दिल्ली हिंसा: अपने हुनर से सैकड़ों घायलों की मदद करने वाले मुस्तफाबाद के दो हज्जाम
नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली के उत्तरपूर्वी इलाकों में 24 और 25 फरवरी को हुई हिंसा में 47 लोगों की जान चली गई है। कई सौ लोग हिंसा में घायल हुए हैं। एक तरफ जहां हिंसा हो रही थी तो वहीं दूसरी ओर ऐसे लोगों की भी कमी नहीं रही जिन्होंने अपनी जान का ख्याल ना करते हुए लोगों की मदद की। मुस्तफाबाद के वसीम और शहजाद भी दो ऐसे ही शख्स हैं। पेशे से हज्जाम वसीम और शहजाद ने अपने हुनर से सैकड़ों घायलों की और ड़ॉक्टरों की मदद की।

न्यूज 18 की रिपोर्ट के मुताबिक, वसीम और शहजाद ने अपने हुनर से सैकड़ों घायलों की और ड़ॉक्टरों की मदद की। 24 फरवरी को शहजाद अपने सैलून पर ही थे। तभी उनको किसी जानकार ने पास के अलहिन्द अस्पताल आने को कहा। हिंसा के चलते हो रही अफरातफरी के बीच इस एरिया में यही अस्पताल था। जहां स्टाफ था और घायलों को इलाज दिया जा रहा था।
शहजाह बताते हैं कि वो और वसीम अस्पताल पहुंचे तो जो देखा वो डराने वाला था। सैकड़ों लोग घायल अवस्था में पहुंचे थे। बहुत से लोगों को सिरों में चोट लगी थीं। सिर में पट्टी और टांके भरने के लिए बालों को काटना होता है। डॉक्टरों के पास ना तो इतना वक्त था और ना टीम। ऐसे में शहजाद और वसीम ने अपने औजार निकाले और मदद में जुट गए। दोनों ने सैकड़ों लोगों के सिरों को शेव किया, जो घायल थे और बिना बाल हटे टांके नहीं भरे जा सकते थे। शहजाद का कहते हैं, पहले कभी इस तरह से खून टपकते सिरों पर उस्तरा और कैंची नहीं चलाई थी लेकिन मुझे लगा कि अगर डॉक्टरों और स्टाफ की मदद कर सका तो ये बहुत बड़ी इंसानियत होगी। अल हिन्द अस्पताल के डॉक्टरों का कहना है कि करीब 500 लोगों का जो हिंसा में घायल थे, उनके यहां इलाज हुआ है।
बता दें कि दिल्ली में हिंसा के दौरान मरने वालों की संख्या 48 हो गई है। घायल एक और पीड़ित ने बुधवार को दम तोड़ दिया। सोमवार शाम को जीटीबी अस्पताल में उपचार के दौरान 18 वर्षीय आकिब की मौत हो गई। आकिब को 24 फरवरी को जीटीबी में भर्ती कराया गया था। सिर्फ जीटीबी अस्पताल में ही मृतकों की संख्या बढ़कर 39 हो गई है।












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