Deputy Speaker विपक्ष का होता है, कांग्रेस और INDIA bloc के दावों में कितना दम? गैर-BJP शासित राज्यों की लिस्ट
18th Lok Sabha News: कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने दावा किया है कि डिप्टी स्पीकर का पद हमेशा विपक्ष को देने की परंपरा रही है। कांग्रेस की अगुवाई वाला इंडिया ब्लॉक इस मुद्दे पर इस कदर अड़ गया कि दशकों बाद स्पीकर की नियुक्ति सर्वसम्मति से न होकर, चुनाव के माध्यम से हुआ।
अलबत्ता, सत्तापक्ष की ओर से बीजेपी सांसद ओम बिरला का स्पीकर पद पर निर्वाचन ध्वनिमत से ही हो गया और विपक्ष ने मत विभाजन की मांग नहीं की। लेकिन, यह तथ्य है कि उनके खिलाफ कांग्रेस सांसद के सुरेश ने भी नामांकन किया था। इसको लेकर विपक्षी इंडिया ब्लॉक में भी मतभेद उभर आए थे और टीएमसी कांग्रेस के फैसले से असहमत थी।

डिप्टी स्पीकर पद पर पहले भी सत्ताधारी दल का रहा है कब्जा
बहरहाल, अगर डिप्टी स्पीकर का पद विपक्ष को दिए जाने के राहुल गांधी के दावे की पड़ताल करें तो सच्चाई पूरी तरह से सामने आ जाती है। जवाहर लाल नेहरू से लेकर इंदिरा गांधी के कार्यकाल में भी ऐसे कई मौके आए थे, जब कांग्रेस के पास विशाल बहुमत था और उसने स्पीकर और डिप्टी स्पीकर दोनों पदों पर अपने ही सांसदों को बिठा रखा था।
गैर-बीजेपी शासित राज्यों में भी डिप्टी स्पीकर पद पर सत्तापक्ष का ही है कब्जा
लोकसभा ही नहीं, अभी भी विपक्ष दलों की ओर से शासित कई राज्यों की विधानसभाओं में सत्ताधारी दलों ने दोनों पद अपने पास ही रखे हैं या फिर डिप्टी स्पीकर का पद खाली रखा हुआ है। हम उदाहरण देकर समझेंगे और तब तय करेंगे कि कांग्रेस और विपक्षी दलों के दावों में कितनी सच्चाई है।
कांग्रेस की कथनी और करनी में दिख रहा है अंतर
अभी कर्नाटक और हिमाचल प्रदेश दोनों जगह कांग्रेस की सरकारें हैं। कर्नाटक विधानसभा के स्पीकर यूटी खादर फरीद और डिप्टी स्पीकर आरएम लमानी दोनों कांग्रेस के हैं। इसी तरह से हिमाचल प्रदेश विधानसभा के स्पीकर कुलदीप सिंह पठानिया और डिप्टी स्पीकर विनय कुमार दोनों ही कांग्रेस के विधायक हैं। तेलंगाना में भी सात महीने से कांग्रेस की सरकार है और वहां अभी तक डिप्टी स्पीकर का पद खाली रखा गया है।
इंडिया ब्लॉक शासित राज्यों में डिप्टी स्पीकर पद सत्ताधारी दलों के पास
पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार है और वहां विधानसभा के स्पीकर कुलतार सिंह संधवां और डिप्टी स्पीकर जय कृष्ण सिंह रौड़ी दोनों सत्ताधारी दल के सदस्य हैं। दिल्ली विधानसभा में भी स्पीकर (रामनिवास गोयल) और डिप्टी स्पीकर (राखी बिड़ला) दोनों का ही पद सत्ताधारी आम आदमी पार्टी के पास है।
पश्चिम बंगाल में टीएमसी की सरकार है और वहां भी विधानसभा में स्पीकर (बिमान बनर्जी) और डिप्टी स्पीकर (आशीष बनर्जी) दोनों ही पद सत्ताधारी दल के पास है।
तमिलनाडु में सत्ताधारी डीएमके कांग्रेस की सहयोगी दल है। वहां भी विधानसभा के स्पीकर एम अप्पावु और डिप्टी स्पीकर के पीचंडी डीएमके के सदस्य हैं। झारखंड में भी जेएमएम की अगुवाई वाली महागठबंधन सरकार है, जिसमें कांग्रेस जूनियर पार्टनर है और यहां डिप्टी स्पीकर पद खाली ही रखा गया है।
केरल में भी इंडिया ब्लॉक की सीपीएम की अगुवाई वाली एलडीएफ की सरकार है। यहां स्पीकर का पद सत्ताधारी सीपीएम के एएन शमसीर के पास है तो डिप्टी स्पीकर का पद सीपीआई के चित्तयम गोपकुमार के पास है।
संविधान के अनुच्छेद 93 में है लोकसभा स्पीकर और डिप्टी स्पीकर पद की व्यवस्था
विपक्ष कह रहा है कि अभी बात लोकसभा के डिप्टी स्पीकर पद की हो रही है। संविधान के अनुच्छेद 93 में लोकसभा स्पीकर और डिप्टी स्पीकर के पद की व्यवस्था की गई है। तथ्य यह है कि 2014 से जब से केंद्र में नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली सरकार बनी है, पहले कार्यकाल में डिप्टी स्पीकर का पद बीजेपी के सहयोगी के पास था।
पिछले पांच वर्षों से यह पद खाली ही रखा गया था। फिर भी विपक्ष ने डिप्टी स्पीकर पद पर दबाव बनाए बिना स्पीकर का चुनाव सर्वसम्मति से करने में सहयोग दिया थाथ
नेहरू और इंदिरा के कार्यकाल में स्पीकर और डिप्टी स्पीकर पद पर कांग्रेस का ही था कब्जा
जब जवाहरलाल नेहरू की अगुवाई में कांग्रेस की सरकार थी तो एम अनंथसयनम अयंगर 1952 से 1956 तक, हुकुम सिंह 1956 से 1962 तक और एसवी एस वी कृष्णमूर्ति राव 1962 से 67 तक लोकसभा के उपाध्यक्ष थे और ये सारे कांग्रेस के ही थे। जाहिर है कि इस दौरान स्पीकर का पद भी कांग्रेस के पास ही था।
जब इंदिरा गांधी प्रधानमंत्री बनीं तो 1967 से 1969 तक कांग्रेस के ही आर के खादिलकर डिप्टी स्पीकर थे और स्पीकर का पद तो स्वाभाविक तौर पर कांग्रेस के पास था ही।












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