क्या चुनाव में राजीव गांधी का मुद्दा उछालकर मोदी ने बड़ी गलती कर दी है?

नई दिल्ली- पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी (Rajiv Gandhi)पर दिए गए नरेंद्र मोदी के बयान को हवा देने के लिए कांग्रेस कोई कोर-कसर नहीं छोड़ रही है। पार्टी और उसके समर्थकों ने इस मुद्दे पर अपने सारे मोर्चे खोल दिए हैं। चुनाव का वक्त है, इसलिए इसे अमेठी और रायबरेली में सोमवार को हो रहे मतदान से भी अलग करके नहीं देखा जा सकता। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या मोदी को यह सब कहते हुए उसके रिएक्शन का अंदाजा नहीं था। आइए समझने की कोशिश करते हैं कि क्या मोदी ने पांचवें दौर के चुनाव से पहले राजीव गांधी से जुड़े भ्रष्टाचार का मुद्दा उछालकर चुनावी गलती तो नहीं कर दी है?

राजीव गांधी के मसले पर क्यों मचा है बवाल?

राजीव गांधी के मसले पर क्यों मचा है बवाल?

जाहिर है कि 'चौकीदार चोर है' के नारे लगवाकर इस लोकसभा चुनाव के बाद कांग्रेस की सरकार बनाने के प्रयास में जुटे कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी (Rahul Gandhi) को उनके पिता पर मोदी का हमला नागवार गुजरा होगा। राजीव गांधी की औलाद होने के नाते यह स्वाभाविक भी है और आमतौर पर यह किसी भी बेटे के साथ हो सकता है। राहुल गांधी ने ट्विटर के माध्यम से अंग्रेजी में अपनी प्रतिक्रिया कुछ इस तरह से देने की कोशिश की, "मोदीजी, लड़ाई खत्म हो चुकी है। आपके कर्म आपका इंतजार कर रहे हैं। खुद के बारे में अपनी आंतरिक सोच को मेरे पिता पर थोपना भी आपको नहीं बचा पाएगा। सप्रेम और झप्पी के साथ- राहुल।" जब पार्टी के युवा अध्यक्ष पीएम मोदी को जवाब देने के लिए कूद पड़े थे, तो पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम भला क्यों चुप रहते। अलबत्ता हिंदी नहीं बोलने वाले पी चिदंबरम ने इस मौके पर हिंदी में ट्वीट करके पीएम मोदी के खिलाफ अपनी नाराजगी जाहिर करना बेहतर समझा। उन्होंने लिखा, "पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी को लेकर प्रधानमंत्री के बयान से साफ होता है कि वह सामने दिख रही हार से किस कदर निराश और डरे हुए हैं!" एक ट्वीट में उन्होंने एक कहावत के जरिए भी मोदी को उनके नजरिए से हुई गलती समझाने की कोशिश की- " 'मृत व्यक्ति के लिए कभी बुरा ना बोलें' क्या पीएम ने यह प्राचीन कहावत सुनी है? क्या कोई भी धर्म किसी मृत व्यक्ति को अपमानित करने की इजाजत देता है?" इस कड़ी में एक और नाम की चर्चा करना जरूरी है। कांग्रेस के ओवरसीज चीफ सैम पित्रोदा ने भी ट्विटर के जरिए यह बताने की कोशिश की, कि उन्हें राजीव गांधी पर पीएम मोदी के बयान से कितना ठेस पहुंचा है। उन्हें इससे इतना कष्ट पहुंचा कि उन्होंने खुद के गुजराती होने पर भी शर्मिंदगी जता दी, क्योंकि पीएम मोदी भी गुजरात से ही आते हैं। सबसे दिलचस्प ट्वीट तो आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह की रही। वे राजीव गांधी पर पीएम मोदी की टिप्पणी से इतने आहत हुए कि राजनीतिक गुस्से में मोदी के लिए ऐसी बातें लिख दीं, जिसका जिक्र करना भी यहां उचित नहीं लगता।

