उपराज्यपाल के घर के बाहर धरने पर बैठे दिल्ली के मंत्री, 'सुप्रीम आदेश' का पालन करने की मांग
दिल्ली के मंत्रियों ने उपराज्यपाल के आवास के बाहर धरना दिया। हालांकि कुछ देर बाद एलजी ने उनको अंदर बुला लिया।

दिल्ली के कैबिनेट मंत्रियों का एक प्रतिनिधिमंडल शुक्रवार को उपराज्यपाल (एलजी) विनय कुमार सक्सेना के घर के बाहर धरने पर बैठ गया। वो एलजी से सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन करने की मांग कर रहे हैं। करीब डेढ़ घंटे बाद एलजी ने सभी मंत्रियों को अंदर बुलाया।
इस दौरान मीडिया से बात करते हुए दिल्ली की मंत्री आतिशी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि एलजी को चुनी हुई सरकार के फैसलों को स्वीकार करना होगा। फिर वो हमारी फाइलों पर हस्ताक्षर क्यों नहीं कर रहे हैं? हम इंतजार कर रहे हैं कि एलजी लोकतंत्र का सम्मान करेंगे और हमसे मिलेंगे।
हालांकि बाद में उन्होंने ट्वीट कर लिखा कि डेढ़ घंटे के इंतजार के बाद आखिरकार एलजी साहब को चुनी हुई सरकार के मंत्रियों से बात करने का समय मिल ही गया। उम्मीद है वे संविधान, जनमत और कोर्ट के निर्णय का सम्मान करेंगे।
सीएम ने कही ये बात
वहीं दूसरी ओर सीएम ने ट्वीट कर लिखा कि एलजी साहब सुप्रीम कोर्ट का आदेश क्यों नहीं मान रहे? दो दिन से सर्विसेज सेक्रेटरी की फाइल साइन क्यों नहीं की? कहा जा रहा है कि केंद्र अगले हफ्ते आर्डिनेंस लाकर कोर्ट के आदेश को पलटने वाली है? क्या केंद्र सरकार सुप्रीम कोर्ट के आदेश को पलटने की साजिश कर रही है? क्या LG साहिब आर्डिनेंस का इंतजार कर रहे हैं, इसलिए फाइल साइन नहीं कर रहे?
एक अन्य ट्वीट में उन्होंने लिखा कि मैंने अभी एलजी से मिलने का टाइम मांगा है। हमारे मंत्री उनके घर के बाहर बैठे हैं। हम सब उनसे मिलकर समझना चाहते हैं कि वो SC के आदेश का पालन क्यों नहीं कर रहे?
सौरभ भारद्वाज ने भी साधा निशाना
मामले में दिल्ली के सेवा मंत्री सौरभ भारद्वाज ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक बेंच के फैसले के बाद केंद्र सरकार परेशान और नर्वस है। अगर चुनी हुई केजरीवाल सरकार के पास पूरा कंट्रोल आ गया, तो केंद्र का दिल्ली की सत्ता पर कब्जा हट जाएगा। अब वो अध्यादेश लाने की कोशिश कर रहे हैं, ताकि सुप्रीम कोर्ट के आदेश को बाईपास कर सकें।
सेवा सचिव के ट्रांसफर की फाइल फंसी
आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने ट्रांसफर-पोस्टिंग का अधिकार दिल्ली सरकार को दे दिया। जिसके तहत सबसे पहले सेवा सचिव आशीष मोरे का ट्रांसफर किया गया, लेकिन एलजी ने वो फाइल पास नहीं की। ऐसे में अन्य अधिकारियों के ट्रांसफर का मामला लटका हुआ है।
दो दिन से अटकी है फाइल?
मामले में दिल्ली के मंत्री कैलाश गहलोत ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने साफ आदेश दिया था कि एलजी जनता द्वारा चुनी गई सरकार के फैसले को मानेंगे, लेकिन वो ऐसा नहीं कर रहे। दो दिन से वो फाइल लटकाएं पड़े हैं। अगर हर फाइल पर इतना समय लगेगा तो दिल्ली सरकार काम कैसे करेगी?












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