भीषण ठंड में स्कूल फीस के लिए धोता था कार, झुग्गी में पढ़कर छात्र ने 12वीं में लाए 92 प्रतिशत

नई दिल्ली: हौसल हो तो इंसान तमाम मुसीबतों के बाद भी अपनी मंजिल को पा सकता है। इस बात की सही साबित किया है दिल्ली के परमेश्वर ने। जिन्होंने गरीबी का सामना करते हुए सीबीएसई बोर्ड की 12वीं की परीक्षा में 91.7 प्रतिशत अंक हासिल किया है। उनके इस हौसले की कहानी आजकल इलाके में चर्चा का बिषय बनी हुई है। साथ ही कुछ एनजीओ उनकी पढ़ाई में मदद के लिए आगे आए हैं।

पढ़ने के लिए कारों की धुलाई

पढ़ने के लिए कारों की धुलाई

NDTV की रिपोर्ट के मुताबिक परमेश्वर दिल्ली की झुग्गी बस्ती में रहते हैं। परमेश्वर की इस मेहनत से झुग्गियों में रह रहे बाकी बच्चों को काफी प्रेरणा मिलेगी। उनके परिवार की आर्थिक स्थित ठीक नहीं थी। जिस वजह से दो कमरे में 9 लोग रहते थे। बड़ी मुश्किल से उनके परिवार को दो वक्त की रोटी मिलती थी। ऐसे में फीस और पढ़ाई का खर्च उठाना उनके लिए मुश्किल था। इसके लिए उन्होंने खुद काम करना शुरू कर दिया। 10वीं पास करने के बाद परमेश्वर कारों की धुलाई का काम करने लगे। इसके एवज में वो महीने में 3000 रुपये पाते थे। इस पैसों से उन्होंने स्कूल की ड्रेस और किताबें खरीदीं।

ठंड भी नहीं तोड़ पाई हौसला

ठंड भी नहीं तोड़ पाई हौसला

दिल्ली में काफी जबरदस्त ठंड पड़ती है। उसके बावजूद परमेश्वर सुबह 4 बजे उठकर काम पर निकल जाते थे। वहां तक पहुंचने के लिए उन्हें आधे घंटे का पैदल सफर तय करना पड़ता था। ठंड में भी वो दो-तीन घंटे तक लगातार काम करते थे। इस दौरान वो 10-15 कारों की धुलाई करते थे। उनका काम हफ्ते में छह दिन रहता था। परमेश्वर के मुताबिक ठंड में जगना और काम करना आसान नहीं था। वो जब ठंडे पानी को छूते थे, तो उनके हाथ 5 मिनट तक जम जाते थे। इसके अलावा उनकी अंगुलियां सुन्न हो जाती थीं।

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    अस्पताल में रहकर की पढ़ाई

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    परमेश्वर के मुताबिक लोग कहते थे कि तुम चंद रुपये के लिए इतना अपमान क्यों सहते हो और मुश्किल काम करते हो। इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी। उनके 62 वर्षीय पिता दिल के मरीज थे। परमेश्वर मुश्किल हालात में परिवार पर बोझ नहीं बनना चाहते थे। उनकी मुश्किलें यहीं खत्म नहीं हुई। मार्च में पिता का ऑपरेशन हुआ, जिस वजह से कई दिनों तक वो अस्पताल में रहे। इस दौरान उन्होंने हिंदी की तैयारी अस्पताल में रहकर ही की। बाद में उन्होंने सीबीएसई में 91.7 प्रतिशत अंक हासिल करके परिवार का नाम रोशन किया। अब उनकी मदद को कुछ एनजीओ भी सामने आए हैं। साथ ही दिल्ली विश्वविद्यालय से इंग्लिश ऑनर्स के लिए उनका ऑनलाइन फॉर्म भी भरवाया है।

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