दिल्ली पुलिस को हाईकोर्ट की फटकार, भड़काऊ भाषण देने वालों पर दर्ज हो FIR
नई दिल्ली। नॉर्थ-ईस्ट दिल्ली में हुई हिंसा से जुड़ी अर्जी पर बुधवार को दिल्ली हाईकोर्ट ने भड़काऊ भाषणों को लेकर एफआईआर ना होने पर नाराजगी जताई। हाईकोर्ट ने पुलिस को फटकारते हुए पूछा कि कितनी और मौतों का इंतजार है? आप कब भड़काऊ वीडियो के मामले में एफआईआर करेंगे। अदालत ने पुलिस से कहा है कि भड़काऊ भाषण देने वाले नेताओं पर एफआईआर होनी चाहिए। अदालत ने पुलिस से गुरुवार को भड़काऊ भाषण के मामले में अपनी स्थिति बताने को कहा है। मामले में कोर्ट कल फिर से सुनवाई करेगा। बता दें कि दिल्ली के कई हिस्सों में हुई हिंसा में अब तक 22 लोगों की मौत हो चुकी है। 200 ये ज्यादा लोग जख्मी हैं।
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हाईकोर्ट ने प्रवीर रंजन (स्पेशल कमिश्नर) से कहा कि आप दिल्ली पुलिस कमिश्नर को बताइये कि हम मामले में खुश नहीं है। अदालत भड़काऊ भाषणों के सभी मामलों में एफआईआर चाहती है। हम नहीं चाहते कि 84 दंगे जैसे हालात बन जाए, जितने भी भड़काऊ वीडियो हैं उनमें मामला दर्ज कीजिए। जस्टिस मुरलीधर ने कहा कि परिस्थिति बहुत ही खराब है। हम सबने वो वीडियो देखे हैं जिसमें कई नेता घृणास्पद भाषण दे रहे हैं। यह न्यूज चैनलों पर काफी चला है।
पुलिस अफसरों ने सुनवाई के दौरान भाजपा मिश्रा के कथित दंगा भड़काने वाले वीडियो को ना देखने की बात कही तो जज ने वहीं चार नेताओं कपिल मिश्रा, अभय वर्मा, अनुराग ठाकुर और प्रवेश वर्मा के बयान का वीडियो चलवाया। कोर्ट ने केंद्र सरकार की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर नरल तुषार मेहता से कहा, आप वीडियो देखिए और दिल्ली पुलिस कमिश्नर से पूछिए कि इस मामले में एफआईआर दर्ज होनी चाहिए या नहीं।
अदालत ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि दिल्ली में अब दूसरा '1984' (सिखों के खिलाफ हिंसा) नहीं होने देंगे। हम अभी भी 1984 के पीड़ितों के मुआवजे के मामलों से निपट रहे हैं, ऐसा दोबारा नहीं होना चाहिए। नौकरशाही में जाने के बजाय लोगों की मदद होनी चाहिए। इस माहौल में यह बहुत ही नाजुक काम है, लेकिन अब संवाद को विनम्रता के साथ बनाये रखा जाना चाहिए।












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