भारत-पाक के कलाम और कादिर के फर्क को समझिए
नई दिल्ली (विवेक शुक्ला) दो वैज्ञानिकों के फर्क को जरा समझिए। कलाम (अबुल फकीर जैनुलबादीन अब्दुल कलाम) हमारे थे और कादिर (अब्दुल कादिर खान) पाकिस्तान के।
मूल रूप से भारतीय
वरिष्ठ लेखक शंभूनाथ शुक्ला कहते हैं कि दोनों मूल रूप से भारतीय थे। दोनों परमाणु वैज्ञानिक और धर्मभीरु। पर जहां कलाम का धर्म उन्हें मनुष्य और मनुष्यता की सेवा करना सिखाता था वहीं कादिर की परमाणु समझ उन्हें इस्लामिक बम बनाने को प्रेरित करती थी।
कलाम 1931 में रामेश्वरम के पास धनुषकोटि में पैदा हुए और कादिर खान 1936 में भोपाल में। एक मरने के बाद अमर हो गए और दूसरे को हर जगह दुत्कार मिली। कभी चोरी का इल्जाम लगा तो कभी बेईमानी का। यही अंतर है आंतरिक शिक्षा और संस्कार का।
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फर्क साउथ और नार्थ का
शायद यही फर्क साउथ और नार्थ इंडिया का भी है। बहरहाल,आपको पता होना चाहिए कि इन धूर्त और दोगले वामपंथियों ने ही पहली बार कलाम साहब के खिलाफ लक्ष्मी सहगल को राष्ट्रपति केचुनाव में उम्मीदवार बनाया था।
मेरी बाइक और डा. एपीजे अब्दुल कलाम की कार!
कांग्रेस का खेल
कांग्रेस ने इन्हें राष्ट्रपति बनने नहीं दिया और दुबारा प्रतिभा पाटिल को ले आये। बीजेपी ने कलाम को प्रेसिडेंट बनाया था और कांग्रेस उन्हें हटाकर प्रतिभा पाटिल को लाई थी।
दरअसल कलाम सदियों में आते हैं और युगों -युगों के लिए अमर हो जाते हैं। कलाम कभी मरते नहीं ,वे जिंदा रह जाते हैं अपने अनुसंधानों, अपनी खोजों, अपने जीवंत उद्घोषों में।वे ज्ञान को दिमाग की कैद से आज़ाद कर देते हैं जन जन के लिए।













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