DU: क्या मौजूदा विवाद की जड़ें अमेरिका से जुड़ी हैं?

गौरतलब है कि भाजपा ने दिल्ली के अपने घोषणा पत्र में कहा था कि वो इस फ़ैसले को वापस कराएंगे और अब केंद्र में भाजपा की सरकार है। समझा जा रहा है कि इन्हीं दबावों के चलते ही यूजीसी अचानक जागी है। चार वर्षीय पाठ्यक्रम की पहली सूचना बेंगलोर यूनिवर्सटी को यूजीसी के ही इशारे पर ही भेजी गई थी।
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डीयू के कई प्रोफेसर्स इस मसले पर बोल तो रहे हैं पर ऑफ द रिकॉर्ड। ऐसे ही बयानों व सुझावों में सामने आया है कि अभी जो हो रहा है वो एक तरह से चुनावी राजनीति का भी हिस्सा है, क्योंकि उन्होंने चुनाव में वादा कर दिया था और दिल्ली में अगला चुनाव भी सिर पर है।
दरअसल यह मसला उस दौर से भी जुड़ रहा है कि दबाव अमरीकी है। विदेशी शिक्षा व्यवस्था के खंभे चार वर्ष पर टिके हैं तो यहां भी उसी कड़ी में फैसला लिया जा रहा है। उस समय कहा गया कि यूजीसी कानून के तहत विश्वविद्यालय में बने लोकतांत्रिक ढांचों ने इसके पक्ष में निर्णय ले लिया है।
ये भारत सरकार का बड़ा लोकलुभावन फैसला लग रहा है, लेकिन जब तक हम ये नहीं कहेंगे कि क्लिक करें उच्च शिक्षा किसी दूसरे मुल्क के दबाव में काम नहीं करेगी, तब तक ये मामला हल नहीं होगा। इसी तर्ज पर पूरा मसला तूल पकड़ रहा है।












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