मोदी ने राजीव गांधी के बहाने किया था राहुल पर अटैक

मोदी ने राजीव गांधी के बहाने किया था राहुल पर अटैक

शनिवार को उत्तर प्रदेश की एक रैली में प्रधानमंत्री मोदी ने राहुल गांधी पर उनके पिता पूर्व पीएम राजीव गांधी (Rajiv Gandhi) के बहाने बिना उनका नाम लिए निशाना साधा था। मोदी ने रैली में पहले राहुल गांधी की ओर इशारा करते हुए कहा कि उन्हें ये लगता है कि वो मोदी की छवि खराब करके ही जीत सकते हैं, क्योंकि बिना छवि खराब किए मोदी को हराना नामुमकिन है। पीएम ने इसी पर आगे अपने अंदाज में जवाब देते हुए कहा कि, "आपके पिताजी को आपके राज दरबारियों ने गाजे-बाजे के साथ 'मिस्टर क्लीन' बना दिया था। लेकिन, देखते ही देखते 'भ्रष्टाचारी नंबर वन' के रूप में उनका जीवनकाल समाप्त हो गया। नामदार यह अहंकार आपको खा जाएगा। ये देश गलतियां माफ करता है, मगर धोखेबाजी को कभी माफ नहीं करता।" यही नहीं प्रधानमंत्री ने ये भी दावा किया कि राफेल नाम का 'झूठ का पुलिंदा' तैयार किया गया। उन्होंने एक इंटरव्यू का हवाला देकर कहा कि 'नामदार (राहुल) ने फिर स्वीकार किया है कि इस पूरे अभियान का उनका एकमात्र लक्ष्य मोदी की छवि खराब करना है।' उन्होंने कहा कि ''मोदी पांच दशक तक बिना रुके-थके सिर्फ और सिर्फ भारत माता के लिये जिया है। टीवी स्क्रीन पर गालियां देकर 50 साल की मोदी की तपस्या को तुम धूल में नहीं मिला सकते।'' इस दौरान मोदी ने ये भी कहा कि पहले चरण के चुनाव तक जो कांग्रेस पार्टी खुद को प्रधानमंत्री पद का दावेदार बता रही थी, वह अब खुद को 'वोट कटवा' बता रही है। उन्होंने तंज कसा कि कांग्रेस का कितना पतन हो गया है, यह इसका जीता जागता सबूत है।

कांग्रेस को क्या लग रहा है?

कांग्रेस को क्या लग रहा है?

मोदी ने पूर्वी यूपी की रैली में, जहां सोमवार को चुनाव होने वाले हैं, वहां राजीव गांधी का नाम भ्रष्टाचार के सिलसिले में क्यों छेड़ा ये तो मोदी जानें। लेकिन, इतना तय है कि कांग्रेस को लगता है कि मोदी ने यह बहुत बड़ी गलती कर दी है और इसके जरिए वह कम से कम अमेठी और रायबरेली में राहुल और सोनिया के प्रति सहानुभूति लहर पैदा कर सकती है। क्योंकि, मोदी पर पलटवार करते हुए राजीव की बेटी प्रियंका ने जो ट्वीट किया है, उसका भावार्थ तो यह निकलता है। प्रियंका गांधी वाड्रा ने अपने ट्वीट में लिखा है, "शहीदों के नाम पर वोट मांगकर उनकी शहादत को अपमानित करने वाले प्रधानमंत्री ने कल अपनी बेलगाम सनक में एक नेक और पाक इंसान की शहादत का निरादर किया। जवाब अमेठी की जनता देगी जिनके लिए राजीव गांधी ने अपनी जान दी। हां मोदी जी, ‘यह देश धोकेबाजी को कभी माफ नहीं करता'।"

चुनाव पर क्या होगा असर?

चुनाव पर क्या होगा असर?

तथ्य ये है कि मोदी ने जिस इलाके में राजीव गांधी के बहाने राहुल को निशाना बनाया था, उसी इलाके में इस बार अपने गढ़ को सुरक्षित रखना कांग्रेस की फर्स्ट फैमिली की सबसे बड़ी चुनौती है। खासकर अमेठी की जंग में राहुल गांधी को पहले के चुनावों की तरह कम से कम वॉकओवर तो नहीं मिलता दिख रहा। इसके संकेत अंतिम वक्त पर वोटरों को प्रियंका की चिट्ठी, राहुल का ऑडियो संदेश और कांग्रेस को पानी पी-पी कर कोसने वाली मायावती की अपने कार्यकर्ताओं से भावनात्मक अपील में देखे जा सकते हैं। अब ये 23 मई को अमेठी का चुनाव परिणाम ही तय करेगा कि मोदी ने राजीव का नाम उछाल कर गलती कर दी है या वह बीजेपी की सोची-समझी चुनावी रणनीति का हिस्सा है।

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