दिल्ली हाईकोर्ट का सुझाव, 'कबूतरों की संख्या रोकने के लिए दी जाएं गर्भनिरोधक गोलियां'

राजधानी में बढ़ती कबूतरों की संख्या पर दिल्ली हाईकोर्ट ने चिंता व्यक्त की है। दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार को कहा कि उनकी संख्या को नियंत्रित करने के लिए उन्हें गर्भनिरोधक गोलियां दी जाएं।

नई दिल्ली। राजधानी में बढ़ती कबूतरों की संख्या पर दिल्ली हाईकोर्ट ने चिंता व्यक्त की है। दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार को कहा कि उनकी संख्या को नियंत्रित करने के लिए उन्हें गर्भनिरोधक गोलियां दी जाएं। कार्यवाहक चीफ जस्टिस गीता मित्तल और न्यायमूर्ति सी हरि शंकर की बेंच ने कहा कि इंग्लैंड में ऐसा होता है तो हम इनकी संख्या रोकने के लिए ऐसा क्यों नहीं करते हैं? हाईकोर्ट ने ये बातें दिल्ली में कुत्तों की बढ़ती संख्या को लेकर दाखिल एक याचिका की सुनवाई के दौरान कहीं। कोर्ट ने कुत्तों के नसबंदी केंद्रों नें बदतर हालातों पर भी नाराजगी जताई।

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दिल्ली हाईकोर्ट में कुत्तों की बढ़ती संख्या को लेकर एक याचिका दाखिल की गई थी। ये याचिका दक्षिण दिल्ली के तेखांद गांव के रहने वाले एक व्यक्ति ने डाली थी। इसपर सुनवाई करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने कबूतरों की संख्या पर भी चिंता जाहिर की। बेंच ने कहा, 'इंग्लैंड में प्राधिकारी कबूतरों की संख्या रोकने के लिए मौखिक गर्भनिरोधक का इस्तेमाल करते हैं। कबूतरों की संख्या काफी बढ़ गई है, ऐसे में हम यहां इसका इस्तेमाल क्यों नहीं करते?' कोर्ट ने सुझाव दिया कि गर्भनिरोधक को कबूतरों को दिए जाने वाले खाने में मिला दिया जाए।

याचिकाकर्ता ने गांव में पशुचिकित्सा अस्पताल बनाने का विरोध किया है। उसका कहना है कि तुगलकाबाद गांव में पशुचिकित्सा का इससे बड़ा अस्पताल है। हाईकोर्ट की बेंच ने निगमों से यह सूचित करने के लिए कहा कि वे किस तरह से नसबंदी के लिए कुत्तों की पहचान करते हैं। नसबंदी केंद्रों की जांच के लिए कोर्ट द्वारा गठित वकीलों के पैनल ने कोर्ट को केंद्रों में दयनीय स्थितियों और सुविधाओं की कमी के बारे में सूचित किया।

निरीक्षण दल की अध्यक्षता करने वाले दिल्ली सरकार के अतिरिक्त स्थायी वकील नौशाद अहमद खान ने बेंच को बताया कि केंद्रों में पशु के शवों और सर्जिकल वेस्ट का निपटान करने की कोई सुविधा नहीं है। वहां स्वच्छता की भी भारी कमी थी। उन्होंने बताया कि एक केंद्र में नसबंदी और सर्जरी किचन में की गई थी, जिसका इस्तेमाल ऑपरेशन थियेटर के रूप में किया जा रहा था। इसपर ध्यान देते हुए, बेंच ने शहर के नागरिक निगमों द्वारा संचालित कुत्तों के नसबंदी केंद्रों की खराब स्थिति पर भी नाराजगी व्यक्त की। कोर्ट ने तीनों निगमों की पशु चिकित्सा सेवाओं के निदेशकों को 25 अप्रैल को अदालत के समाने हाजिर होने का आदेश दिया है।

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