बाहुबली धनंजय की बेरुखी और एकाकीपन ने जागृति को आक्रमक स्‍वभाव का बना दिया

Jagriti Singh, wife of BSP MLA Dhananjay Singh
नयी दिल्‍ली (ब्‍यूरो)। पति का प्‍यार ना मिलना, शादीशुदा जिंदगी तलाक के हासिये पर आ जाना और उसके अलावा में राजनीति में विफलता। इन चंद हालातों ने डॉक्‍टर जागृति सिंह को एकाकीकपन के मुहाने पर लाकर खड़ा कर दिया था। बाकी जो कसर बची थी वो पिता के सड़क हादसे में असमय मौत ने पूरी कर दी। जिंदगी में आये इन उतार-चढ़ावों ने जागृति को आक्रमक स्‍वभाव का बना दिया था। वो इतनी क्रूर हो गई थी कि बात-बात पर अपने नौकरों की बेरहमी से पिटाई कर देती थी।

आपको बताते चलें कि उत्‍तर प्रदेश में हुए पिछले विधानसभा चुनाव में जागृति जौनपुर के रारी विधानसभा क्षेत्र से निर्दलीय चुनाव लड़ी थी। उस वक्‍त धनंजय सिंह हत्‍या के आरोप में जेल में बंद थे। जागृति को 50 हजार वोट मिले और वो हार गईं। इस हार के बाद से जागृति परेशान रहने लगीं। इसके बाद से ही उसके पति से संबंध बिगड़ने लगे। वह सांसद के 175, साउथ एवेन्यू, चाणक्यपुरी वाले सरकारी आवास में अकेले रहने लगी।

तीन साल पहले बेटे के जन्म के बाद जागृति की दिक्कतें बढ़ गई। दबंग धनंजय सिंह जब जौनपुर से दिल्ली आते तो उनके साथ हर तरह के लोग आते थे। इससे नाखुश जागृति पति से कहती थी कि इससे उसके बेटे पर गलत प्रभाव पड़ेगा। विचारों में मतभेद के कारण सांसद ने गत जून में तलाक के लिए पटियाला हाउस कोर्ट में अर्जी दायर की थी। बताया जाता है कि जागृति अक्सर सुबह कंस्टीट्यूशन क्लब स्थित जिम जाती थी।

बेटे को साथ लेकर जिम में जाने के कारण उसका कुछ महीने पहले एक अन्य सांसद से झगड़ा हो गया था। पुलिस का कहना है कि जांच में पता चला कि जागृति पहले भी उग्र मिजाज की थी। पिटाई के दौरान नौकरों का खून निकल आने पर वह कहती थी कि उसे इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। घर के नौकर-नौकरानी को बाहर निकलने पर सख्त मनाही थी। जब वह खुद बाहर जाती थी, तो मुख्य द्वार पर ताला जड़ देती थी।

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