जब रणजी मैच देखने पहुंचे थे दिलीप कुमार, बन गया था यशपाल शर्मा का करियर, मिली थी टीम इंडिया में एंट्री
नई दिल्ली, 07 जुलाई। बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता दिलीप कुमार के निधन के बाद पूरा देश शोक में है। दिलीप कुमार का लंबी बीमारी के बाद आज मुंबई के हिंदुजा अस्पताल में निधन हो गया। दिलीप कुमार एक ऐसी हस्ती थे जिन्हें आने वाली पीढ़ियां कभी भी नहीं भुला पाएंगी, वह भारतीय सिनेमा का अभिन्न अंग हैं, जिन्हें बड़े पर्दे पर देखना अपने आप में एक जबरदस्त अनुभव था। अपने जीवन में दिलीप कुमार ने इस मुकाम तक पहुंचने के लिए बहुत मेहनत की और बुलंदियों के शिखर पर पहुंचने के बाद उन्होंने कई लोगों की मदद की। इनमे से एक भारतीय क्रिकेट के स्टार खिलाड़ी यशपाल शर्मा हैं।

मेरी जिंदगी को दिलीप जी ने बनाया
भारत ने क्रिकेट का पहला विश्वकप 1983 में जीता था, इस टीम का हिस्सा यशपाल शर्मा भी थे। यशपाल शर्मा को बेहतरीन क्रिकेटर बनाने में दिलीप कुमार की भी बड़ी भूमिका थी। खुद यशपाल शर्मा इस बात को स्वीकार करते हैं। यशपाल शर्मा ने कहा कि जबतक मैं जिंदा हूं दिलीप साहब मेरे पसंदीदा रहेंगे। लोग उन्हें दिलीप कुमार कहते हैं मैं उन्हें यूसुफ भाई कहता हूं। उन्होंने ही क्रिकेट में मेरी जिंदगी को बनाया था।

रणजी मैच देखने पहुंचे थे दिलीप कुमार
यशपाल शर्मा ने बताया कि दिलीप कुमार की ही वजह से मैं रणजी से बीसीसीआई और भारतीय क्रिकेट टीम तक पहुंच पाया। मैं दिलीप कुमार साहब के साथ हमेशा भावात्मक रूप से जुड़ा रहूंगा। शर्मा ने बताया कि जब मैं पंजाब की ओर से रणजी खेल रहा था तो दिलीप कुमार जी वह मैच देखने के लिए आए थे। जब मैंने बल्लेबाजी कर ली तो दिलीप साहब से किसी ने कहा कि यशपाल शर्मा आपसे मिलना चाहते हैं।

दिलीप साहब की वजह से मिली टीम में जगह
दिलीप कुमार के साथ इस मुलाकात के बारे में यशपाल शर्मा ने कहा कि जब मैं दिलीप जी से मिला तो उन्होंने कहा कि तुम बहुत अच्छा खेलते हो, मैंने तुम्हारे लिए बीसीसीआई से बात की है। दिलीप कुमार ने राजसिंह डुंगरपुर से बात की थी। जिसके बाद यशपाल शर्मा को भारतीय टीम में जगह मिली थी। यशपाल शर्मा ने 1983 के विश्वकप में भारतीय टीम की जीत में अहम भूमिका निभाई थी।

विश्वकप में खेली जबरदस्त पारी
1983 विश्वकप में भारतीय टीम ने जबरदस्त शुरुआत की थी और वेस्टइंडीज की टीम को हराया था। विश्वकप के पहले ही मैच में यशपाल शर्मा ने 120 गेंद पर 89 रन की पारी खेली थी। जिस वक्त यशपाल शर्मा बल्लेबाजी के लिए आए उस वक्त भारत का स्कोर 3 विकेट पर 141 रन था और जल्द ही 141 के स्कोर पर पांच विकेट गिर गए। लेकिन यशपाल शर्मा ने टीम को मजबूत करते हुए 89 रनों की पारी खेली। इसके अलावा ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 40 रनों की तूफानी पारी खेली, इंग्लैंड के खिलाफ मुश्किल समय में 61 रन बनाए। विश्वकप में यशपाल ने 34.28 के औसत से 240 रन बनाए थे।












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