अयोध्या के सांसद को डिप्टी स्पीकर का उम्मीदवार क्यों बनाना चाहता है विपक्ष?
Lok Sabha Deputy Speaker Election: लोकसभा स्पीकर के चुनाव में विपक्षी इंडिया गठबंधन का अपना ही समीकरण बिगड़ गया था। विपक्ष ने कई दशकों की परंपरा तोड़ते हुए अपना उम्मीदवार तो उतार दिया, लेकिन मतदान के समय स्पष्ट तौर पर मतभेद उभर आए।
अब संभावना है कि तृणमूल कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और कांग्रेस यूपी के फैजाबाद (अयोध्या इसी लोकसभा में है) के सपा सांसद अवधेश प्रसाद को इंडिया ब्लॉक की ओर से डिप्टी स्पीकर पद का उम्मीदवार बना सकती है। इन दलों के बीच इस विषय पर मंथन होने की चर्चा है।

कांग्रेस की ओर से आ रहा था के सुरेश का ही नाम
इससे पहले ऐसी रिपोर्ट थी कि कांग्रेस स्पीकर पद के अपने उम्मीदवार और केरल से 8 बार के सांसद के सुरेश को डिप्टी स्पीकर के लिए भी फिट प्रत्याशी मान रही है और उन्हीं पर इस बार भी दांव खेलना चाहती है। कांग्रेस शुरू से उनके नाम पर दलित कार्ड खेलने की कोशिश में रही है।
अवधेश प्रसाद के नाम पर विपक्ष के बड़े नेताओं में चर्चा की खबर
लेकिन, अब सूत्रों का कहना है कि अवधेश प्रसाद को लोकसभा के डिप्टी स्पीकर का उम्मीदवार बनाने के विचार को लेकर तृणमूल कांग्रेस के महासचिव अभिषेक बनर्जी, सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के बीच पहले ही चर्चा हो चुकी है। जानकारी के अनुसार तृणमूल चीफ और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री के मन में उपजे इस विचार पर अब इंडिया ब्लॉक के अन्य दलों को भी पटरी पर लाया जाएगा।
अवधेश प्रसाद के बहाने 'मजबूत सियासी संदेश' देने का दांव!
सवाल है कि अवधेश प्रसाद के माध्यम से विपक्ष किस तरह का राजनीतिक संदेश देना चाहता है, क्योंकि तथ्य यह है कि उसके पास इस पद पर जीत के लिए संख्या गणित नहीं है। जानकारी के मुताबिक विपक्षी गठबंधन के तीनों अगुवा नेताओं को लगता है कि फैजाबाद के सांसद को आगे लाकर एक 'मजबूत सियासी संदेश' दिया जा सकता है।
अयोध्या में बीजेपी की हार को भुनाने की तैयारी!
इसकी वजह ये है कि फैजाबाद संसदीय क्षेत्र में ही अयोध्या नगरी पड़ती है, जहां रामजन्मभूमि पर भव्य राम मंदिर का नव-निर्माण हुआ है। 78 वर्षीय अवधेश प्रसाद एक दलित नेता हैं, फिर भी सामान्य निर्वाचन क्षेत्र से 50,000 से अधिक वोटों से भाजपा को हराकर जीतकर आए हैं।
मतलब, विपक्ष के नेता नंबर से ज्यादा अपने सियासी नैरेटिव को महत्त्व देना चाहते हैं। जबसे, लोकसभा चुनाव परिणाम आए हैं, अखिलेश यादव की पार्टी अपने फैजाबाद के एमपी को आगे रख रही है।
तृणमूल के एक वरिष्ठ नेता ने कहा, 'इंडिया ब्लॉक डिप्टी स्पीकर पद के लिए लड़ेगा। सत्र के बाकी तीन दिनों में....या बाद में भी....हम सामूहिक रूप से इस पद की मांग करेंगे। संभावित उम्मीदवारों पर पार्टी नेतृत्वों के बीच में आम सहमति बनाई जा रही है।'
स्पीकर के चुनाव में इंडिया ब्लॉक का सामने आ चुका है मतभेद
इससे पहले स्पीकर पद के चुनाव में इंडिया ब्लॉक में मतभेद सामने आ गए थे। टीएमसी ने पहले कांग्रेस पर बिना आम सहमति के उम्मीद घोषित करने का आरोप लगाया था। जब सत्तापक्ष के उम्मीदवार ओम बिरला ध्वनिमत से चुनाव जीते तो कांग्रेस ने कहा कि उन्होंने आम सहमति की भावना का सम्मान करते हुए मत विभाजन नहीं मांगा।
लेकिन, टीएमसी ने कहा कि मत विभाजन किया ही नहीं गया। तब इस तरह की रिपोर्ट भी आई कि अगर कांग्रेस मत विभाजन की मांग करती तो विपक्ष में दो फाड़ होने की बात सार्वजनिक होने की आशंका थी।
संविधान के अनुच्छेद 93 में स्पीकर-डिप्टी स्पीकर पद की व्यवस्था
संविधान के अनुच्छेद 93 में लोकसभा में स्पीकर और डिप्टी स्पीकर के पदों की व्यवस्था है। लेकिन, 17वीं लोकसभा में यह पद पूरे पांच साल खाली रहा। एक टीएमसी नेता से पूछा गया कि अगर सरकार अभी भी डिप्टी स्पीकर के चुनाव के प्रस्ताव को स्वीकार नहीं करती है तो क्या होगा।
इसपर उन्होंने कहा, '17वीं और 18वीं लोकसभा अलग है। अब एनडीए सरकार है, बीजेपी की नहीं। हम लगातार इस सत्र में और आगे के सत्रों में भी इस चुनाव की मांग करते रहेंगे।'












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