डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन बिल राज्यसभा में भी पास, जानिए क्या होगा फायदा?
Data Protection Bill: लोकसभा में पास होने के बाद बुधवार को राज्यसभा में भी डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन बिल पास हो गया है। राज्यसभा ने व्यक्तिगत डेटा संरक्षण विधेयक को ध्वनि मत से पारित कर दिया।
मणिपुर मुद्दे पर विपक्ष के सदन से वॉकआउट के बाद राज्यसभा में डेटा प्रोटेक्शन बिल को पास हो गया। इससे पहले यह बिल सोमवार (7 अगस्त) को लोकसभा से पारित किया गया था।

लोकसभा में 7 अगस्त को हुआ था पास
दो दिन पहले यानी की 7 अगस्त को इस बिल को विपक्षी सांसदों के मणिपुर मुद्दे पर हंगामे के बीच लोकसभा में मंजूरी मिली थी। इससे पहले 3 अगस्त को केंद्रीय आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इस विधेयक को लोकसभा में पेश किया था।
विपक्ष ने किया था बिल का विरोध
इस बिल का विरोध करते हुए विपक्ष ने इसे आगे की समीक्षा के लिए स्थायी समिति के पास भेजने की मांग की थी। दरअसल, यह विधेयक उन निजी कंपनियों के लिए आवश्यकताएं निर्धारित करेगा, जो ऑनलाइन डेटा इकट्ठा कर रही हैं, जो कि सरकार के साथ-साथ कानून प्रवर्तन एजेंसियों के लिए भी अपवाद हैं।
बता दें कि यह विधेयक सुप्रीम कोर्ट द्वारा यह घोषित किए जाने के छह साल बाद आया है कि 'निजता का अधिकार' एक मौलिक अधिकार है। इसमें ऐसे प्रावधान शामिल हैं, जो ऑनलाइन प्लेटफॉर्म द्वारा यूजर्स की पर्सनल जानकारी के दुरुपयोग पर अंकुश लगाएंगे।
बिल को लेकर अश्विनी वैष्णव का बयान
इस विधेयक को लेकर केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि विधेयक में प्रत्येक नागरिक के डेटा के संग्रह और प्रसंस्करण के संबंध में निजी और सरकारी संस्थाओं पर कई दायित्व निर्धारित किए गए हैं।
विधेयक के बारे में बताते हुए केंद्रीय मंत्री वैष्णव ने राज्यसभा में कहा, "अच्छा होता अगर विपक्ष आज (सदन में) विधेयक पर चर्चा करता। लेकिन किसी भी विपक्षी नेता या सदस्य को नागरिकों के अधिकारों की चिंता नहीं है।" इसी के साथ मंत्री वैष्णव ने यह भी दावा किया कि यह विधेयक महत्वपूर्ण सार्वजनिक परामर्श के बाद सदन में लाया गया है।
प्वाइंट्स में समझिए इस बिल के फायदे
- लोगों के निजी डेटा को सुरक्षित करने के लिए यह बिल लाया गया है।
- इस बिल के बाद आप अपने डेटा कलेक्शन, स्टोरेज और प्रोसेसिंग के बारे में जानकारी मांग सकेंगे।
- इसी के साथ कंपनियों को भी यह बताना जरूरी होगा कि वो आपका कौन सा डेटा ले रहे हैं और उसका कहां यूज होगा।
- डाटा उल्लंघन या डाटा चोरी के मामले में कंपनियों को डाटा प्रोटेक्शन बोर्ड (डीपीबी) और यूजर्स को इसकी सूचना देनी होगी।
- वहीं इसका उल्लंघन करने पर 250 करोड़ रुपए तक का जुर्माना लग सकता है।












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