं। यह पीठ में छुरा घोंपना है।' DMK अब विपक्ष में है। स्टालिन सरकार गिर गई। 59 सीटों पर सिमट गई पार्टी के लिए यह सबसे बड़ा झटका है।

क्यों इतना दर्द? व्यक्तिगत और वैचारिक दोनों स्तर पर धोखा

DMK नेताओं के मुताबिक, यह सिर्फ राजनीतिक टूट नहीं, बल्कि व्यक्तिगत विश्वासघात है। राहुल गांधी स्टालिन को 'भाई' कहते थे। सोनिया गांधी और मनमोहन सिंह के साथ गहरी दोस्ती थी। DMK ने कांग्रेस को तमिलनाडु में बचाए रखा। अब कांग्रेस ने टीवीके को समर्थन देकर DMK को अकेला छोड़ दिया। बालू ने साफ कहा, 'BJP अलग-अलग राज्यों में शॉर्टकट अपनाकर सत्ता हथियाती है। कांग्रेस ने तमिलनाडु में वही किया।' उनका आरोप है कि कांग्रेस ने उन मतदाताओं के साथ विश्वासघात किया जिन्होंने DMK के नेतृत्व वाली सरकार बनाने की उम्मीद में वोट दिया।

राजनीतिक नतीजे: तमिलनाडु से लेकर दिल्ली तक असर

  • द्रविड़ राजनीति का नया समीकरण: 60 साल बाद DMK-AIADMK का एकाधिकार टूटा। टीवीके-कांग्रेस गठबंधन ने गैर-द्रविड़ विकल्प को मुख्यधारा में ला दिया।
  • INDIA गठबंधन पर सवाल: DMK अब सोच रही है कि क्या वह राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस के साथ बनी रहे। लोकसभा में कांग्रेस के मुद्दों का समर्थन न करने की बात हो रही है।
  • तमिलनाडु में कांग्रेस की वापसी: 1967 के बाद पहली बार कांग्रेस मंत्रिमंडल में शामिल हो रही है। अगर थारहाई कुथबर्ट जैसी महिला नेता मंत्री बनीं तो यह सामाजिक न्याय का नया प्रतीक बनेगा।
  • DMK की रणनीति: पार्टी अब विपक्ष में मजबूत आलोचना करेगी। स्टालिन परिवारवाद, भ्रष्टाचार और युवाओं से दूर होने के आरोपों का जवाब देगी।

क्या DMK वापसी कर पाएगी?

DMK का दर्द जायज है। 20 साल की साझेदारी एक पल में टूट गई। लेकिन राजनीति में दोस्ती स्थायी नहीं होती। बालू ने आखिर में कहा, 'धोखा भी हमारे लिए नई बात नहीं। वक्त ही इसका जवाब देगा।' तमिलनाडु की जनता ने बदलाव चुना। युवा, फैन बेस और नई उम्मीद ने पुरानी व्यवस्था को हिला दिया। DMK अब 59 सीटों के साथ विपक्ष में बैठेगी। कांग्रेस पहली बार 60 साल बाद सत्ता की साझेदार बनी। यह टूट सिर्फ तमिलनाडु तक सीमित नहीं। INDIA गठबंधन की एकता पर सवाल उठा रहा है। क्या कांग्रेस और DMK के बीच कभी पुराना रिश्ता लौटेगा? या 2026 का चुनाव द्रविड़ राजनीति का स्थायी ट्विस्ट बन गया?

भावनाओं का हिसाब

DMK का दर्द गहरा है क्योंकि उसने कांग्रेस को भाई माना था। सोनिया, मनमोहन और राहुल के साथ निभाई गई दोस्ती अब यादों में सिमट गई। टी.आर. बालू का बयान उस दर्द को बयां करता है जो हर गठबंधन टूटने पर महसूस होता है। तमिलनाडु की जनता ने साफ संदेश दिया कि पुरानी दोस्ती से ज्यादा महत्वपूर्ण जनादेश है। अब देखना यह है कि विजय-कांग्रेस सरकार कितना स्थिर रहती है और DMK विपक्ष में कितनी आक्रामक होती है। राजनीति में दोस्ती टूटती है, लेकिन इतिहास याद रखता है। DMK का यह दर्द 2026 का सबसे बड़ा भावनात्मक मोड़ बन गया है।

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