मोदी की मेजबानी के बाद उन्हें कोसते दिग्गी राजा
नई दिल्ली(विवेक शुक्ला) दिग्विजय सिंह की फिर जुबान फिसली। कुछ दिन पहले वे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अपने पुत्र की शदी के समारोह में मेजबानी कर रहे थे। अब उनकी निंदा कर रहे हैं।
योग दिवस को लेकर चल रही तैयारियों पर उन्होंने कहा, 'भारत सरकार द्वारा सामूहिक योग कार्यक्रम का तर्क समझ में नहीं आता? मोदी के पास विचार नहीं है और इस तरह की नौटंकी से अपनी नाकामियों को छिपाना चाहते हैं।'
धार्मिक मुद्दा
वरिष्ठ चिंतक शंभूनाथ शुक्ल कहते हैं कि अब उन्हें ये कौन बताए कि वे योग को धार्मिक मुद्दा बना रहे हैं। हिमालय के दुर्गम क्षेत्रों में वहां के योगी बिना नदी के पानी में उतरे नदी पार कर लेते हैं। पेड़ के बराबर ऊँचाई से वे कूद सकते हैं।
नहीं मानते
वे योग के पातंजलि सूत्रों को नहीं मानते पर योगी हैं। योग एक अनुशासन है धर्म से उसका कोई वास्ता नहीं। सूर्यासन अथवा पद्मासन, मंडूकासन या मर्कटासन पर बैठने का मतलब यह कहां से हो गया कि वह सूर्योपासना या प्राकृतिक के जीवों की उपासना कर रहा है। योग तो प्रकृति के साथ सामंजस्य बनाए रखने का एक जरिया है।
बयान देने में माहिर
बहरहाल, दिग्जी राजा का ये अपने आप में कथित धर्मनिरपेक्ष बयान है। वे इस तरह के बयान देने में माहिर हैं। आखिर वे बयानों की ही तो रोटी खाते हैं। वे बयानों की ही सियासत करते हैं। अब वे एक नगर निगम का चुनाव जीतने की भी हालत में नहीं है। इसलिए अपनी आका सोनिया गांधी और राहुल गांधी को खुश करने के लिए उन्हें कुछ तो बोलना है।













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